होलिका दहन | चैत्र नवरात्रि | आज का भजन! | भक्ति भारत को फेसबुक पर फॉलो करें!

मन की शांति कैसे प्राप्त करें?


सेठ अमीरचंद के पास अपार धन दौलत थी। उसे हर तरह का आराम था, लेकिन उसके मन को शांति नहीं मिल पाती थी। हर पल उसे कोई न कोई चिंता परेशान किये रहती थी।

एक दिन वह कहीं जा रहा था तो रास्ते में उसकी नजर एक आश्रम पर पड़ी। वहाँ उसे किसी साधु के प्रवचनों की आवाज सुनाई दी। उस आवाज से प्रभावित होकर अमीरचंद आश्रम के अन्दर गया और बैठ गया।

प्रवचन समाप्त होने पर सभी व्यक्ति अपने अपने घर को चले गये। लेकिन वह वहीँ बैठा रहा। उसे देखकर संत बोले: कहो, तुम्हारे मन में क्या जिज्ञासा है, जो तुम्हें परेशान कर रही है।

इस पर अमीरचंद बोला: बाबा, मेरे जीवन में शांति नहीं है।

यह सुनकर संत बोले: घबराओ नहीं तुम्हारे मन की सारी अशांति अभी दूर हो जायेगी।

तुम आंखे बन्द करके ध्यान की मुद्रा में बैठो। संत की बात सुनकर ज्यों ही अमीरचंद ध्यान की मुद्रा में बैठा त्यों ही उसके मन में इधर-उधर की बातें घूमने लगीं और उसका ध्यान उचट गया।

सेठ बोला: चलो, जरा आश्रम का एक चक्कर लगाते हैं |

इसके बाद वे आश्रम में घूमने लगे। अमीर चंद ने एक सुंदर वृक्ष देखा तथा उसे हाथ से छुआ। हाथ लगाते ही उसके हाथ में एक कांटा चुभ गया और सेठ। बुरी तरह चिल्लाने लगे। यह देखकर संत वापस अपनी कुटिया में आए। कटे हुए हिस्से पर लेप लगाया।

कुछ देर बाद वह सेठ से बोले: तुम्हारे हाथ में जरा-सा कांटा चुभा तो तुम बेहाल हो गए।

सोचो कि जब तम्हारे अन्दर ईर्ष्या, क्रोध व लोभ जैसे बड़े-बड़े कांटे छिपे हैं, तो तुम्हारा मन भला शांत कैसे हो सकता है ? संत की बात से सेठ अमीरचंद को अपनी गलती का अहसास हो गया। वह संतुष्ट होकर वहां से चला गया। उसके बाद सेठ अमीरचंद ने कभी भी ईर्ष्या नहीं की, क्रोध का भी त्याग कर दिया।

ईर्ष्या, घृणा, द्वेष ये सभी बुराईयां मनुष्य को नरकगामी बनाती हैं। इनसे हमेशा दूर रहें।


अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

* यदि आपको इस पेज में सुधार की जरूरत महसूस हो रही है, तो कृपया अपने विचारों को हमें शेयर जरूर करें: यहाँ शेयर करें
** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर शेयर करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ शेयर करें

मन की शांति कैसे प्राप्त करें?

सेठ अमीरचंद के पास अपार धन दौलत थी। उसे हर तरह का आराम था, लेकिन उसके मन को शांति नहीं मिल पाती थी। हर पल उसे कोई न कोई चिंता परेशान किये रहती थी...

श्री राम नाम जाप महिमा

अगर तुम तीन बार राम नाम का जाप करते हो तो यह सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या १००० बार ईश्वर के नाम का जाप करने के बराबर है।

शुद्ध भावनाओं से ईश्वर और सुंदर भविष्य पक्का है!

एक मन्दिर था, उसमें सभी लोग पगार पर थे। आरती वाला, पूजा कराने वाला आदमी, घण्टा बजाने वाला भी पगार पर था...

प्रेरक कहानी: बिना श्रद्धा और विश्वास के, गंगा स्नान!

इसी दृष्टांत के अनुसार जो लोग बिना श्रद्धा और विश्वास के केवल दंभ के लिए गंगा स्नान करते हैं उन्हें वास्तविक फल नहीं मिलता परंतु इसका यह मतलब नहीं कि गंगा स्नान व्यर्थ जाता है।

प्रभुकृपा: यही आप से प्रार्थना है।

रात नौ बजे लगभग अचानक मुझे एलर्जी हो गई। घर पर दवाई नहीं, न ही इस समय मेरे अलावा घर में कोई और...

प्रेरक कहानी: अपने वास्तविक कार्यों पर गंभीर बने!

बंगाल में नदिया के राजा कृष्णचंद्र के दरबार के नवरत्नों में से थे गोपाल भांड। वह अपनी सूझ-बूझ और चतुराई से राजा सहित...

प्रेरक कहानी: राजधर्म और तपस्या का फर्क

सम्राट भरत, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा, वे बड़े प्रतापी और सुयोग्य शासक थे। राजा भरत शासन करते हुए भी कठोर तपस्या किया करते थे...

श्री कृष्ण की सभी दुष्टों को एक साथ मारने की तरकीब..

कंस की मृत्यु के पश्चात उसका ससुर जरासन्ध बहुत ही क्रोधित था, ओर उसने कृष्ण व बलराम को मारने हेतु मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया.

प्रेरक कहानी: विपरीत परिस्थिति में कैसा व्यवहार करे?

तभी साधू ने दोबारा उसे हाथ में लेकर बचने की कोशिश की पर बिच्छू ने एक बार फिर से तेज डंक का प्रहार किया और साधू के हाथ से छूट कर दूर जा कर गिरा।...

प्रेरक कहानी: गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते

उन्होंने मेरे शब्दो का मान रखते हुए मेरे शिष्य पर अपनी सारी कृपा उडेल दी। इसलिए कहते है गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते।

close this ads
^
top