Shri Ram Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

कल्पवास (Kalpwas)

प्रयाग के संगम तट पर एक माह रहकर लोग कल्पवास करते हैं। यह परम्परा सदियों से चली आ रही है। ’कल्पवास‘ एक ऐसा व्रत है जो प्रयाग आदि तीर्थों के तट पर किया जाता है। कल्पवास का अर्थ है संगम के तट पर निवास कर वेदाध्ययन और ध्यान करना। प्रयागराज संगम तट पर सामान्यतः पौष माह के ग्यारहवें दिन से माघ महीने के 12 वें दिन तक किया जाता है। हालांकि कुछ लोग माघ पूर्णिमा तक कल्पवास करते हैं।
कल्पवास का अपना एक अलग विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो कल्पवासी लगातार बारह वर्ष तक अनवरत कल्पवास करते हैं, वह मोक्ष के भागी होते हैं कर्मकाण्ड अथवा पूजा में हर कार्य संकल्प के साथ शुरू होता है और संकल्प में “श्रीश्वेतवाराहकल्पे” का सम्बोधन किया जाता है।

कल्पवास का इतिहास
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्राचीन काल में तीर्थराज प्रयाग में घना जंगल हुआ करता था और यहां भारद्वाज ऋषि का आश्रम था। यहां ब्रह्माजी ने यज्ञ किया था, इसके बाद से ऋषियों की इस तपोभूमि पर हर साल माघ मेले में और कुंभ में यहां आकर साधुओं और गृहस्थों की ओर से कल्पवास करने की परंपरा चल रही है।

वैसे तो साधुओं और ऋषियों के लिए हमेशा ही कल्पवास रहता है, लेकिन गृहस्थ कम समय में अपना कल्याण कर पाएं। इसके लिए यहां कल्पवास का विधान किया गया। यहां अल्पकाल के लिए गृहस्थों को शिक्षा और दीक्षा भी दी जाती थी।

पद्म पुराण में कल्पवास का वर्णन है, इसमें कहा गया है कि संगम तट पर वास करने वाले को सदाचारी, शांतचित्त और जितेंद्रिय होना चाहिए। कल्पवास के दौरान तीन कार्य तय किए गए हैं। ये कार्य हैं तप, होम (हवन) और दान। आजकल तमाम तीर्थ पुरोहित झोपड़ी की व्यवस्था करा देते हैं।

कल्पवास के नियम
❀ कल्पवास के कुछ नियम तय किए गए हैं। जो भी गृहस्थ कल्पवास का संकल्प लेकर आता है, उसे यहां ऋषियों या खुद की बनाई पर्णकुटी (झोपड़ी) में रहना पड़ता है। कल्पवास में एक बार ही भोजन किया जाता है। धैर्य, अहिंसा का पालन करते हुए, भक्ति में संलग्न होना पड़ता है।

❀ यह बहुत ही कठिन व्रत है। इस व्रत में सूर्योदय से पूर्व स्नान, मात्र एक बार भोजन, पुनः मध्यान्ह तथा सायंकाल तीन बार स्नान का विधान है परन्तु अधिकांश लोग केवल सुबह, शाम स्नान करते हैं। कल्पवास के व्रत को एक माह में पूर्ण करते हैं।

प्रयाग में कल्पवास का महत्व
❀ मत्स्य पुराण में प्रयाग में कल्पवास का महत्व बताया गया है। इसमें कहा गया है कि जो कल्पवास का संकल्प लेता है, वह अगले जन्म में राजा बनता है। लेकिन जो मोक्ष की अभिलाषा लेकर यहां आता है वह जीवन मरण के चक्कर से मुक्त हो जाता है।

❀ धार्मिक ग्रंथों में यह भी कहा गया है कि प्रयाग में माघ में स्नान के दौरान तीन बार स्नान से पृथ्वी पर दस हजार अश्वमेध यज्ञ के फल के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। यह भी कहा गया है कि माघ मास में प्रयागराज के संगम तट पर ब्रह्मा, विष्णु, महेश, रूद्र आदि आते हैं।

❀ कल्पवास की महत्ताओं को रामायण में भी दर्शाया गया है। प्रयागराज के भारद्वाज मुनि आश्रम में आए प्रभु श्रीराम और माता सीता संतों के मुख से इसकी महिमा सुनते हैं। रामचरित मानस में इसका बड़ा ही सुंदर चित्रण है।

❀ एक वक्त भोजन, भजन, कीर्तन, सूर्य अर्घ्य, स्नानादि धार्मिक कृत्यों के समावेश से शरीर का शोधन अर्थात् शरीर को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने की प्रक्रिया ही कल्पवास की वैज्ञानिक प्रक्रिया है। कुछ लोग पौष पूर्णिमा से और कुछ लोग मकर संक्रान्ति से इसे प्रारम्भ करते हैं।

❀ कल्पवास के लिए इस दौरान प्रयागराज में संगम तट पर आध्यात्मिक नगर बसता है, जहां तमाम धार्मिक गतिविधियां होती हैं। पूरे माघ महीने तक यहां देश भर के लोगों के निवासकर आध्यात्मिक कार्यों में संलिप्त रहने के चलते इसे माघ मेला प्रयागराज के नाम से भी जानते हैं। कल्पवास मेले का पहला बड़ा स्नान पौष पूर्णिमा को होता है।

Kalpwas in English

People spend Kalpwas by staying on the Sangam banks of Prayag for a month. This tradition has been going on for centuries. ‘Kalpwas’ is a vrat which is observed on the banks of pilgrimage sites like Prayag.
यह भी जानें

Blogs Kalpwas BlogsMagh Mela BlogsKumbh BlogsKumbh 2025 BlogsKumbh Mela BlogsSangam BlogsPrayagraj BlogsHindu Mela Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

हिंदू धर्म में ओम का अर्थ क्या है?

हिंदू धर्म के सभी देवी-देवताओं के प्रिय भोलेनाथ का मूल मंत्र "ओम" है। जिससे इस हिंदू धर्म का प्रत्येक व्यक्ति जाप करता है। ओम, , भारतीय धर्मों में एक पवित्र आध्यात्मिक प्रतीक की ध्वनि है।

हिंदू पुराणों में पतिव्रता और महान महिलाएं

हिंदू पुराणों और इतिहासों में, पतिव्रता उस स्त्री को संदर्भित करती है जिसका जीवन धर्म, निष्ठा, भक्ति, त्याग और नैतिक शक्ति में निहित होता है।

मंगल दोष क्या है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि मंगल किसी की कुंडली के चौथे भाव, लग्न भाव, सप्तम भाव, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो तो यह मंगल दोष माना जाता है।

साध्वी का क्या अर्थ है?

साध्वी एक संस्कृत शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है "गुणी महिला" और उन महिलाओं को संदर्भित करता है जिन्होंने अपनी संसार का मोह को त्याग दिया है और आध्यात्मिक जीवन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समाज से अलग रहना चुना है। उनका जीवन भगवान के प्रति समर्पण और समाज के लिए सेवा का एक उल्लेखनीय संयोजन है। साध्वी मानते ​​है कि “मानवता की सेवा भगवान की सेवा है” और अपने जीवन भगवान के प्रति समर्पण करलेते हैं।

तरुण सागर जी महाराज का परिचय!

तरुण सागर जी महाराज का परिचय एवं उनके 20 मँत्र...

जंगम जोगी

जंगम जोगी, जंगम शब्द का अर्थ एक यात्रा करने वाला जोगी है जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा करता है और दान द्वारा अपना जीवन यापन करता है। शैव संप्रदाय के ये जोगी भगवान शिव की भक्ति के लिए जाने जाते हैं। जो भगवान शिव की कहानी सुनाती है, जिसमें शिव के विवाह से लेकर उनके अमरनाथ जाने तक की पूरी कहानी को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं।

माता मीरा

मां मीरा एक फकीर हैं, जो यहां लोगों की मदद के लिए आई है। वह कहती हैं: "आप किसी भी मार्ग, किसी भी धर्म, किसी भी गुरु और किसी भी तकनीक का अनुसरण कर सकते हैं, अगर आपको मदद और आशीर्वाद की जरूरत है तो मैं आपके लिए मौजूद रहूंगी।"

Durga Chalisa - Durga Chalisa
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP