पुरी के जगन्नाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश के वर्जित होने को मंदिर से जुड़ी सबसे अधिक तूल देने वाली बातों में से एक है। होसकता है कि, यह नियम कुछ लोगों को अजीब लगे, परन्तु यह नियम सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और मंदिर की रीति-रिवाजों पर आधारित है। इसके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संदर्भ को समझने से यह पता चलता है कि यह परंपरा आज भी क्यों इतनी प्रासंगिक है।
मंदिर की पारंपरिक प्रवेश नीति
जगन्नाथ मंदिर एक पुरानी परंपरा का पालन करता है जिसके अंतर्गत केवल हिंदुओं को ही मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति है। हिंदुओं के अतिरिक्त, भारत में उत्पन्न धर्मों के अनुयायियों, जैसे कि कुछ बौद्ध, जैन और सिख जो भारतीय धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं को भी मंदिर प्रशासन की व्याख्या और पारंपरिक रीति-रिवाजों के आधार पर अनुमति दी जा सकती है।
विदेशी नागरिकों और ऐसे लोगों को, जो स्वयं को हिंदू नहीं मानते, आमतौर पर मंदिर के अंदर जाने की अनुमति नहीं होती, चाहे उनकी व्यक्तिगत मान्यताएं या आस्था कुछ भी हों ।
प्रवेश पर रोक क्यों है?
1.
प्राचीन मंदिर परंपराओं का संरक्षण
पुरी जगन्नाथ मंदिर आदिकाल से अपनी धार्मिक परम्परों का अनुगमन करता आ रहा है। मंदिर प्रशासन और वंशानुगत सेवादारों (सेवयात) का मानना है कि मंदिर की पवित्रता बनाए रखने और अनुष्ठानों को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए इन परंपराओं को बचाए रखना अति आवश्यक है।
2.
अनुष्ठानिक पवित्रता
मंदिर की आगमिक और पारंपरिक प्रथाओं के अनुसार, पूजा-अर्चना के लिए अनुष्ठानिक पवित्रता के कुछ निश्चित नियम हैं। ये परम्परायें इस बात को सुनिश्चित करतीं हैं कि कौन कुछ विशेष पवित्र स्थान मे कब प्रवेश कर सकता है और कौन अनुष्ठानों में भाग ले सकता है। ये प्रतिबंध राष्ट्रीयता या जातीयता के बजाय धार्मिक प्रथाओं पर आधारित हैं।
3.
ऐतिहासिक कारण
इतिहासकारों का मत है कि मध्यकालीन भारत में बार-बार हुए हमलों और मंदिरों को अपवित्र करने की कोशिशों के कारण कई मंदिर संस्थानों ने अपने आराध्यों, देवताओं, अनुष्ठानों एवं पवित्र स्थानों के संरक्षण लिए कड़े कदम उठाए। समय के साथ, ये प्रक्रियाएँ मंदिर की परंपरा का एक पक्का हिस्सा बन गईं।
4.
धार्मिक स्वायत्तता का सम्मान
भारत में, कुछ पूजा एवं धार्मिक स्थलों को लागू कानूनों के दायरे में रहते हुए, स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार है। जगन्नाथ मंदिर प्रशासन का मानना है कि उसकी प्रवेश नीति उसकी धार्मिक परंपरा का एक अहम हिस्सा है।
भारत में कई पुराने मंदिरों में उनकी परंपराओं के आधार पर प्रवेश पर रोक है। इसके कुछ उदाहरण हैं:
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गुरुवायुर मंदिर
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पद्मनाभस्वामी मंदिर
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काशी विश्वनाथ मंदिर (गर्भगृह के लिए कुछ खास नियम लागू हैं)
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लिंगराज मंदिर
हालांकि पुरी जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश पर कुछ दिशा निर्देश हैं, परन्तु भगवान जगन्नाथ को व्यापक रूप से एक सार्वभौमिक आराध्य के रूप में पूजा जाता है। वार्षिक
रथ यात्रा के दौरान, देव मंदिर से बाहर निकलकर लोगों के बीच आते हैं। यह रथ यात्रा इस बात का प्रतीक है कि ईश्वरीय कृपा बिना किसी भेदभाव के सभी को प्राप्त होती है। यह त्योहार जगन्नाथ के '
पतित पावन' (सबका उद्धार करने वाले) होने के गुण को दर्शाता है।