Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

मृत्यु के बाद के साथी - प्रेरक कहानी (Mratyu Ke Baad Ke Sathi)


Add To Favorites Change Font Size
एक व्यक्ति के तीन घनिष्ठ मित्र थे। उन्होंने जीवन भर उसका साथ निभाया। जब वह मरने की अवस्था के निकट पहुँचा तो अपने मित्रों को पास बुलाकर बोला- अब मेरा अंतिम समय आ गया है। तुम लोगों ने आजीवन मेरा साथ दिया है। मृत्यु के बाद भी क्या तुम लोग मेरा साथ दोगे?
पहला मित्र बोला- मैंने जीवन भर तुम्हारा साथ निभाया। लेकिन अब मैं बेबस हूँ। इससे आगे अब मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता हूँ।

दूसरा मित्र बोला- मैं मृत्यु को नहीं रोक सकता। मैंने आजीवन तुम्हारा हर परिस्थिति में साथ दिया है। तुम्हारे जाने के बाद, मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि तुम्हारी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया यथावत संपन्न हो।

तीसरा मित्र बोला- मित्र! तुम तनिक भी चिंता मत करो, मैं मृत्यु के बाद भी तुम्हारा साथ दूँगा, तुम जहाँ भी जाओगे, मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।

मनुष्य के ये तीन घनिष्ट मित्र हैं- धन, परिवार एवं कर्म। इन तीनों में से मनुष्य के कर्म ही मृत्यु के बाद भी उसका साथ निभाते हैं।
यह भी जानें

Prerak-kahani Karm Prerak-kahaniDost Prerak-kahaniDosti Prerak-kahaniTeen Mitra Prerak-kahaniAfter Death Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

अपनी गठरी टटोलें - प्रेरक कहानी

पहला यात्री बोला: महोदय मैं एक नामी ठग हूँ परन्तु आप तो महाठग हैं। आप मेरे भी गुरू निकले। दूसरे यात्री बोला: कैसे?

बुरी परिस्थिति में भी अपनी उम्मीद ना छोड़े - प्रेरक कहानी

एक बार एक व्यक्ति रेगिस्तान में कहीं भटक गया। उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी बहुत चीजें थीं, वो जल्द ही ख़त्म हो गयीं थीं। पिछले दो दिनों से वह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था।

साधु संगत से चोर ने चोरी छोड़ी - प्रेरक कहानी

एक डाकू था, जो लूट पाट करता था। एक बार एक गांव से धन लूटकर वो भाग रहा था कि घोड़े पर से गिर कर घायल हो गया। उसने देखा पास में ही एक साघू की कुटिया है

कठिन परिश्रम, स्वाभिमान का मीठा फल - प्रेरक कहानी

उसके सारे साथी उससे बहुत ही ज्यादा जलते थे। एक दिन उनके मित्रों ने उस लड़के पर एक लांछन लगाना चाहा और उसे झूठे आरोप में फसाने का उन्होंने फैसला किया।...

जहां खतरा है, वहां खतरा नहीं होता - प्रेरक कहानी

कोई दस फ़ीट नीचे रह गया होगा वह लड़का, तब वह बूढा खडा हुआ और चिल्लाया, सावधान! बेटे सावधान होकर उतरना, होश से उतरना!...

राजा हैं, फिर भी घमंडी ना बनें - प्रेरक कहानी

साधु तेजी से राजमहल की ओर गए और बिना प्रहरियों से पूछे सीधे अंदर चले गए। राजा ने देखा तो वो गुस्से में भर गया। राजा बोला: ये क्या उदण्डता है महात्मा जी!...

सबसे बड़ा पुण्य क्या है? - प्रेरक कहानी

क राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था। वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था।

Shiv Chalisa - Shiv Chalisa
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP