Haanuman Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

कालाष्टमी क्या है? पालने की तरीकें बतायें? (What is Kalashtami? How to Worship?)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव भगवान शिव के पांचवे आवतार हैं. इस दिन मां दुर्गा की पूजा का भी विधान है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कालाष्टमी, प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान काल भैरव जो की शिव शंकर के रुद्र स्वरूप हैं उनकी पूजा की जाती है। कालभैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है।
कालाष्टमी कैसे मनाएं?
❀ कालाष्टमी भगवान शिव के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, सूर्योदय से पहले उठकर जल्दी स्नान कर लें।
❀ काल भैरव के लिए एक विशेष पूजा करें और अपने सभी पापों के लिए आशीर्वाद और क्षमा मांगें।
❀ इस दिन आप जीवन में समृद्धि, सुख और सफलता प्राप्त करने के लिए उपवास भी कर सकते हैं।

कालाष्टमी पर भगवान भैरव को प्रसन्न करने के उपाय:
❀ कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की प्रतिमा के आगे सरसो के तेल का दीपक जलाएं और श्रीकालभैरवाष्टकम् का पाठ करें। मनोकामना पूर्ण होने तक प्रतिदिन इस उपाय को भक्ति भाव के साथ करें।
❀ कालाष्टमी के दिन चंदन से 'ॐ नम: शिवाय' लिखकर 21 बिल्वपत्र शिवलिंग को चढ़ाएं
❀ कुछ लोग काले कुत्ते को खिलाने में भी विश्वास करते हैं जिन्हें भगवान भैरव का वाहन माना जाता है। आप उन्हें दूध, दही और मिठाई खिला सकते हैं। इस उपाय को करने से भगवान भैरवऔर शनिदेव दोनों ही प्रस्सन होते हैं।
❀ ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
❀ कालाष्टमी के दिन से लेकर 40 दिनों तक लगातार काल भैरव का दर्शन करें। इस उपाय को करने से भगवान भैरव प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामना को पूर्ण करेंगे।

What is Kalashtami? How to Worship? in English

According to the Hindu calendar, Kalashtami is celebrated every month on the eighth day of Krishna Paksha.
यह भी जानें

Blogs Kalashtami BlogsBhairav Nath BlogsShivji Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

मंडला पूजा क्या है?

मंडला पूजा, शास्त्रों में निर्धारित सभी तपस्या और दिनचर्या के साथ 41 दिनों की लंबी अवधि पूरे कठोर रीती रिवाज़ के साथ पालन किया जाने वाला अनुष्ठान है।

साध्वी का क्या अर्थ है?

साध्वी एक संस्कृत शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है "गुणी महिला" और उन महिलाओं को संदर्भित करता है जिन्होंने अपनी संसार का मोह को त्याग दिया है और आध्यात्मिक जीवन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समाज से अलग रहना चुना है। उनका जीवन भगवान के प्रति समर्पण और समाज के लिए सेवा का एक उल्लेखनीय संयोजन है। साध्वी मानते ​​है कि “मानवता की सेवा भगवान की सेवा है” और अपने जीवन भगवान के प्रति समर्पण करलेते हैं।

शकुनि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ..

शकुनि के पिता, माता, पत्नी, बेटे का क्या नाम था? युद्ध में सहदेव ने वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए शकुनि और उलूक को घायल कर दिया और देखते ही देखते उलूक का वध दिया।

भारतीय ऋतुएँ

सभी ऋतुओं की बात करें तो एक वर्ष में कुल छह ऋतुएँ होती हैं। इस मामले में, प्रत्येक मौसम की अवधि दो महीने है।

हिंदू परंपरा में गोत्र का महत्व

गोत्र हिंदू परंपरा की एक अवधारणा है जो किसी व्यक्ति के पैतृक वंश या कुल को संदर्भित करती है, जिसे आमतौर पर पुरुष वंश (पिता → दादा → परदादा, इत्यादि) के माध्यम से खोजा जाता है।

पूजा और आरती में अंतर

हिन्दू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। पूजा के माध्यम से लोग भगवान के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं और परिणामस्वरूप उनकी मनोकामना पूरी होती है। लोग दिन के अनुसार प्रत्येक भगवान की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा भगवान के प्रति समर्पण दिखाने के लिए की जाती है और इसके बाद आरती की रस्म होती है।

महाकुंभ में प्रसिद्ध अखाड़े

महाकुंभ की शान हैं अखाड़े। महाकुंभ में अखाड़े केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। तपस्वियों, संतों और आध्यात्मिक अभ्यासकर्ताओं से बने ये समूह भारत की आध्यात्मिक परंपराओं में गहराई से निहित हैं।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP