देवी पाटन मंदिर, बलरामपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर तुलसीपुर में स्थित, माँ पाटेश्वरी (दुर्गा) को समर्पित एक पूजनीय शक्ति पीठ है। इसे देवी सती के 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। परंपरा के अनुसार, देवी सती का दाहिना कंधा (पट) इसी पवित्र स्थान पर गिरा था, जिसके कारण मंदिर का नाम \"देवी पाटन\" पड़ा। यह मंदिर विशेष रूप से मुंडन (सिर मुंडवाने) समारोहों और मन्नतों की पूर्ति के लिए किए जाने वाले अर्पण के लिए प्रसिद्ध है।
जहाँ वामस्कन्ध सहित भगवती सती का पाटम्बर गिरा था। इसीलिए यहाँ स्थापित शक्तिपीठ की देवी का नाम पाटेश्वरी है और उनके नाम पर ही इसे पत्तन (पाटन-नगर) का नाम देवी-पाटन है।
मंदिर का स्थापत्य उत्तर भारत में प्रचलित पारम्परिक मंदिर शैली का है, किन्तु शिखर पर स्थापित स्वर्ण कलश का स्वरूप और शिल्प नेपाली है।
माँ दुर्गा एवं पाताल चबूतरा: अत्यन्त प्राचीन काल से मंदिर के गर्भगृह में स्थित पातालगामी सुरंग के मुहाने पर बने चबूतरे पर एक यन्त्रांकित कपड़ा बिछा रहता है जिस पर फूल अक्षत और प्रसाद चढ़ाकर पातालेश्वरी देवी की पूजा होती है।
अखण्ड दीप-ज्योति: इन अखण्ड दीपों से निकलने वाले काजल की बड़ी महिमा है। भक्त लोग इसका प्रयोग नेत्र रोगों के निवारणार्थ करते हैं और कई श्रद्धालुओं ने इससे चमत्कारिक लाभ की पुष्टि की है।
सूर्य कुण्ड: मंदिर के उत्तर में परिसर के अन्तर्गत ही सूर्यकुण्ड विद्यमान है। जनश्रुति के अनुसार, सूर्यपुत्र महारथी कर्ण द्वारा यहाँ भगवान परशुरामजी से धनुर्वेद की शिक्षा लेते समय प्रतिदिन सूर्योपासना के लिए प्रयुक्त होने वाला यह जलकुण्ड है। इसमें स्नान करने से कुष्ठ रोग सहित तमाम चर्म रोगों का निवारण होता है। वर्तमान रूप में यह काफी बड़ा अण्डाकार जलाशय है।
प्रचलित नाम: माँ पाटेश्वरी मंदिर
बुनियादी सेवाएं
पेयजल, प्रसाद, सीसीटीवी सुरक्षा, जूता स्टोर, पार्किंग स्थल
धर्मार्थ सेवाएं
संत निवास, यज्ञशाला, विश्राम गृह, यात्री निवास, सभागार, गौशाला, छात्रावास, चिकित्सालय, सूर्य कुण्ड