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तुलसीदास जी (Tulsi Das)


तुलसीदास जी
भक्तमाल | गोस्वामी तुलसीदास
असली नाम - रामबोला दुबे
गुरु - नरहरिदास
आराध्य - श्री रामचंद्र, भगवान शिव
जन्म - 11 अगस्त 1511 | श्रावण शुक्ला सप्तमी | तुलसीदास जयंती
जन्म स्थान - उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के राजपुर में
मृत्यु - 31 जुलाई 1623, वाराणसी के अस्सी घाट
वैवाहिक स्थिति - शादीशुदा
भाषा - अवधि, संस्कृत
पिता - आत्माराम शुक्ल दुबे
माता - हुलसी
प्रसिद्ध ग्रंथ / रचनाएँ - रामचरितमानस, पार्वती-मंगल, विनय-पत्रिका, गीतावली, कृष्ण-गीतावली, जानकी-मंगल, रामललानहछू, दोहावली, वैराग्यसंदीपनी, रामाज्ञाप्रश्न, सतसई, बरवै रामायण, कवितावली, हनुमान बाहुक
❀ नाभादास ने अपने लेखन में तुलसीदास के बारे में लिखा था और उन्हें वाल्मीकि का अवतार बताया था।
❀ प्रियदास ने तुलसीदास की मृत्यु के 100 साल बाद उनके सात चमत्कारों और आध्यात्मिक अनुभवों का वर्णन किया।
भक्तमाल सुमेरु तुलसीदास जी - सत्य कथा

तुलसीदास को गोस्वामी क्यों कहा जाता है?
तुलसीदास जी को गोस्वामी तुलसीदास जी के नाम से जाना जाता है। गोस्वामी का अर्थ होता है इंद्रियों को वश में करने वाला इंद्रियों का स्वामी अर्थात जितेन्द्रिय। तुलसीदास जी अपनी धर्म पत्नी द्वारा धिक्कारे जाने पर उन्होंने सांसारिक मोहमाया से विरक्त होकर संन्यासी हो गये थे। अर्थात जितेन्द्रिय या गोस्वामी हो गये। इसी परिप्रेक्ष्य में तुलसीदास जी को गोस्वामी की उपाधि से विभूषित किया जाने लगा।

Tulsi Das in English

Bhaktamal | Goswami Tulsidas | Real Name - Rambola Dubey | Guru - Narharidas | Aaradhya - Sri Ramachandra, Lord Shiva
यह भी जानें

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गोपालानन्द स्वामी

गोपालानंद स्वामी स्वामीनारायण संप्रदाय के एक प्रमुख संत थे। वह स्वामीनारायण संप्रदाय के परमहंस थे जिन्हें स्वामीनारायण द्वारा नियुक्त किया गया था

मीराबाई

मीराबाई, 16वीं शताब्दी की हिंदू रहस्यवादी कवयित्री और भगवान कृष्ण की परम भक्त थीं। उनका जन्म कुडकी में एक राठौर राजपूत शाही परिवार में हुआ था, वह एक प्रसिद्ध भक्ति संत थीं। भक्तमाल में उनका उल्लेख किया गया है, यह पुष्टि करते हुए कि वह लगभग 1600 CE तक भक्ति आंदोलन संस्कृति में व्यापक रूप से जानी जाती थीं और एक अभिलषित व्यक्ति थीं।

पुण्डरीक गोस्वामी

पुंडरीक गोस्वामी जी श्रीमद्भागवतम, चैतन्य चरितामृत, राम कथा और भगवद गीता पर अपने आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध हैं।

दयानंद सरस्वती

दयानंद सरस्वती एक भारतीय दार्शनिक, सामाजिक नेता और आर्य समाज के संस्थापक थे। वह हिंदू सुधारक आन्दोलनकारियों में से एक हैं जिन्हें महर्षि दयानंद के नाम से भी जाना जाता है।

भक्तिसिद्धांत सरस्वती

श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती प्रभुपाद, गौड़ीय मिशन के संस्थापक और अपने गुरु-पिता श्रील भक्तिविनोद ठाकुर के सबसे प्रतिष्ठित अनुयायी थे।

स्वामी श्रद्धानन्द

स्वामी श्रद्धानंद एक आर्य समाज सामाजिक कार्यकर्ता, स्वतंत्रता सेनानी, स्वतंत्रता कार्यकर्ता, शिक्षक, धार्मिक नेता थे। वह हिंदू सुधारकों में से एक हैं जिन्हें महात्मा मुंशी राम के नाम से भी जाना जाता है।

त्रैलंग स्वामी

श्री त्रैलंग स्वामी अपनी योगिक शक्तियों और दीर्घायु की कहानियों के साथ बहुत मशहूर हैं। कुछ खातों के अनुसार, त्रैलंग स्वामी 280 साल के थे जो 1737 और 1887 के बीच वाराणसी में रहते थे। उन्हें भक्तों द्वारा शिव का अवतार माना जाता है और एक हिंदू योगी, आध्यात्मिक शक्तियों के अधिकारी के साथ साथ बहुत रहस्यवादी भी माना जाता है।

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