श्री अष्टापद तीर्थ - Shri Ashtapad Teerth

मुख्य आकर्षण - Key Highlights

◉ 151 फीट ऊंचा मंदिर।
◉ यह हिमालय और उसके आठ खूबसूरत पर्वतों जैसा दिखता है।
अष्टपद तीर्थ जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। जैन धर्मग्रंथों के अनुसार, यह वह पवित्र स्थान है जहाँ प्रथम तीर्थंकर, ऋषभनाथ (आदिनाथ भगवान) ने मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त किया था। परंपरागत रूप से यह स्थल तिब्बत में कैलाश पर्वत के निकट स्थित माना जाता है।

अष्टपद तीर्थ का इतिहास और वास्तुकला
❀ 151 फीट ऊँचा श्री अष्टपद तीर्थ, जिसमें चारों दिशाओं में भगवान ऋषभदेव जी की चार मूर्तियाँ हैं और प्रार्थना कक्ष से जुड़े चार रंग मंडप (द्वार) हैं। सफेद शिखर जिनालय पर केवल पाँच मिनट रुकने की अनुमति है।

❀ हिमालय को अष्टपद भी कहा जाता है क्योंकि इसमें आठ पर्वत श्रृंखलाएँ हैं - गौरीशंकर, कैलाश, बद्रीनाथ, नंदा, द्रोणगिरी, नारायण, नर और त्रिशूली। निर्वाणकांड के अनुसार, इसे आदिश्वर स्वामी भी कहा जाता है। इसी अष्टपद कैलाश पर्वत पर भारत चक्रवर्ती (जिनके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा) ने 24 तीर्थंकरों के मंदिर बनवाए थे। यह भूमि भरत-बाहुबली के लिए साधना स्थल भी है।

❀ अष्टपद को आदिनाथ भगवान की मुक्ति (निर्वाण भूमि) का स्थान माना जाता है।

❀ ऐसा माना जाता है कि मोक्ष प्राप्त करने के बाद उनके पुत्र भरत चक्रवर्ती ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वहां एक भव्य मंदिर और तीर्थस्थल का निर्माण कराया था।

❀ जैन ग्रंथों में इस पर्वत को आठ सीढ़ियों वाला बताया गया है, इसीलिए इसे \"अष्टपद\" कहा जाता है (अष्ट = आठ, पद = सीढ़ियाँ)।

जैन धर्मग्रंथों में अष्टपद तीर्थ का वर्णन
❀ यह एक दिव्य पर्वत है जिस पर बहुमूल्य पत्थरों और सोने से बने सुंदर मंदिर हैं।

❀ यहां 24 तीर्थंकरों की कई मूर्तियां स्थापित हैं।

❀ यह वह स्थान है जहां दिव्य प्राणी (देव) पूजा करने आते हैं।

कैलाश पर्वत से संबंध
कई जैन विद्वान अष्टपद को कैलाश पर्वत के आसपास के क्षेत्र से जोड़ते हैं, जो निम्नलिखित धर्मों में भी पवित्र माना जाता है:
❀ हिंदू धर्म
❀ बौद्ध धर्म
❀ बोन

चूंकि यह क्षेत्र सुदूर तिब्बत में स्थित है, इसलिए मूल जैन तीर्थस्थल आज सुलभ नहीं है, लेकिन इसका आध्यात्मिक महत्व आज भी प्रबल है।

अष्टपद तीर्थ दर्शन से संबंधित आध्यात्मिक मान्यताएं:
❀ वैराग्य और आध्यात्मिक प्रगति को प्रेरित करना
❀ भक्तों को भगवान आदिनाथ के मुक्ति मार्ग की याद दिलाना
❀ सही आस्था, ज्ञान और आचरण विकसित करने में सहायता करना

अष्टपद तीर्थ कैसे पहुंचें
अष्टपद जैन तीर्थ मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में स्थित है। यह स्थान सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
Shri Ashtapad Teerth - Read In English
Ashtapad Tirth is one of the most sacred pilgrimage sites in Jainism. According to Jain scriptures, it is the holy place where the first Tirthankara, Rishabhanatha (Adinath Bhagwan) attained moksha (liberation). The site is traditionally believed to be located near Mount Kailash in Tibet.

जानकारियां - Information

दर्शन समय
Summer: 7:00 - 12:00 AM, 2:00 - 6:00 PMWinter: 8:00 - 12:00 AM, 2:00 - 5:00 PM
मंत्र / प्रचलित जयकारा
॥ श्री ऋषभदेवाय नमः ॥
त्योहार
Adinath Nirvana Mahotsava, Holi, Akshay Tritiya Fair, Shantinath Kalyanak, Aashan Ashtahnika, Daslakshan, Karthik Ashtahnika | यह भी जानें: एकादशी
बुनियादी सेवाएं
Prasad, Water Coolar, Power Backup, CCTV Security, Office, Shoe Store, Parking
संस्थापक
Shri Hastinapur Jain Shwetambar Tirth Trust
स्थापना
31 January 1996
देख-रेख संस्था
Shri Hastinapur Jain Shwetambar Tirth Trust
द्वारा उद्घाटन
Acharya Bhagwant Shrimad Vijay Indrditra Surishwar
समर्पित
Bhagwan Shri Adinath Ji
क्षेत्रफल
108m Diameter
फोटोग्राफी
हाँ जी (मंदिर के अंदर तस्वीर लेना अ-नैतिक है जबकि कोई पूजा करने में व्यस्त है! कृपया मंदिर के नियमों और सुझावों का भी पालन करें।)

कैसे पहुचें - How To Reach

पता 📧
Shri Ashtapad Teerth Hastinapur Uttar Pradesh
मेट्रो 🚇
सड़क/मार्ग 🚗
Ganeshpur-Hastinapur Road >> Jain Temple Road
निर्देशांक 🌐
29.16064°N, 78.00864°E

क्रमवद्ध - Timeline

31 January 1996

Bhoomipujan and Khanan Muhurt.

12 April 1996

Shilanyas - foundation stone ceremony

2 December 2009

The Panch kalyanak Pratishtha took place in December 2009 under nishra of Gachhadipati Acharya Nityanand Surishwerji

फोटो प्रदर्शनी - Photo Gallery

श्री अष्टापद तीर्थ

श्री अष्टापद तीर्थ

Main gate is contributed by Shri Nakoda Parshawnath Jain Tirth, Mewa Nagar.

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Updated: Mar 16, 2026 17:36 PM

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