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लता मंगेशकर जी - शत् शत् नमन (Rip Lata Mangeshkar - Shat Shat Naman)

लता मंगेशकर जी - शत् शत् नमन
भारत की कोकिला लता मंगेशकर जी के निधन पर उन्हें शत् शत् नमन। उनके द्वारा गाये हुए भजनों को सुनकर भक्त अक्सर भाव विभोर हो जाते हैं। आइये उनके द्वारा गाये हुए कुछ भजनों को सुनते हैं। यही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ - माँ संतोषी भजन
छोटी-छोटी कन्याएं: भजन
वंदना: ज्ञान का दान ही सबसे बड़ा हैं
ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां: भजन
करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं - माँ संतोषी भजन
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श्री हनुमान जी आरती
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श्री राम स्तुति: श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन
प्रभू तेरो नाम
वंदना: ज्ञान का दान ही सबसे बड़ा हैं

Rip Lata Mangeshkar - Shat Shat Naman in English

Tributes to the Nightingale of India Lata Mangeshkar ji on her death. Devotees often get emotional after listening to the hymns sung by him. Let us listen to some of the hymns sung by him. This will be his true tribute.
यह भी जानें

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भगवान जगन्नाथ के अलग-अलग बेश?

बेश एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है पोशाक, पोशाक या पहनावा। 'मंगला अलाती' से 'रात्रि पहुड़' तक प्रतिदिन, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की 'रत्नवेदी' पर देवताओं को सूती और रेशमी कपड़ों, कीमती पत्थरों से जड़े सोने के आभूषणों, कई प्रकार के फूलों और अन्य पत्तियों और जड़ी-बूटियों से सजाया जाता है। जैसे तुलसी, दयान, मरुआ आदि। चंदन का लेप, कपूर और कभी-कभी कीमती कस्तूरी का उपयोग दैनिक और आवधिक अनुष्ठानों में किया जाता रहा है।

ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

यह एकादशी तिथियाँ केवल वैष्णव सम्प्रदाय इस्कॉन के अनुयायियों के लिए मान्य है | ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

भगवान अलारनाथ की कहानी: श्री जगन्नाथ कथा

अनासार के दौरान जब भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं, तब अलारनाथ मंदिर परिसर मे भगवान को खीर का भोग लगाया जाता है तथा साथ ही साथ भक्तों को भी यही भोग भेंट किया जाता है।

क्यों महाप्रभु एक दिन में मौसी माँ के घर नहीं पहुँच पाते?

धार्मिक परंपरा, रीति-रिवाजों के महत्व और व्यावहारिक कारणों से पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा आमतौर पर एक दिन में गुंडिचा मंदिर नहीं पहुँचती है।

जगन्नाथ मंदिर प्रसाद को 'महाप्रसाद' क्यों कहा जाता है?

जगन्नाथ मंदिर में सदियों से पाया जाने वाला महाप्रसाद लगभग 600-700 रसोइयों द्वारा बनाया जाता है, जो लगभग 50 हजार भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।

पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के तीन रथ

रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा का वार्षिक रथ उत्सव है। वे तीन अलग-अलग रथों पर यात्रा करते हैं और लाखों लोग रथ खींचने के लिए इकट्ठा होते हैं।

पुरी रथ यात्रा से जुड़े 10 कम ज्ञात और रोचक तथ्य

पुरी रथ यात्रा विश्व के सबसे प्राचीन और विशाल धार्मिक उत्सवों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य रथों के दर्शन करने के लिए पुरी पहुँचते हैं।

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