✨चंदन यात्रा, पुरी - Chandan Yatra, Puri

Chandan Yatra, Puri Date: Sunday, 9 May 2027

चंदन यात्रा, जगन्नाथ पुरी ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में मनाया जाने वाला सबसे लंबा उत्सव है। चंदन यात्रा उत्सव जगन्नाथ पुरी में 42 दिनों तक चलता है। यह उत्सव अक्षय तृतीया के दिन से शुरू होता है। पुरी में चंदन यात्रा दो भागों में मनाई जाती है जो कि बहार चंदन और भितर चंदन नाम से जानी जाती है।

कैसे मनायी जाती है चंदन यात्रा?
बहार चंदन अक्षय तृतीया[ से शुरू होकर 21 दिनों तक चलती है।

पहले 21 दिनों में जगन्नाथ मंदिर के मुख्य देवताओं की प्रतिनिधि मूर्तियों के साथ-साथ पांच शिवलिंगों को पंच पांडव के रूप में सजाया जाता है, जिन्हें पुरी में जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार से नरेंद्र तीर्थ तालाब तक एक शोभा यात्रा के साथ ले जाया जाता है। अन्य देवताओं जैसे मदनमोहन, भूदेवी, श्रीदेवी और रामकृष्ण इस यात्रा में 21 दिनों तक भाग लेते हैं। विभिन्न अनुष्ठानों के बाद देवताओं को जगन्नाथ मंदिर के पास स्थित नरेंद्र तालाब में ले जाया जाता है और उन्हें तालाब के एक भव्य रूप से सजाई गईं नावों पर सैर कराया जाता है। स्थानीय भाषा में इसे चाप खेल भी कहा जाता है। चंदन यात्रा के दौरान भगवान को प्रमुख रूप से चंदन के लेप से सजाया जाता है।

भितर चंदन:
भितर चंदन जो कि अंतिम 21 दिनों में मंदिर के अंदर ही होने वाला अनुष्ठान है। देवता दैनिक परिभ्रमण के बजाय मंदिर के अंदर ही रीती निति से पूजे जाते हैं।

अक्षय तृतीया विशेष : आरती | भजन | मंत्र | नामवली | कथा | मंदिर | भोग प्रसाद

संबंधित अन्य नामचाप खेल
शुरुआत तिथिअक्षय तृतीया
कारणभगवान जगन्नाथ
उत्सव विधिभजन कीर्तन, झांकी,आरती,नौका विहार
Read in English - Chandan Yatra, Puri
Chandan Yatra is the longest festival celebrated at the Jagannath Temple in Jagannath Puri, Odisha. Chandan Yatra meaning sandalwood, which lasts for 42 days, is celebrated in two parts: Bahar Chandan and Bhitar Chandan.

चंदन यात्रा का महत्व

चंदन यात्रा का यह मान्यता है की भीषण गर्मी के कारण भगवान को चंदन के लेप से लिप्त किया जाता है। 21 दिनों की बहार चंदन उत्सव की अवधि में भगवान को भीषण गर्मी से राहत देने के लिए चंदन यात्रा का त्यौहार मनाया जाता है।

भजे व्रजिका-मंडनम समस्त-पाप-खंडनम्
स्व-भक्त-चित्त-रंजनं सदाैव नंद-नंदनम
सु-पिच्चा-गुच्चा-मस्तकम् सु-नाद-वेन्नु-हस्तकम्
अनंग-रंग-सागरम नमामि कृष्णा-नगरम
॥ मनमोहन सुंदरम ॥

श्री क्षेत्र भौंरी

बाहर चंदन यात्रा के अंतिम दिन जगन्नाथ मंदिर स्थित नरेंद्र पोखरी (तालाब) प्रसिद्ध श्री क्षेत्र भौंरी उत्सव मनाया जाता है। श्री क्षेत्र भौंरी, जिसे भौंरी यात्रा या भ्रमरी यात्रा भी कहा जाता है, पुरी में भगवान जगन्नाथ के 21 दिवसीय चंदन यात्रा उत्सव का भव्य समापन समारोह है।

श्री क्षेत्र भौंरी की मुख्य विशेषताएं
❀ भौंरी का अर्थ है वृत्ताकार गति। इस अनुष्ठान के दौरान, नौकाएं पवित्र तालाब के चारों ओर वृत्ताकार गति करती हैं, जो दिव्य आनंद और ब्रह्मांडीय गति का प्रतीक है।
❀ पारंपरिक ओडिसी संगीत, मृदंग, घंटा, शंख की ध्वनि प्रदर्शन और भक्ति गीत वातावरण को जीवंत कर देते हैं।
शाम का समापन भव्य आतिशबाजी और दर्शन के लिए एकत्रित हजारों भक्तों के साथ होता है।
❀ इस शुभ दिन, रथ यात्रा के रथों के लकड़ी के पहियों को विधिपूर्वक धुरी की छड़ों (जिन्हें परंपरागत रूप से अख़ कहा जाता है) से जोड़ा जाता है। इस अनुष्ठान को रथखाला के पास चका डेरा या पहिया फिटिंग समारोह कहा जाता है।

श्री क्षेत्र भौंरी का आध्यात्मिक महत्व
चंदन यात्रा को भगवान जगन्नाथ की ग्रीष्म लीला (जलक्रीड़ा) माना जाता है। गर्मी के मौसम में देवताओं को शीतलता प्रदान करने के लिए चंदन का लेप और जल चढ़ाया जाता है। भौनरी इस पवित्र त्योहार के सार्वजनिक बाहरी चरण के आनंदमय समापन का प्रतीक है।

संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
आवृत्ति
वार्षिक
समय
42 दिन
शुरुआत तिथि
अक्षय तृतीया
महीना
अप्रैल - मई
मंत्र
ॐ केशवाय नमः स्वाहा, ॐ नारायणाय नमः स्वाहा, माधवाय नमः स्वाहा
कारण
भगवान जगन्नाथ
उत्सव विधि
भजन कीर्तन, झांकी,आरती,नौका विहार
महत्वपूर्ण जगह
पुरी ओडिशा
पिछले त्यौहार
19 April 2026, 30 April 2025

Updated: May 11, 2026 13:02 PM

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