Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

प्रभु के लिए 1 लाख रुपये की माला - प्रेरक कहानी (Prabhu Ke Liye Ek Lac Ki Mala)


प्रभु के लिए 1 लाख रुपये की माला - प्रेरक कहानी
Add To Favorites Change Font Size
कथा उस समय की है जब मुग़ल शासन था। एक पुजारीजी रोज ठाकुरजी के लिए फूल लेकर आते थे और उसके बाद फूलों से माला बनाते थे। और ठाकुर जी को अर्पण करते थे। एक दिन पुजारीजी फूल लेने आये तभी एक गुलाम भी फूल लेने आया तब तक फूल सारे बिक गये। बस एक ही टोकरी फूलों की बची थी।
गुलाम ने फूल वाले से कहा यह टोकरी मेरे को दे दो तब पुजारीजी भी बोले भाई यह फूलों की टोकरी मेरे को दो। तब गुलाम बोला कि पता है यह फूल जिसके लिये ले जाने है वो इस देश की बेगम है। तब पुजारीजी बोले कि मैं यह फूल इस दुनिया के बादशाह के लिये लेकर जा रहा हूँ।

गुलाम बोला अच्छा तो जो भी ज्यादा पैसे देगा वो ले जायेगा। फूलों की टोकरी थी कुल एक पैसे की तो गुलाम ने बोली लगाई - एक रुपया।
पुजारी ने दोगुनी कर दी - 2 रुपया।
तब गुलाम ने 10 रुपया बोला
तो पुजारी जी ने 100 रुपया।
गुलाम ने 1000 रुपया।
पुजारी जी ने 2 हज़ार रुपया।
गुलाम ने 50 हज़ार रुपया।
पुजारी जी ने 1 लाख बोल दिये।

गुलाम डर गया कि एक लाख रूपये की फूलों की टोकरी ले गया तो बेगम साहेबा नौकरी से तो निकालेंगी और मार अलग पड़ेगी। गुलाम ने फूल वाले को मना करके चला गया।

तब फूलवाला बोला - पुजारीजी आप एक लाख रूपये की फूल की टोकरी लेंगे या मजाक कर रहे हो, पैसे कहाँ से दोगे तब पुजारीजी बोले कि मेरे पास जो है वह आज से आपका, वह एक लाख से ज्यादा का है।

पुजारी जी ने माला बनाई और प्रभुजी को जैसे ही अर्पण की तभी ठाकुरजी ने अपना सर झुका दिया।

तब पुजारी ने कहा - आज क्या बात है प्रभुजी आज ऐसा क्यों?
तब ठाकुरजी ने कहा - आज अलग बात है।

पुजारी जी आपने मेरी माला के लिये अपना सब कुछ लूटा दिया। प्रभुजी ने कहा कि जो मेरे लिए सब कुछ लूटा देते है में उस के लिये अपना सर भी झुका देता हूँ और उसे अपना कर भक्ति प्रेम से माला-माल तो करता ही हूँ, मैं सदा के लिये उसका ही हो जाता हूँ। मैं तो भक्तन को दास भक्त मेरे मुकुट मणि ठाकुरजी तो सेवक के दास बन जाते है।

हमारे पास जो कुछ है उसे प्रभु की सेवा में अर्पण करके उनकी भक्ति व प्रेम प्राप्त कर मानव जीवन को धन्य करें।
यह भी जानें

Prerak-kahani Flower Prerak-kahaniPhool Mala Prerak-kahaniGulam Prerak-kahaniBhakt Prerak-kahani1Lac Ki Mala Prerak-kahaniPujari Prerak-kahaniDuniya Ka Raja Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

सतगुरु की कृपा से कैसे चोर राजा बना - प्रेरक कहानी

एक बार एक चोर ने गुरु से नाम ले लिया, और बोला गुरु जी चोरी तो मेरा काम है ये तो नहीं छूटेगी मेरे से अब गुरु जी बोले ठीक है म तुझे एक दूसरा नेम देता हुँ..

तुलसीदास जी कुटिया पर श्री राम लक्षमण का पहरा - सत्य कथा

उन वीर पाहरेदारों की सावधानी देखकर चोर बडे प्रभावित हुए और उनके दर्शन से उनकी बुद्धि शुद्ध हो गयी।

भेष बदलने से स्वभाव नहीं बदलता - प्रेरक कहानी

बात द्वापरयुग की है। अज्ञातवास में पांडव रूप बदलकर ब्रह्मणों के वेश में रह रहे थे। एक दिन उन्हें कुछ ब्राह्मण मिले...

गुरु का स्थान, श्रेष्ठ - प्रेरक कहानी

एक राजा को पढने लिखने का बहुत शौक था। एक बार उसने मंत्री-परिषद् के माध्यम से अपने लिए एक शिक्षक की व्यवस्था की। शिक्षक राजा को पढ़ाने के लिए आने लगा।..

गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते - प्रेरक कहानी

उन्होंने मेरे शब्दो का मान रखते हुए मेरे शिष्य पर अपनी सारी कृपा उडेल दी। इसलिए कहते है गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते।

गुरु गूंगे, गुरु बावरे, गुरु के रहिये दास! - Guru Purnima Special - प्रेरक कहानी

गुरु गूंगे गुरु बाबरे गुरु के रहिये दास, गुरु जो भेजे नरक को, स्वर्ग कि रखिये आस!

दुर्लभ मनुष्य जीवन - प्रेरक कहानी

फिर उसने अपनी जेब में हाथ डाल कुछ सौ-सौ के नोट गिने। सामान्य कटोरे की भाँति समझ कर कौड़ियां इक्कट्ठे करने में लगे हुए हैं।..

Janmashtami - Janmashtami
Shri Krishna Bhajan - Shri Krishna Bhajan
Bhakti Bharat APP