माँ छिन्नमस्ता मंदिर - Maa Chinmastike Mandir

मुख्य आकर्षण - Key Highlights

◉ माँ छिन्नमस्ता का सबसे प्रसिद्ध मंदिर।
◉ भेरा तथा दामोदर नदी के संगम पर स्थित मंदिर।
◉ मंदिर के साथ ही लोटस टेंपल, सूर्य मंदिर एवं नौलखा मंदिर भी।
छिन्नमस्ता मंदिर झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 80 किमी दूर रजरप्पा में स्थित है। यह भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। भैरवी-भेरा और दामोदर नदियों के संगम पर स्थित, माता छिन्नमस्तिका का दिव्य रूप दक्षिण की ओर मंदिर की उत्तरी दीवार के साथ स्थित चट्टान पर देखा जाता है।

छिन्नमस्ता मंदिर का निर्माण और वास्तुकला:
इस मंदिर का निर्माण करीब छह हजार साल पहले हुआ था। मंदिर के अंदर की चट्टान में देवी की तीन आंखें हैं। उनका कंठ सर्पमाला और मुंडमल से सुशोभित है। खुले बाल, बाहर जिह्या, आभूषणों से सजी देवी नग्न हैं। उनके दाहिने हाथ में तलवार और बाएं हाथ में कटा हुआ सिर है। उनके दोनों ओर डाकिनी और शाकिनी खड़ी हैं, जिन्हें वह अपना खून पिला रही हैं और खुद भी ऐसा ही कर रही हैं। उसके गले से खून की तीन धाराएं निकलती हैं। मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में है। सामने बलि का स्थान है, जहाँ प्रतिदिन बकरे की बलि दी जाती है। यहां मुंडन कुंड भी है। पापनाशिनी कुंड भी है, जो भक्तों के रोगों को दूर करता है।

मंदिर के चारों ओर प्राचीन ईंटें, पौराणिक मूर्तियाँ और यज्ञ कुंड और पौराणिक साक्ष्य थे, जो नष्ट हो गए या भूमिगत हो गए। इस मंदिर का निर्माण वास्तुकला के अनुसार किया गया है। इसके गोलाकार गुंबद की मूर्ति असम के कामाख्या मंदिर के समान है।

माँ छिन्नमस्ता के साथ-साथ मंदिर प्रांगण में माँ दुर्गा का लोटस टेंपल, संगम तट पर रजरप्पा मंदिर, सूर्य मंदिर, कृष्ण मंदिर एवं नौलखा मंदिर भी स्थापित हैं।

छिन्नमस्ता मंदिर की पूजा विधि
माँ छिन्नमस्ता की सबसे पहले आरती, चावल, गुड़, घी और कपूर से पूजा की जाती है। दोपहर 12 बजे खीर का भोग लगाया जाता है। भोग के समय मंदिर के द्वार कुछ समय के लिए बंद रहते हैं। शाम के समय श्रृंगार के समय पूजा की जाती है। आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। अमावस्या और पूर्णिमा को ही मंदिर आधी रात तक खुला रहता है।

असम में माँ कामरूप कामाख्या और बंगाल में माँ तारा के बाद झारखंड का माँ छिन्नमस्ता मंदिर तांत्रिकों का प्रमुख स्थान है। देश-विदेश से बहुत से साधक यहां नवरात्रि की रात और हर महीने की अमावस्या को साधना करने आते हैं। तंत्र साधना से हमें माता छिन्नमस्ता की कृपा प्राप्त होती है। यह असम में मां कामाख्या मंदिर के बाद दूसरा सबसे बड़ा शक्तिपीठ है।

कैसे पहुंचें छिन्नमस्ता मंदिर
रजरप्पा, माँ छिन्नमस्ता शक्तिपीठ तक पहुँचने के लिए बसें, टैक्सी और ट्रेकर्स उपलब्ध हैं।
Maa Chinmastike Mandir - Read In English
Chinnamasta Temple is located in Rajrappa, about 80 km from Ranchi, the capital of Jharkhand. It is one of the oldest temples in India. Situated at the confluence of Bhairavi-Bheda and Damodar river.

जानकारियां - Information

दर्शन समय
Winter: 5:30 AM - 9:30 PM; Summer: 4:00 AM - 10:00 PM
धाम
Maa DurgaSun TempleNau Lakha MandirShri Krishna KrishnaShivlingRajrappa Mandir
बुनियादी सेवाएं
Prasad, Shoe Store, Washrooms, Sitting Benches, Music System
समर्पित
माँ छिन्नमस्ता
फोटोग्राफी
🚫 नहीं (मंदिर के अंदर तस्वीर लेना अ-नैतिक है जबकि कोई पूजा करने में व्यस्त है! कृपया मंदिर के नियमों और सुझावों का भी पालन करें।)
नि:शुल्क प्रवेश
हाँ जी

कैसे पहुचें - How To Reach

पता 📧
Lerhitongri Rajrappa Jharkhand
मेट्रो 🚇
सड़क/मार्ग 🚗
Rajrappa Chitarpur Road
नदी ⛵
Damodar, Bhera
सोशल मीडिया
निर्देशांक 🌐
23.632107°N, 85.709942°E

फोटो प्रदर्शनी - Photo Gallery

माँ छिन्नमस्ता मंदिर

माँ छिन्नमस्ता मंदिर

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Updated: May 14, 2022 07:21 AM

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