भक्तमाल | अन्नमाचार्य
वास्तविक नाम - अन्नमय्या पद कविता पितामहुदु
अन्य नाम - तल्लपका अन्नमाचार्य
आराध्य - भगवान वेंकटेश्वर
गुरु - आदिवन शतकोपा यतीन्द्र
जन्म - 9 मई 1408
जन्म स्थान - तल्लापाका गाँव, वर्तमान आंध्र प्रदेश
मृत्यु - 4 अप्रैल 1503
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
पिता - नारायण सूरी
माता - लक्कामंबा
पत्नी - अक्काम्मा
भाषा - तेलुगु, संस्कृत
प्रसिद्ध - आध्यात्मिक संत, कवि
तल्लपका अन्नमाचार्य, जिन्हें अन्नामय्या के नाम से जाना जाता है, 15वीं सदी के तेलुगु संत, कवि और संगीतकार थे जो तिरुमाला के भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित थे। मुख्य रूप से वेंकटेश्वर को समर्पित हजारों भक्ति गीतों (संकीर्तन) की रचना के लिए प्रसिद्ध हैं।
अन्नमाचार्य का योगदान
अन्नमाचार्य को व्यापक रूप से तेलुगु भक्ति संगीत के सबसे शुरुआती और महान संगीतकारों में से एक माना जाता है। अन्नमय्या ने तेलुगु और संस्कृत में 32,000 संकीर्तन की रचना की। आज लगभग 14,000 जीवित हैं, जो तिरुमाला मंदिर की तिजोरी (संकीर्तन भंडारम) में तांबे की प्लेटों पर संरक्षित हैं।
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अन्नमाचार्य की रचनाएँ:
- वेंकटेश्वर के प्रति भक्ति और समर्पण
- आध्यात्मिक दर्शन
- मधुरा भक्ति के माध्यम से व्यक्त प्रेम और भक्ति
- सामाजिक और नैतिक विषय
- तिरुमाला और भगवान वेंकटेश्वर की महिमा का वर्णन
कुछ प्रसिद्ध रचनाओं में ब्रह्मम ओकाटे, जो अच्युतानंद, विनारो भाग्यमु विष्णु कथा, और अदिगो अल्लादिगो श्रीहरि वासामु शामिल हैं।
अन्नमाचार्य की विरासत
अन्नमचार्य के वंशजों ने उनकी रचनाओं को संरक्षित किया, जिनमें से कई सदियों बाद फिर से खोजी गईं।
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने उनके कार्यों पर शोध करने, उन्हें प्रकाशित करने और लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
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