भक्तमाल | गुरु अमर दास
असली नाम - अमर दास
अन्य नाम - श्री गुरु अमर दास साहिब जी, तीसरे नानक
गुरु -
गुरु नानक, गुरु अंगद
जन्म - 5 मई 1479
जन्म स्थान - बासर्के, दिल्ली सल्तनत (वर्तमान अमृतसर जिला)
मृत्यु - 1 सितंबर 1574
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
भाषा - पंजाबी
पिता- तेजभान भल्ला
माता - बख्त कौर
पत्नी - मनसा देवी
संस्थापक - गोइंदवाल साहिब
प्रसिद्ध - तीसरे सिख गुरु
गुरु अमर दास सिख धर्म के तीसरे गुरु और सिख इतिहास में सबसे सम्मानित आध्यात्मिक नेताओं में से एक थे। गहरी भक्ति के साथ गुरु अंगद देव की सेवा करने के बाद वह 73 वर्ष की आयु में सिख गुरु बने।
गुरु अमर दास जी की प्रमुख शिक्षाएँ
❀ जाति, लिंग या सामाजिक स्थिति के भेदभाव के बिना सभी मनुष्यों की समानता को बढ़ावा दिया।
❀ लंगर (सामुदायिक रसोई) को दृढ़तापूर्वक प्रोत्साहित किया, जहाँ सभी एक साथ बैठकर समान रूप से भोजन करते थे।
❀ सती और पर्दा प्रथा जैसी हानिकारक सामाजिक प्रथाओं का विरोध किया।
❀ ईश्वर के प्रति भक्ति, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा पर बल दिया।
❀ नाम सिमरन का संदेश फैलाया—ध्यान और प्रार्थना के माध्यम से ईश्वर का स्मरण।
गुरु अमर दास जी ने गोइंदवाल साहिब को एक महत्वपूर्ण सिख तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया। उन्होंने प्रसिद्ध बावड़ी साहिब का निर्माण करवाया, जो 84 सीढ़ियों वाला एक पवित्र बावड़ी है। सिख भक्तों का मानना है कि सीढ़ियों से उतरते समय जपजी साहिब का पाठ करने से आध्यात्मिक आशीर्वाद प्राप्त होता है। भक्तिभारत के अनुसार, गुरु अमर दास जी ने मंजी प्रणाली के माध्यम से सिख धर्म के प्रचार का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में सिख शिक्षाओं का प्रसार करने के लिए पुरुषों और महिलाओं दोनों को नियुक्त किया।
गुरु अमर दास जी ने अपने दामाद
गुरु राम दास को अगले सिख गुरु के रूप में नियुक्त किया था।
गुरु अमर दास जी के रोचक तथ्य:
❀ वे अधिक उम्र में गुरु बने, जिससे यह सिद्ध होता है कि आध्यात्मिक महानता उम्र की कोई सीमा नहीं है।
❀ उन्होंने यह परंपरा स्थापित की कि सम्राट और राजा भी गुरु से मिलने से पहले लंगर में भोजन करें।
❀ माना जाता है कि मुगल सम्राट अकबर ने उनसे मुलाकात की थी और लंगर में भाग लिया था।
गुरु अमर दास जी की शिक्षाएं समानता, करुणा, अनुशासन और ईश्वर के प्रति भक्ति जैसे मूल्यों के माध्यम से दुनिया भर के लाखों सिखों को प्रेरित करती रहती हैं। उनका जीवन विनम्रता और सेवा का प्रतीक है।