Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

जगन्नाथ मंदिर में प्रेम के पद - सत्य कथा (Jagannath Mandir Me Prem Ke Pad)


जगन्नाथ मंदिर में प्रेम के पद - सत्य कथा
Add To Favorites Change Font Size
उड़ीसा में बैंगन बेचनेवाले की एक बालिका थी। दुनिया की दृष्टि से उसमें कोई अच्छाई नहीं थी। किन्तु दुनिया की दृष्टिसे नगण्य उस बालिका को संत जयदेव गोस्वामी जी का पद गीत गोविंदम बहुत ही भाता था। वह दिन-रात उसको गुनगुनाती रहती थी और भगवान के प्रेम में डूबती-उतराती रहती थी।
वह घर का सारा काम करती, पिता-माता की सेवा करती और दिनभर जयदेव जी का पद गुनगुनाया करती और भगवान की याद में मस्त रहती।

पूर्णिमा की रात थी, पिताजी ने प्यारी बच्ची को जगाया और आज्ञा दी कि बेटी ! अभी चाँदनी टिकी है, इस प्रकाश में बैंगन तोड़ लो जिससे प्रातः मैं बेच आऊँ। वह गुनगुनाती हुई सोयी थी और वही गुनगुनाती हुई जाग गयी। जागने के उपरांत इसी गुनगनाने के रस के साथ बैंगन तोड़ने निकल पड़ी। वह गुनगुनाती हुई बैंगन तोड़ने लगी, कभी इधर जाती, कभी उधर, क्योंकि चुन-चुनकर बैंगन तोड़ना था।

उस समय एक ओर तो उसके रोम-रोम से अनुराग झर रहा था और दूसरी ओर कण्ठ से गीतगोविन्द के सरस गीत प्रस्फुटित हो रहे थे। प्रेमरूप भगवान् इसके पीछे कभी इधर आते, कभी उधर जाते। इस चक्कर में उनका पीताम्बर बैंगन के काँटों में उलझकर चिथड़ा हो रहा था, किन्तु इसका ज्ञान न तो बाला को हो रहा था और न उसके पीछे-पीछे दौड़नेवाले प्रेमी भगवान को ही।

विश्व को इस रहस्य का पता तब चला जब सबेरे भगवान् जगन्नाथ जी के पट खुले और उस देश के राजा पट खुलते ही भगवान की झाँकी का दर्शन करने पहुँचे। उन्हें यह देखकर बहुत दुःख हुआ कि पुजारी ने नये पीताम्बर को भगवान को नहीं पहनाया, जिसे वे शाम को दे गये थे। वे समझ गये कि नया पीताम्बर पुजारी ने रख लिया है और पुराना पीताम्बर भगवान को पहना दिया है।

उन्होंने इस विषय में पुजारी से पूछा - बेचारा पुजारी इस दृश्य को देखकर अवाक था। उसने तो भगवान को राजा का दिया नया पीताम्बर ही पहनाया था, किन्तु राजा को पुजारी की नीयत पर संदेह हुआ और उन्होंने उसे जेल में डाल दिया।

निर्दोष पुजारी जेल में भगवान के नाम पर फूट-फूटकर रोने लगा।

इसी बीचमें राजा कुछ विश्राम करने लगा और उसे नींद आ गयी। स्वप्न में उसे भगवान जगन्नाथ जी के दर्शन हुए और भगवन ने उसे आदेश दिया कि पुजारी निर्दोष है, उसे सम्मान के साथ छोड़ दो। रह गयी बात नये पीताम्बरकी तो इस तथ्य को बैंगन के खेत में जाकर स्वयं देख लो, पीताम्बर के फटे अंश बैंगन के काँटों में उलझे मिलेंगे। मैं तो प्रेम के अधीन हूँ, अपने प्रेमीजनों के पीछे-पीछे चक्कर लगाया करता हूँ। बैंगन तोड़ने वाली बाला के अनुराग भरे गीतों को सुनने के लिये मैं उसके पीछे-पीछे दौड़ा हूँ और इसी में मेरा पीताम्बर काँटों में उलझकर फट गया।

जगन्नाथ मन्दिर की देख-रेख, भोग-आरती आदि सभी तरह व्यवस्था करने वाले राजा के जीवन में इस अद्भुत घटना ने रस भर दिया और भगवान के अनुराग में वे भी मस्त रहने लगे। बैंगन तोड़ने वाली एक बाला के पीछे-पीछे भगवान् उसके प्रेम में घूमते रहे।

यह कहानी फूस की आग की तरह फैल गयी। जगत के स्वार्थी लोगों की भीड़ उसके पास आने लगी। कोई पुत्र माँगता तो कोई धन।

जगन्नाथ जी को गीत गोविंद के पद क्यों सुनाइए जाते हैं?
इस तरह भगवान के प्रेम में बाधा पड़ते देख राजा ने जगन्नाथ मन्दिर में नित्य मंगला आरती के समय गीत गोविंद गाने के लिए उस बालिका को मंदिर में संरक्षण दिया और उसकी सुरक्षा की व्यवस्था राजमहल को ही सौंप दी। तब से ही नित्य मंगला आरती में गीत गोविंद के पद श्री जगन्नाथ मन्दिर में होना प्रारम्भ होगये।
यह भी जानें

Prerak-kahani Jagannath Prem Prerak-kahaniJagannath Prerak-kahaniGeet Govind Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

सतगुरु की कृपा: जब चींटी पर हुई गुरु कृपा

एक संत ने बहुत सुंदर उदाहरण दिया। वे कहते थे कि अगर किसी चींटी को हरिद्वार से ऋषिकेश खुद जाना हो, तो उसे तीन-चार जन्म लग सकते हैं।

सतगुरु की कृपा से कैसे चोर राजा बना - प्रेरक कहानी

एक बार एक चोर ने गुरु से नाम ले लिया, और बोला गुरु जी चोरी तो मेरा काम है ये तो नहीं छूटेगी मेरे से अब गुरु जी बोले ठीक है म तुझे एक दूसरा नेम देता हुँ..

तुलसीदास जी कुटिया पर श्री राम लक्षमण का पहरा - सत्य कथा

उन वीर पाहरेदारों की सावधानी देखकर चोर बडे प्रभावित हुए और उनके दर्शन से उनकी बुद्धि शुद्ध हो गयी।

भेष बदलने से स्वभाव नहीं बदलता - प्रेरक कहानी

बात द्वापरयुग की है। अज्ञातवास में पांडव रूप बदलकर ब्रह्मणों के वेश में रह रहे थे। एक दिन उन्हें कुछ ब्राह्मण मिले...

गुरु का स्थान, श्रेष्ठ - प्रेरक कहानी

एक राजा को पढने लिखने का बहुत शौक था। एक बार उसने मंत्री-परिषद् के माध्यम से अपने लिए एक शिक्षक की व्यवस्था की। शिक्षक राजा को पढ़ाने के लिए आने लगा।..

गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते - प्रेरक कहानी

उन्होंने मेरे शब्दो का मान रखते हुए मेरे शिष्य पर अपनी सारी कृपा उडेल दी। इसलिए कहते है गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते।

गुरु गूंगे, गुरु बावरे, गुरु के रहिये दास! - Guru Purnima Special - प्रेरक कहानी

गुरु गूंगे गुरु बाबरे गुरु के रहिये दास, गुरु जो भेजे नरक को, स्वर्ग कि रखिये आस!

Janmashtami - Janmashtami
Shri Krishna Bhajan - Shri Krishna Bhajan
Bhakti Bharat APP