Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

नाम त्रय अस्त्र मन्त्र (Nama Traya Astra Mantra)


नाम त्रय अस्त्र मन्त्र
अच्युताय गोविन्दाय अनंताय ।
ॐ अच्युताय नमः ॥
ॐ गोविन्दाय नमः ॥
ॐ अनंताय नमः ॥

अग्नि पुराण में शक्तिशाली मंत्र का उल्लेख है जो सभी रोगों के लिए एक प्रभावी माना गया है। इस मंत्र का जाप विश्वास और भक्ति के साथ किया जाए, तो सभी रोगों को दूर किया जा सकता है।

अथर्व मंत्र:
अच्युताय नमः जो कभी चुय्त नहीं होते।
गोविन्दाय नमः जिनकी सत्ता से इन्द्रियाँ विचरण करती हैं।
अनंताय नमः जिसकी सत्ता से शक्ति, सामर्थ्य व कृपा का कोई अंत नहीं।

Nama Traya Astra Mantra in English

The Agni Purana mentions a powerful mantra which is supposed to be an effective cure for all diseases.
यह भी जानें

Mantra Shri Vishnu MantraNarayan MantraMangalam MantraDaily MantraNitya MantraMorning Mantra

अगर आपको यह मंत्र पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस मंत्र को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

मंत्र ›

श्री जगन्नाथ अष्टकम

कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो, मुदाभीरी नारी वदन कमला स्वाद मधुपः, रमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदो..

श्री जगन्नाथ यात्रा के राशि मंत्र

श्री जगन्नाथ यात्रा के सामने बोलें अपना राशि मंत्र।

श्रीजगन्नाथ सहस्रनाम स्तोत्रम

देवदानवगन्धर्वयक्षविद्याधारोर्गैः। सेव्यमानं सदा चारुकोटिसूर्यसमाप्रभम् ॥ 1॥

प्रज्ञानं ब्रह्म महावाक्य

प्रज्ञानं ब्रह्म जिसका शाब्दिक अर्थ है ज्ञान ही ब्रह्म है। यह भारत के पुरातन हिंदू शास्त्र 'ऋग्वेद' का 'महावाक्य' है...

पूर्णब्रह्म स्तोत्रम्

पूर्णचन्द्रमुखं निलेन्दु रूपम् , उद्भाषितं देवं दिव्यं स्वरूपम्, पूर्णं त्वं स्वर्णं त्वं वर्णं त्वं देवम् , पिता माता बंधु त्वमेव सर्वम्, जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम्, जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥ १ ॥

श्री जगन्नाथ प्रातः स्मरण स्तोत्रम्

नीलाम्बुद-श्यामल-कान्ति-कान्तं, नीलाम्बुधेर्नीलगिरौ बसन्तम् । लीलामयं नील-सरोज नेत्रं, देवं जगन्नाथमहं स्मरामि ॥ संसार-धातारमनन्त-रूपं, वेदान्त-वेद्यं हृत-पाप-तापम् ।

आदित्य-हृदय स्तोत्र

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्टवा युद्धाय समुपस्थितम् ॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् ।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP