मृत्यु के बाद के साथी - प्रेरक कहानी (Mratyu Ke Baad Ke Sathi)


Add To Favorites

एक व्यक्ति के तीन घनिष्ठ मित्र थे। उन्होंने जीवन भर उसका साथ निभाया। जब वह मरने की अवस्था के निकट पहुँचा तो अपने मित्रों को पास बुलाकर बोला- अब मेरा अंतिम समय आ गया है। तुम लोगों ने आजीवन मेरा साथ दिया है। मृत्यु के बाद भी क्या तुम लोग मेरा साथ दोगे?

पहला मित्र बोला- मैंने जीवन भर तुम्हारा साथ निभाया। लेकिन अब मैं बेबस हूँ। इससे आगे अब मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता हूँ।

दूसरा मित्र बोला- मैं मृत्यु को नहीं रोक सकता। मैंने आजीवन तुम्हारा हर परिस्थिति में साथ दिया है। तुम्हारे जाने के बाद, मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि तुम्हारी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया यथावत संपन्न हो।

तीसरा मित्र बोला- मित्र! तुम तनिक भी चिंता मत करो, मैं मृत्यु के बाद भी तुम्हारा साथ दूँगा, तुम जहाँ भी जाओगे, मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।

मनुष्य के ये तीन घनिष्ट मित्र हैं- धन, परिवार एवं कर्म। इन तीनों में से मनुष्य के कर्म ही मृत्यु के बाद भी उसका साथ निभाते हैं।

यह भी जानें

Prerak-kahani Karm Prerak-kahaniDost Prerak-kahaniDosti Prerak-kahaniTeen Mitra Prerak-kahaniAfter Death Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

बहरे भक्त का सत्संग प्रेम - प्रेरक कहानी

एक संत के पास बहरा आदमी सत्संग सुनने आता था। उसे कान तो थे पर वे नाड़ियों से जुड़े नहीं थे। एकदम बहरा, एक शब्द भी सुन नहीं सकता था।

प्रभु के लिए 1 लाख रुपये की माला - प्रेरक कहानी

कथा उस समय की है जब मुग़ल शासन था। एक पुजारीजी रोज ठाकुरजी के लिए फूल लेकर आते थे और उसके बाद फूलों से माला बनाते थे।

क्या ईश्वर में सम्पूर्ण विश्वास है - प्रेरक कहानी

एक बार, दो बहुमंजिली इमारतों के बीच, बंधी हुई एक तार पर लंबा सा बाँस पकड़े, एक कलाकार चल रहा था। उसने अपने कन्धे पर अपना बेटा बैठा रखा था। सैंकड़ों लोग दिल साधे देख रहे थे।

दो पैसे के काम के लिए तीस साल की बलि!

स्वामी विवेकानंद एक बार कहीं जा रहे थे। रास्ते में नदी पड़ी तो वे वहीं रुक गए क्योंकि नदी पार कराने वाली नाव कहीं गई हुई थी।...

प्रेरक कहानी: अंत में अनन्त संसार रूपी सागर में समा जाते है।

नदी में हाथी की लाश बही जा रही थी। एक कौए ने लाश देखी, तो प्रसन्न हो उठा, तुरंत उस पर आ बैठा। यथेष्ट मांस खाया। नदी का जल पिया।...

प्रेरक कहानी: अन्तत: अन्तिम निर्णय ईश्वर ही करता है!

जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी, कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी।...

प्रेरक कहानी: राजा हैं, फिर भी घमंडी ना बनें!

साधु तेजी से राजमहल की ओर गए और बिना प्रहरियों से पूछे सीधे अंदर चले गए। राजा ने देखा तो वो गुस्से में भर गया। राजा बोला: ये क्या उदण्डता है महात्मा जी!...

Download BhaktiBharat App