भक्तमाल | बहिणाबाई
असली नाम – बहिण
अन्य नाम – बहिना या बहिनी
गुरु - तुकाराम
आराध्य - विठोबा
जन्म - 1628
जन्म स्थान - देवगांव रंगारी, एलोरा के पास, महाराष्ट्र, भारत
मृत्यु - 1700
वैवाहिक स्थिति: विवाहित
पिता - आवदेव कुलकर्णी
माता - जानकी
पति - गंगाधर पाठक
प्रसिद्धि - आध्यात्मिक संत
संत बहिणाबाई वारकरी भक्ति परंपरा की एक प्रसिद्ध मराठी कवयित्री-संत और पंढरपुर के भगवान विठोबा की भक्त थीं। उन्हें महाराष्ट्र की महान महिला संतों में से एक माना जाता है और उन्हें उनके दिल को छू लेने वाले अभंगों (भक्तिपूर्ण कविताओं) के लिए याद किया जाता है। बहिणाबाई महान संत तुकाराम को अपना आध्यात्मिक गुरु मानती थीं।
बहिणाबाई का साहित्यिक योगदान
❀ बहिणाबाई ने विठोबा को समर्पित सैकड़ों मराठी अभंगों की रचना की।
❀ ईश्वर के प्रति प्रेम और भक्ति।
❀ समाज में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियाँ।
❀ घरेलू कर्तव्यों और आध्यात्मिक जीवन के बीच संतुलन।
❀ समानता, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण।
उनकी सबसे महत्वपूर्ण रचना 'आत्मनिवेदन' (बहिणाबाई गाथा) है, जो एक आत्मकथात्मक संग्रह है। इसमें उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों, आध्यात्मिक दर्शनों और विठोबा व तुकाराम के प्रति अपनी भक्ति का वर्णन किया है।
वारकरी आंदोलन के संतों में संत बहिणाबाई का एक विशेष स्थान है। उनके अभंग आज भी पूरे महाराष्ट्र में कीर्तन और भक्ति सभाओं में गाए जाते हैं। वह विशेष रूप से उन भक्तों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं जो आध्यात्मिक जीवन और सांसारिक जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बिठाना चाहते हैं।
बहिणाबाई की शिक्षाएँ
❀ पारिवारिक जीवन जीते हुए भी सच्ची भक्ति की जा सकती है।
❀ परिवार की सेवा और ईश्वर की सेवा साथ-साथ चल सकती है।
❀ आध्यात्मिक प्रगति जाति या सामाजिक स्थिति के बजाय सच्ची भक्ति पर निर्भर करती है।
❀ ईश्वर के नाम का निरंतर स्मरण ही मोक्ष का मार्ग है।