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शकुनि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ.. (Shakuni Se Judi Kuch Informations)

शकुनि के पिता का क्या नाम था?
शकुनि के पिता का नाम राजा सुबल था।
शकुनी की माता का क्या नाम था?
शकुनि की माता का नाम सुदर्मा था।

शकुनि किस देश का राजा था?
शकुनि गांधार का राजा था जो वर्तमान मे अफगानिस्तान मैं है।

शकुनि की पत्नी का क्या नाम था?
शकुनि की पत्नी का नाम आरशी था।

शकुनि के बेटे का क्या नाम था?
शकुनि के पुत्र का नाम उलूक था।

शकुनि का वध किसने किया था?
शकुनि का वध पांडु पुत्र सहदेव ने किया था।

महाभारत के युद्ध मे शकुनी के पुत्र का वध किसने किया था?
शकुनि एवं उनके पुत्र का वध पांडु पुत्र सहदेव ने ही किया था।

युद्ध में सहदेव ने वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए शकुनि और उलूक को घायल कर दिया और देखते ही देखते उलूक का वध दिया। अपने पुत्र का शव देखकर शकुनि को बहुत दु:ख हुआ और वह युद्ध छोड़कर भागने लगा। सहदेव ने शकुनि का वध युद्ध के 18वे दिन किया था। शकुनि के अन्य भाइयों ने भी युद्ध में हिस्सा लिया था। उनका वध अर्जुन ने किया था।

Shakuni Se Judi Kuch Informations in English

What was the name of Shakuni's father, mother, wife, son? In the battle, Sahadev bravely wounded Shakuni and Uluka while fighting and killed Uluka on seeing him.
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भगवान जगन्नाथ के अलग-अलग बेश?

बेश एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है पोशाक, पोशाक या पहनावा। 'मंगला अलाती' से 'रात्रि पहुड़' तक प्रतिदिन, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की 'रत्नवेदी' पर देवताओं को सूती और रेशमी कपड़ों, कीमती पत्थरों से जड़े सोने के आभूषणों, कई प्रकार के फूलों और अन्य पत्तियों और जड़ी-बूटियों से सजाया जाता है। जैसे तुलसी, दयान, मरुआ आदि। चंदन का लेप, कपूर और कभी-कभी कीमती कस्तूरी का उपयोग दैनिक और आवधिक अनुष्ठानों में किया जाता रहा है।

भगवान अलारनाथ की कहानी: श्री जगन्नाथ कथा

अनासार के दौरान जब भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं, तब अलारनाथ मंदिर परिसर मे भगवान को खीर का भोग लगाया जाता है तथा साथ ही साथ भक्तों को भी यही भोग भेंट किया जाता है।

क्यों महाप्रभु एक दिन में मौसी माँ के घर नहीं पहुँच पाते?

धार्मिक परंपरा, रीति-रिवाजों के महत्व और व्यावहारिक कारणों से पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा आमतौर पर एक दिन में गुंडिचा मंदिर नहीं पहुँचती है।

जगन्नाथ मंदिर प्रसाद को 'महाप्रसाद' क्यों कहा जाता है?

जगन्नाथ मंदिर में सदियों से पाया जाने वाला महाप्रसाद लगभग 600-700 रसोइयों द्वारा बनाया जाता है, जो लगभग 50 हजार भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।

पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के तीन रथ

रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा का वार्षिक रथ उत्सव है। वे तीन अलग-अलग रथों पर यात्रा करते हैं और लाखों लोग रथ खींचने के लिए इकट्ठा होते हैं।

पुरी रथ यात्रा से जुड़े 10 कम ज्ञात और रोचक तथ्य

पुरी रथ यात्रा विश्व के सबसे प्राचीन और विशाल धार्मिक उत्सवों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य रथों के दर्शन करने के लिए पुरी पहुँचते हैं।

भगवान जगन्नाथ का नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान क्या है?

नीलाद्रि बीजे, वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के अंत और भगवान जगन्नाथ की गर्भगृह में वापसी को चिह्नित करता है या फिर आप भगवान जगन्नाथ और उनकी प्यारी पत्नी माँ महालक्ष्मी के बीच एक प्यारी सी कहानी बता सकते हैं।

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