भजन: सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया! (Sanwali Surat Pe Mohan Dil Diwana Ho Gaya)


भजन: सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया!

सांवली सूरत पे मोहन,
दिल दीवाना हो गया ।
दिल दीवाना हो गया,
दिल दीवाना हो गया ॥

एक तो तेरे नैन तिरछे,
दूसरा काजल लगा ।
तीसरा नज़रें मिलाना,
दिल दीवाना हो गया ॥

एक तो तेरे होंठ पतले,
दूसरा लाली लगी ।
तीसरा तेरा मुस्कुराना,
दिल दीवाना हो गया ॥

एक तो तेरे हाथ कोमल,
दूसरा मेहँदी लगी ।
तीसरा मुरली बजाना,
दिल दीवाना हो गया ॥

एक तो तेरे पाँव नाज़ुक,
दूसरा पायल बंधी ।
तीसरा घुंगरू बजाना,
दिल दीवाना हो गया ॥

एक तो तेरे भोग छप्पन,
दूसरा माखन धरा ।
तीसरा खिचडे का खाना,
दिल दीवाना हो गया ॥

एक तो तेरे साथ राधा,
दूसरा रुक्मण खड़ी ।
तीसरा मीरा का आना,
दिल दीवाना हो गया ॥

एक तो तुम देवता हो,
दूसरा प्रियतम मेरे ।
तीसरा सपनों में आना,
दिल दीवाना हो गया ॥

सांवली सूरत पे मोहन,
दिल दीवाना हो गया ।
दिल दीवाना हो गया,
दिल दीवाना हो गया ॥

Sanwali Surat Pe Mohan Dil Diwana Ho Gaya in English

Saanwali Surat Pe Mohan, Dil Deewana Ho Gaya
यह भी जानें

BhajanShri Krishna BhajanBrij BhajanBaal Krishna BhajanBhagwat BhajanJanmashtami BhajanShri Kunj Bihari BhajanLaddu Gopal BhajanKhatushayam Ji Bhajan


अगर आपको यह भजन पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

इस भजन को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

देख लिया संसार हमने देख लिया

देख लिया संसार हमने देख लिया, सब मतलब के यार हमने देख लिया ।

माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी।

माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी। ज्योत जगा के, सर को झुका के...

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल: भजन

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल, तुम बिन रह्यो न जाय हो ॥ बृजराज लडेतोलाडिले ॥

गोबिंद चले चरावन गैया: भजन

गोबिंद चले चरावन गैया । दिनो है रिषि आजु भलौ दिन, कह्यौ है जसोदा मैया ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी: भजन

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी, अँखियाँ प्यासी रे । मन मंदिर की जोत जगा दो..

तुम करुणा के सागर हो प्रभु: भजन

तुम करुणा के सागर हो प्रभु, मेरी गागर भर दो थके पाँव है...

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी: होली भजन

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी, कहाँ से आयो कुंवर कन्हैया, कहाँ से आई राधा गोरी..

🔝