Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

शीतला अष्टमी क्या है? यह कैसे मनाया जाता है? (What is Sheetala Ashtami? How is it celebrated?)

शीतला अष्टमी क्या है? यह कैसे मनाया जाता है?
शीतला अष्टमी प्रतिवर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। इसे बासौदा अष्टमी भी कहते हैं। शीतला अष्टमी होली के आठवें दिन मनाई जाती है। इस वर्ष शीतला अष्टमी 25 मार्च 2022, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन माता शीतला की पूजा विधि-विधान से की जाती है और उनका व्रत किया जाता है।
शीतला अष्टमी और सप्तमी तिथि को उत्तर भारत में अधिकांश घरों में उपवास और पूजा की जाती है।

शीतला अष्टमी पूजा का महत्व:
सनातन धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व है। शीतला माता का रूप शीतलता देने वाला माना जाता है। शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा और व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता शीतला की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही आपको कई तरह की बीमारियों से मुक्ति मिलती है।

कहा जाता है कि भक्तों की भक्ति से प्रसन्न होकर मां शीतला स्वास्थ्य का वरदान देती हैं। ऐसा माना जाता है कि ठंडी चीजों को पसंद करने के कारण पूजा के समय मां को ठंडी चीजें अर्पित की जाती हैं।

शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त:
शीतला अष्टमी चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मनाई जाती है।
चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी शुरू - दोपहर 12:09 बजे से,
चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी समाप्त - रात 10:04 बजे तक।

माता को प्रसाद के रूप में क्या अर्पित करें?
इस दिन पूजा के समय माता शीतला को विशेष रूप से मीठे चावल का भोग लगाया जाता है। ये चावल गुड़ या गन्ने के रस से बनाए जाते हैं। वहीं कुछ जगहों पर माता को चावल और घी का भोग लगाया जाता है तो कहीं हलवा और पूरी का भोग लगाया जाता है। इस दिन घरों में खाना नहीं बनता है। आपको बता दें कि इस दिन माता को बासी भोजन चढ़ाया जाता है, जो सप्तमी के एक दिन पहले सफाई से तैयार किया जाता है। देवी को चढ़ाया जाने वाला यह भोग सप्तमी की रात को बनाया जाता है। यह प्रसाद घर के सभी सदस्यों को खिलाया जाता है। कहा जाता है कि शीतला अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाना चाहिए।

कैसे करें शीतला अष्टमी पूजा :
● सप्तमी के दिन शाम को रसोई घर की सफाई करके माता का प्रसाद तैयार किया जाता है।
● शीतला अष्टमी के दिन सुबह उठकर साफ स्नान वस्त्र धारण करें।
● माता को रोली, फूल, वस्त्र, धूप, दीप, दक्षिणा और बासा भोग अर्पित करें।
● शीतला माता को दही, रबड़ी, चावल आदि का भी भोग लगाया जाता है।
● पूजा के समय शीतला स्तोत्र का पाठ करें।
● पूजा के बाद आरती करें।
● पूजा करने के बाद माता का प्रसाद खाकर व्रत तोड़ें।
● इस दिन घरों में ताजा खाना नहीं बनाया जाता है। ताजा भोजन अगली सुबह ही तैयार किया जाता है।

What is Sheetala Ashtami? How is it celebrated? in English

Sheetala Ashtami is celebrated every year on the Ashtami of Krishna Paksha of Chaitra month. It is also called Basoda Ashtami. Sheetala Ashtami is celebrated on the eighth day of Holi. This year Sheetla Ashtami will be celebrated on Friday, March 25, 2022. On this day Mata Sheetala is worshiped with rituals and her fast is observed.
यह भी जानें

Blogs Sheetala Mata BlogsBasoda Ashtami BlogsSheetala Ashtami BlogsSheetala Ashtami Puja Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

साहिब बंदगी: एक आध्यात्मिक संगठन

साहिब बंदगी सतगुरु मधु परमहंस द्वारा स्थापित एक आध्यात्मिक संगठन है। सतगुरु मधु परमहंस एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु और भारतीय सेना में पूर्व जूनियर आयुक्त अधिकारी थे।

सावन शिवरात्रि 2026

आइए जानें! सावन शिवरात्रि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ एवं सम्वन्धित कुछ प्रेरक तथ्य.. | बृहस्पतिवार, 30 जुलाई 2026 से शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 तक

भगवान जगन्नाथ का नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान क्या है?

नीलाद्रि बीजे, वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के अंत और भगवान जगन्नाथ की गर्भगृह में वापसी को चिह्नित करता है या फिर आप भगवान जगन्नाथ और उनकी प्यारी पत्नी माँ महालक्ष्मी के बीच एक प्यारी सी कहानी बता सकते हैं।

देवघर के आस-पास घूमने की सबसे अच्छी जगह

अगर आप देवघर जाने की योजना बना रहे हैं तो बाबा बैद्यनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा आप देवघर में और भी बहुत कुछ देख सकते हैं। शिवगंगा | त्रिकूट पर्वत | नंदन पहाड़ी | सत्संग आश्रम | नौलखा मंदिर | तपोवन | रिखियापीठ आश्रम | हरिला जोरिक | श्रीनिवास आंगन | देवसंगा मठ

समाधि क्या है? भू-समाधि और जल-समाधि में अंतर बताइए?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में संत या गुरु के रूप में माने जाने वाले लोगों को सम्मानित करने के लिए समाधि स्थलों को अक्सर इस तरह से बनाया जाता है, जिसमें कहा जाता है कि ऐसी आत्माएं महा समाधि में चली गई थीं, या मृत्यु के समय पहले से ही समाधि में थीं।

भगवान जगन्नाथ के अलग-अलग बेश?

बेश एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है पोशाक, पोशाक या पहनावा। 'मंगला अलाती' से 'रात्रि पहुड़' तक प्रतिदिन, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की 'रत्नवेदी' पर देवताओं को सूती और रेशमी कपड़ों, कीमती पत्थरों से जड़े सोने के आभूषणों, कई प्रकार के फूलों और अन्य पत्तियों और जड़ी-बूटियों से सजाया जाता है। जैसे तुलसी, दयान, मरुआ आदि। चंदन का लेप, कपूर और कभी-कभी कीमती कस्तूरी का उपयोग दैनिक और आवधिक अनुष्ठानों में किया जाता रहा है।

ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

यह एकादशी तिथियाँ केवल वैष्णव सम्प्रदाय इस्कॉन के अनुयायियों के लिए मान्य है | ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP