Shri Ram Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

मृत्यु के बाद के साथी - प्रेरक कहानी (Mratyu Ke Baad Ke Sathi)


Add To Favorites Change Font Size
एक व्यक्ति के तीन घनिष्ठ मित्र थे। उन्होंने जीवन भर उसका साथ निभाया। जब वह मरने की अवस्था के निकट पहुँचा तो अपने मित्रों को पास बुलाकर बोला- अब मेरा अंतिम समय आ गया है। तुम लोगों ने आजीवन मेरा साथ दिया है। मृत्यु के बाद भी क्या तुम लोग मेरा साथ दोगे?
पहला मित्र बोला- मैंने जीवन भर तुम्हारा साथ निभाया। लेकिन अब मैं बेबस हूँ। इससे आगे अब मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता हूँ।

दूसरा मित्र बोला- मैं मृत्यु को नहीं रोक सकता। मैंने आजीवन तुम्हारा हर परिस्थिति में साथ दिया है। तुम्हारे जाने के बाद, मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि तुम्हारी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया यथावत संपन्न हो।

तीसरा मित्र बोला- मित्र! तुम तनिक भी चिंता मत करो, मैं मृत्यु के बाद भी तुम्हारा साथ दूँगा, तुम जहाँ भी जाओगे, मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।

मनुष्य के ये तीन घनिष्ट मित्र हैं- धन, परिवार एवं कर्म। इन तीनों में से मनुष्य के कर्म ही मृत्यु के बाद भी उसका साथ निभाते हैं।
यह भी जानें

Prerak-kahani Karm Prerak-kahaniDost Prerak-kahaniDosti Prerak-kahaniTeen Mitra Prerak-kahaniAfter Death Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

जगन्नाथ मंदिर में प्रेम के पद - सत्य कथा

जगन्नाथ जी की सत्य कथा : उड़ीसा में बैंगन बेचनेवाले की एक बालिका थी। दुनिया की दृष्टि से उसमें कोई अच्छाई नहीं थी।

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा जगन्नाथ जी दर्शन - सत्य कथा

जगन्नाथ जी का दर्शन | जगन्नाथ जी ने आपके लिए प्रसाद भेजा है | मेरे मंदिर के चारों द्वारों पर हनुमान का पहरा है | वह स्थान तुलसी चौरा नाम से विख्यात हुआ..

जगन्नाथ जी का खिचड़ी भोग - सत्य कथा

कर्मा बाई जी, जगन्नाथ पुरी में रहती थी और भगवान को बचपन से ही पुत्र रूप में भजती थीं।

भगवान को आपके धन की कोई आवश्यकता नहीं - प्रेरक कहानी

पुरानी बात है एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था। सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था। जो भी जरुरी काम हो सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था...

भक्ति में आडंबर नहीं चाहिए होता

न्यायाधीश ने राजा को बताया, कि एक आदमी अपराधी नहीं है,पर चुप रहकर एक तरह से अपराध की मौन स्वीकृति दे रहा है। इसे क्या दंड दिया जाना चाहिए?

हमारी लालसाएँ और वृत्तियाँ नहीं बदलती - प्रेरक कहानी

एक पेड़ पर दो बाज रहते थे। दोनों अक्सर एक साथ शिकार की तलाश में निकलते और जो भी पाते, उसे शाम को मिल-बांट कर खाते..

अंध-अनुसरण कैसे पनपता है?- प्रेरक कहानी

इंस्पेक्शन के दौरान उन्होंने देखा कि कैम्प एरिया के मैदान में दो सिपाही एक बैंच की पहरेदारी कर रहे हैं।..

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP