Vat Savitri Vrat 2019


Updated: May 17, 2018 08:22 AM About | Dates | Hindi | About Shanidev


Upcoming Event: 3 June 2019
Married Hindu women whose husbands are alive celebrate वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) to pray for their husband for a long life.

Married Hindu women whose husbands are alive celebrate वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) to pray for their husband for a long life. Married women in Maharashtra, Gujarat and southern Indian states observe Vat Savitri Vrat 15 days later than that of North Indians.

According to Savitri Vrat Katha, Satabhana fell under the tree, while the soul returned to her dead husband. According to the Puranas Brahma, Vishnu and Mahesh are all inhabited in banyan tree. Sitting down under banyan tree, listening to pujas, fast stories are fulfill the desires. Lord Buddha had received wisdom under this tree. Therefore, the tree is considered to be a supplement of knowledge, mukti and long-life.

Savitri is considered to be the historical character for ideal womanhood and noble patriarchy in Indian culture. The meaning of Savitri is Ved Mata Gayatri and Saraswati too. This festival is popularly known as Vat Savitri because of the law of remembering the legend of Savitri-Satyawan and worshiping the banyan tree. Women circular round the banyan tree with wrapped threads around the tree, which is called protection. Along with the worship, women took blessed from her husband and distribute prasadam and sweets.

Related Name
वट सावित्री अमावस्या - Vat Savitri Amavasya, बड़ अमावस - Bad Amavas, बड़ पूजन अमावस्या - Bad Pujan Amavasya, वट अमावस्या - Vat Amavasya

हिन्दी में जानें वट सावित्री व्रत!

हिंदू विवाहित महिलाएं जिनके पति जीवित हैं, अपने पति की लम्बी उम्र के लिए वट सावित्री व्रत को मानतीं हैं. महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिणी भारतीय राज्यों में विवाहित महिलाएं उत्तर भारतीयों की तुलना में 15 दिन बाद समान रीति से वट सावित्री व्रत मानतीं हैं।

सावित्री व्रत कथा के अनुसार वट वृक्ष के नीचे ही सत्यभान गिरे थे, वहीं उसके मृत पति के शरीर में प्राण वापस आए थे। पुराणों के अनुसार, वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास है। इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा आदि सुनने से मनोकामना पूरी होती है। भगवान बुद्ध को इसी वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। अतः वट वृक्ष को ज्ञान, निर्वाण व दीर्घायु का पूरक माना गया है।

सावित्री को भारतीय संस्कृति में आदर्श नारीत्व व सौभाय पतिव्रता के लिए ऐतिहासिक चरित्र माना जाता है। सावित्री का अर्थ वेद माता गायत्री और सरस्वती भी होता है। वट वृक्ष का पूजन और सावित्री-सत्यवान की कथा का स्मरण करने के विधान के कारण ही यह व्रत वट सावित्री के नाम से प्रसिद्ध हुआ। महिलाएँ व्रत-पूजन कर कथा कर्म के साथ-साथ वट वृक्ष के आसपास सूत के धागे परिक्रमा के दौरान लपेटती हैं , जिसे रक्षा कहा जाता है। साथ ही पूजन के बाद अपने पति को रोली और अक्षत लगाकर चरणस्पर्श कर प्रसाद मिष्ठान वितरित करतीं हैं।

जानें वट सावित्री व्रत कथा!

भद्र देश के एक राजा थे, जिनका नाम अश्वपति था। भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान न थी। उन्होंने संतान की प्राप्ति के लिए मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिदिन एक लाख आहुतियाँ दीं। अठारह वर्षों तक यह क्रम जारी रहा। इसके बाद सावित्रीदेवी ने प्रकट होकर वर दिया कि राजन तुझे एक तेजस्वी कन्या पैदा होगी। सावित्रीदेवी की कृपा से जन्म लेने की वजह से कन्या का नाम सावित्री रखा गया। आगे पढ़े

Information

Futures Dates
22 May 202010 June 202130 May 202219 May 2023
Frequency
Yearly / Annual
Duration
1
Begins (Tithi)
Jyeshtha Krishna Amavasya
Ends (Tithi)
Jyeshtha Krishna Amavasya
Months
May / June
Celebrations
Fast, Dan, Puja.
Past Dates
15 May 2018, 25 May 2017, 5 June 2016

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