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Pitru Paksha 2018


Updated: Sep 21, 2018 08:04 AM About | Hindi | Dates | Sarvapitri Amavasya | Kanagat


Upcoming Event: Shraddha Purnima: 24 September 2018
पितृ पक्ष (Pitru Paksha) also known as Shraaddha or Kanagat start with Purnima Shraddha, ends after 16 days on Sarva Pitru Amavasya which is also known as Sarvapitri Amavasya or Mahalaya Amavasya. Hindus pay homage to their ancestor (Pitrs), especially through food offerings.

पितृ पक्ष (Pitru Paksha) also known as Shraaddha or Kanagat start with Purnima Shraddha, ends after 16 days on Sarva Pitru Amavasya which is also known as Sarvapitri Amavasya or Mahalaya Amavasya. Hindus pay homage to their ancestor (Pitrs), especially through food offerings.

Shraddha in Pitru Paksha is the time to remember, thank and honor our ancestors. It is believed that during the time of Shraddh, ancestors come to earth to bless their kin. The relevance of Shradh can be best known from one of the greatest epic of all time Mahabharata.

Post the war between the Kauravas and Pandavas, when everything ended, Karan (Danveer Karna, brave warrior, one of the greatest legends in the war of Mahabharata) died and reached heaven, he was offered food in the form of gold, silver and jewels. On this, he questioned Indra (the lord of heaven) the reason for offering him such a food. On this, Indra told Karna that throughout his life donated gold, diamond and silver, but, never donated any food in the name of his ancestors. Karna reverted that as he was not aware about his ancestors; hence, he never did it. So, Indra asked Karna to come back to earth, where he donated food, made Tarpan during the sixteen days. Read in Hindi


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Related Name
श्राद्ध पक्ष, Shraaddh Paksha, कनागत, Kanagat, Jitiya, महालय पक्ष, Mahalaya Paksha, सर्वपितृ अमावस्या, Sarvapitri Amavasya, महालय अमावस्या, Mahalaya Amavasya, Apara Paksha, Pitru Amavasya, Peddala Amavasya

सर्वपितृ अमावस्या (Sarvapitri Amavasya)

8 October 2018
The last day of Pitru Paksha is known as Sarvapitri Amavasya or Mahalaya amavasya. Mahalaya amavasya is the most significant day of Pitru Paksha. Person who do not know the exact date of our ancestors death anniversary, they pay homage and offer food on this day.

Hindi Version:
पितृ पक्ष के अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या के रूप में जाना जाता है। महालया अमावस्या पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। जिन व्यक्तियों को अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि की सही तारीख / दिन नहीं पता होता, वे लोग इस दिन उन्हें श्रद्धांजलि और भोजन समर्पित करके याद करते हैं।

श्राद्ध तिथियाँ- Shraddh Dates

पूर्णिमा
प्रोष्ठपदी/पूर्णिमा का श्राद्ध
बाकी सभी श्राद्ध तिथि के अनुसार ही हैं
प्रतिपदा श्राद्ध, द्वितीया श्राद्ध, तृतीया श्राद्ध, चतुर्थी श्राद्ध, पंचमी श्राद्ध, षष्ठी श्राद्ध, सप्तमी श्राद्ध, अष्टमी श्राद्ध, नवमी श्राद्ध, दशमी श्राद्ध, एकादशी श्राद्ध, त्रयोदशी श्राद्ध
द्वादशी
सन्यासियों का श्राद्ध
चतुर्दशी
चतुर्दशी तिथि के दिन शस्त्र, विष, दुर्घटना से मृतों का श्राद्ध होता है चाहे उनकी मृत्यु किसी अन्य तिथि में हुई हो।
अमावस
अमावस का श्राद्ध, अज्ञात तिथि वालों का श्राद्ध, सर्वपितृ श्राद्ध।

कनागत (Kanagat)

पितरों के लिए श्रद्धा से किया गया तर्पण, पिण्ड तथा दान को ही श्राद्ध कहते है। मान्यता अनुसार सूर्य के कन्याराशि में आने पर पितर परलोक से उतर कर अपने पुत्र - पौत्रों के साथ रहिने आते हैं, अतः इसे कनागत भी कहा जाता है।

प्रत्येक मास की अमावस्या को पितरों की शांति के लिये पिंड दान या श्राद्ध कर्म किये जा सकते हैं परंतु पितृ पक्ष में श्राद्ध करने का महत्व अधिक माना जाता है। पितृ पक्ष में पूर्वज़ों का श्राद्ध कैसे करें? जिस पूर्वज, पितर या परिवार के मृत सदस्य के परलोक गमन की तिथि अगर याद हो तो पितृपक्ष में पड़ने वाली उसी तिथि को ही उनका श्राद्ध करना चाहिये। यदि देहावसान की तिथि ज्ञात न हो तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध किया जा सकता है, जिसे सर्वपितृ अमावस्या को महालय अमावस्या भी कहा जाता है। समय से पहले यानि कि किसी दुर्घटना अथवा आत्मदाह आदि से अकाल मृत्यु हुई हो तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है।

श्राद्ध तीन पीढि़यों तक करने का विधान बताया गया है। यमराज हर वर्ष श्राद्ध पक्ष में सभी जीवों को मुक्त कर देते हैं, जिससे वह अपने स्वजनों के पास जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। तीन पूर्वज में पिता को वसु के समान, रुद्र देवता को दादा के समान तथा आदित्य देवता को परदादा के समान माना जाता है। श्राद्ध के समय यही अन्य सभी पूर्वजों के प्रतिनिधि माने जाते हैं।

पितृ पक्ष हिन्दी में जाने

पितृ पक्ष जिसे श्राद्ध या कानागत भी कहा जाता है, श्रद्धा पूर्णिमा के साथ शुरू होकर सोलह दिनों के बाद सर्व पितृ अमावस्या के दिन समाप्त होता है। हिंदू अपने पूर्वजों (अर्थात पितरों) को विशेष रूप से भोजन प्रसाद के माध्यम से सम्मान, धन्यवाद व श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धा के समय, पूर्वजों को अपने रिश्तेदारों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। श्राद्ध कर्म की व्यख्या रामायण और महाभारत दोनों ही महाकाव्य में मिलती है।

श्राद्ध का एक प्रसंग महाभारत महाकाव्य से इस प्रकार है, कौरव-पांडवों के बीच युद्ध समाप्ति के बाद, जब सब कुछ समाप्त हो गया, दानवीर कर्ण मृत्यु के बाद स्वर्ग पहुंचे. उन्हें खाने मे सोना, चांदी और गहने भोजन के जगह परोसे गये। इस पर, उन्होंने स्वर्ग के स्वामी इंद्र से इसका कारण पूछा। इस पर, इंद्र ने कर्ण को बताया कि पूरे जीवन में उन्होंने सोने, चांदी और हीरों का ही दान किया, परंतु कभी भी अपने पूर्वजों के नाम पर कोई भोजन नहीं दान किया। कर्ण ने इसके उत्तर में कहा कि, उन्हें अपने पूर्वजों के बारे मैं कोई ज्ञान नही था, अतः वह ऐसा करने में असमर्थ रहे। तब, इंद्र ने कर्ण को पृथ्वी पर वापस जाने के सलाह दी, जहां उन्होंने इन्हीं सोलह दिनों के दौरान भोजन दान किया तथा अपने पूर्वजों का तर्पण किया। और इस प्रकार दानवीर कर्ण पित्र ऋण से मुक्त हुए।

Holy Places For Shradh Rituals

As per the Hindu mythology, there are some important places in India for performing the rituals of Shraadh for the departed souls to stay in peace and be happy.
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • Prayaga (Allahabad), Uttar Pradesh
  • Gaya, Bihar
  • Kedarnath, Uttarakhand
  • Badrinath, Uttarakhand
  • Rameswaram, Tamil Nadu
  • Nasik, Maharashtra
  • Kapal Mochan Seshambadi, Yamuna Nagar, Haryana

Information

Next Dates(Year Around)
Shraddha Purnima: 24 September 2018Sarvapitri Amavasya: 8 October 2018
Futures Dates
Shraddha Purnima: 13 September 2019Sarvapitri Amavasya: 28 September 2019Shraddha Purnima: 1 September 2020Sarvapitri Amavasya: 17 September 2020Shraddha Purnima: 20 September 2021Sarvapitri Amavasya: 6 October 2021Shraddha Purnima: 10 September 2022
Frequency
Yearly
Duration
16 Days
Begins (Tithi)
Bhadrapada Shukla Purnima
Ends (Tithi)
Bhadrapada Krishna Amavasya (Sarva Pitru Amavasya)
Months
September/October
Past Dates
5 September 2017 - 19 September 2017, 16 September 2016 - 30 September 2016, 27 September 2015 - 12 October 2015

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