हनुमानजी कैसे तोड़ा तीनों का घमंड?
देवी सत्यभामा का रूप, गरुड़देव की गति और सुदर्शन चक्र की शक्ति | जानिए इस अद्भुत कथा | एक बार भगवान श्रीकृष्ण अपनी पटरानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे। निकट ही गरुड़ और सुदर्शन चक्र भी बैठे थे।
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प्रभुकृपा, यही आप से प्रार्थना है - प्रेरक कहानी
रात नौ बजे लगभग अचानक मुझे एलर्जी हो गई। घर पर दवाई नहीं, न ही इस समय मेरे अलावा घर में कोई और.. | क्या सच में भगवान ने मुझे रात को अपने भक्त की मदद के लिए ही भेजा था?
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दान की बड़ी महिमा - प्रेरक कहानी
उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आई। तभी एक मजदूरन ने मुझे आवाज लगाकर अपनी सीट देते हुए कहा मेडम आप यहां बैठ जाइए।..
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राजा हैं, फिर भी घमंडी ना बनें - प्रेरक कहानी
साधु तेजी से राजमहल की ओर गए और बिना प्रहरियों से पूछे सीधे अंदर चले गए। राजा ने देखा तो वो गुस्से में भर गया। राजा बोला: ये क्या उदण्डता है महात्मा जी!...
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सलाह नहीं, साथ चाहिए - प्रेरक कहानी
एक बार एक पक्षी समुंदर में से चोंच से पानी बाहर निकाल रहा था। दूसरे ने पूछा: भाई ये क्या कर रहा है।
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खुद की मदद करें, भगवान भी तभी मदद करेंगे - प्रेरक कहानी
सन्यासी: तो फिर किस हक़ से तुम भगवान को दोष दे रहे हो, भगवान उन्हीं लोगों की मदद करते हैं जो स्वयं की मदद करते हैं।
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कठिन परिश्रम, स्वाभिमान का मीठा फल - प्रेरक कहानी
उसके सारे साथी उससे बहुत ही ज्यादा जलते थे। एक दिन उनके मित्रों ने उस लड़के पर एक लांछन लगाना चाहा और उसे झूठे आरोप में फसाने का उन्होंने फैसला किया।...
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अगर तुम तीन बार राम नाम का जाप करते हो तो यह सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या १००० बार ईश्वर के नाम का जाप करने के बराबर है।
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प्रत्येक मनुष्य में अच्छाई और बुराई है - प्रेरक कहानी
गुरु द्रोणाचार्य ने शिक्षा पूरी होने पर कौरव और पांडव के राजकुमारों दुर्योधन और युधिष्ठिर को परीक्षा के लिए बुलाया...
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मंगलमय पवित्र दान - प्रेरक कहानी
एक सेठ ने अन्नसत्र खोल रखा था। उनमें दान की भावना तो कम थी, पर समाज उन्हें दानवीर समझकर उनकी प्रशंसा करे यह भावना मुख्य थी। उनके प्रशंसक भी कम नहीं थे।..
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ईश्वर ने मेरे भाग्य में क्या लिखा है - प्रेरक कहानी
एक बार स्वामीजी अपने आश्रम में एक छोटे पालतू कुत्ते के साथ टहल रहे थे। तभी अचानक एक युवक उनके आश्रम में आया और उनके पैरों में झुक गया और कहने लगा
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आखिर कर्म ही महान है - प्रेरक कहानी
बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।.
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गाय माता! और दिव्य मिठास वाला गुड़
कुछ ही देर में गाय अधिकांश गुड़ खाकर चली गई,इसके बाद जो हुआ वो वो वाक्या हैं जिसे मैं ज़िन्दगी भर नहीं भुला सकता...
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ईर्ष्यालु व्यक्ति, किसी को सुखी-संपन्न नहीं देख सकता है - प्रेरक कहानी
ईर्ष्यालु व्यक्ति की प्रकृति यही होती है कि वह दूसरों को सुखी-संपन्न देखकर उनके जैसा उन्नत, संपन्न और सुखी होने की प्रेरणा ग्रहण नहीं करता...
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सेवा का समर्पण भाव - प्रेरक कहानी
एक बार एक राजा भोजन कर रहा था, अचानक खाना परोस रहे सेवक के हाथ से थोड़ी सी सब्जी राजा के कपड़ों पर छलक गई। राजा की त्यौरियां चढ़ गयीं।
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