Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

पूजा और व्रत में क्यों नहीं किया जाता प्याज और लहसुन का इस्तेमाल? (Why onion and garlic not used in worship and fasting?)

हमारे हिंदू धर्म में कई मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनका हम पालन भी करते हैं। शास्त्रों के अनुसार खासतौर पर प्याज और लहसुन भगवान को चढ़ाने की मनाही है। यह जानते हुए भी कि प्याज-लहसुन गुणों की खान है, लेकिन इसके बाद भी व्रत में बनने वाले किसी भी तरह के खाने में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। आइए जानते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान क्या हुआ था, जिससे पूजा और व्रत में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल वर्जित है।

❀ प्याज-लहसुन गुणों की खान है, लेकिन जब समुद्र मंथन से अमृत निकला तो यह समुद्र मंथन के समय की बात है। समुद्र मंथन से जब अमृत निकला तब अमृत पीने को लेकर देवताओं और दैत्यों में होड़ मच गई। तब मोहिनी रूपी भगवान विष्णु देवताओं को अमृत पिलाने के उद्देश्य से दैत्यों को भ्रमित कर अमृत बांटने लगे।

❀ जब राहु और केतु नामक दो राक्षसों ने मोहिनी पर संदेह किया, तो वे गुप्त रूप से वेश बदलकर देवताओं की पंक्ति में बैठ गए। अमृत ​​​​वितरित करते समय, भगवान विष्णु भी राक्षसों को पहचान नहीं पाए और उन्हें अमृत पिलाया।

❀ लेकिन सूर्य और चंद्रदेव ने तुरंत ही उस राक्षस को पहचान लिया और मोहिनी रूपी अमृत बांट रहे भगवान विष्णु को राक्षस की इस चाल के बारे में बता दिया। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उस दैत्य का सिर धड़ से अलग कर दिया। सिर कटते ही दैत्य के मुख से रक्त सहित अमृत की कुछ बूंदें गिरीं, जिनसे प्याज और लहसुन की उत्पत्ति हुई।

❀ अमृत ​​से उत्पन्न होने के कारण प्याज और लहसुन रोगनाशक और संजीवनी हैं। लेकिन आसुरी रक्त के मिश्रण के कारण इसमें आसुरी गुणों का समावेश हो गया है। वे उत्तेजना, क्रोध, हिंसा, अशांति और पाप को बढ़ाते हैं। इसलिए व्रत के भोजन में या भगवान के भोग में प्याज-लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता है।

लहसुन और प्याज का सेवन नहीं किया जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि वे राक्षसों से पैदा हुए हैं। प्याज और लहसुन को प्रकृति में तामसिक माना जाता है और कहा जाता है कि ये शरीर में कामुक ऊर्जा को जगाते हैं।

Why onion and garlic not used in worship and fasting? in English

There are many beliefs prevalent in our Hindu religion, which we also follow. According to the scriptures, especially onion and garlic are not allowed to be offered to God. Knowing that onion-garlic is a mine of virtues, but even after this, onion-garlic is not used in any kind of food prepared during fasting.
यह भी जानें

Blogs Onion And Garlic Not Used In Worship And Fasting BlogsSamudra Manthan BlogsBhagwan Shri Vishnu BlogsDashavatar BlogsKrishna BlogsRam Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

हनुमान चालीसा, लाभ, पढ़ने का सही समय, क्यों पढ़ें?

क्या आप प्रभु हनुमान की शक्ति में विश्वास करते हैं? Bhaktibharat के साथ अपने विचार साझा करें।...

पितृ पक्ष में मौली क्यों नहीं बाँधी जाती?

पितृ पक्ष की पूजा के दौरान मौली (पूजा के दौरान कलाई पर बाँधा जाने वाला पवित्र लाल-पीला धागा) नहीं बाँधी जाती क्योंकि इस अवधि में किए जाने वाले अनुष्ठान केवल पितरों (पूर्वजों) के लिए होते हैं, न कि देवताओं के लिए।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मे मंदिरों का योगदान - ब्लॉग

सनातन परंपरा के मुख्य केंद्र मंदिर, इस अभूतपूर्व घटना का साक्षी बनाने से अपने को कैसे रोक पता? आइए जानते हैं किस-किस मंदिर का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान रहा।

मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?

मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि दोनों में ही भगवान शिव की पूजा का विधान है, लेकिन फिर भी दोनों को एक दूसरे से अलग माना जाता है।

जगन्नाथ मंदिर प्रसाद को 'महाप्रसाद' क्यों कहा जाता है?

जगन्नाथ मंदिर में सदियों से पाया जाने वाला महाप्रसाद लगभग 600-700 रसोइयों द्वारा बनाया जाता है, जो लगभग 50 हजार भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।

सावन शिवरात्रि 2026

आइए जानें! सावन शिवरात्रि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ एवं सम्वन्धित कुछ प्रेरक तथ्य.. | बृहस्पतिवार, 30 जुलाई 2026 से शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 तक

शिवलिंग पर बेलपत्र कैसे चढ़ाएं?

शिवलिंग पर बेलपत्र (बिल्व पत्र) चढ़ाते समय, हिंदू धर्मग्रंथों और पारंपरिक पूजा पद्धतियों के अनुसार, इसे एक विशिष्ट विधि से अर्पित किया जाना चाहिए।

Sawan 2026 - Sawan 2026
Sawan 2026 - Sawan 2026
Bhakti Bharat APP