Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

पितृ पक्ष में किन भोजनों से परहेज किया जाता है? (Which foods are avoided during Pitru Paksha?)

पितृ पक्ष में किन भोजनों से परहेज किया जाता है?
हिंदुओं का मानना ​​है कि पितृ पक्ष मैं श्राद्ध करने से पूर्बजों को मुक्ति मिलती है और प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध की रस्में हिंदू परंपराओं के अनुसार बहुत सारे प्रतिबंधों के तहत की जाती हैं। इस दौरान कुछ भोजनों से परहेज किया जाता है।
निम्नलिखित कुछ भोजन हैं जिन्हें श्राद्ध के समय में नहीं खाना चाहिये:

प्याज और लहसुन
आयुर्वेद में लहसुन को राजसिक और प्याज को तामसिक माना गया है। चूंकि वे शरीर में गर्मी पैदा कर सकते हैं, इन दो सब्जियों को पहुंच से बाहर रखा जाना चाहिए और किसी भी अनुष्ठान मैं ब्यबहार नहीं किया जाता है।

मांसाहारी भोजन
किसी भी हिंदू अनुष्ठान में मांसाहारी भोजन का सेवन सख्त वर्जित है। इसी तरह श्राद्ध के दौरान मांस या कोई भी मांसाहारी भोजन करने की अनुमति नहीं है।

गेहूं और दालें
श्राद्ध के पवित्र काल में कच्चा अनाज वर्जित है। इसलिए इस दौरान चावल, दाल और गेहूं नहीं खाना चाहिए। इन खाद्य पदार्थों का कच्चा सेवन करना वर्जित माना गया है। आलू, अरबी और मूली जैसी सब्जियां भी वर्जित हैं।

मसूर दाल
मसूर दाल को कोई भी व्यक्ति जो श्राद्ध समारोह कर रहा है नहीं खा सकता। मसूर की दाल खाते समय छोले और फटी दाल से भी बचना चाहिए। काली उड़द की दाल और चना सत्तू से भी बचना चाहिए।

अन्य खाद्य पदार्थ
मांसाहारी भोजन और शराब के साथ-साथ पितृ पक्ष के दौरान अन्य कुछ खाद्य पदार्थ जीरा, काला नमक, काली सरसों, खीरा और बैगन कुछ खाद्य पदार्थ भी वर्जित हैं।

पितृ पक्ष के दौरान नए कपड़े नहीं खरीदने चाहिए और न ही पहनने चाहिए, इससे पितृ दोष होता है। पितृ पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराने का नियम है।

Which foods are avoided during Pitru Paksha? in English

Hindus believe that performing Shradh in Pitru Paksha liberates the ancestors and makes them happy. The rituals of Shradh are performed according to Hindu traditions under a lot of restrictions. Some foods are avoided during this time.
यह भी जानें

Blogs Shraaddh Paksha BlogsKanagat BlogsMahalaya Paksha BlogsSarvapitri Amavasya BlogsMahalaya Amavasya BlogsApara Paksha BlogsPitru Amavasya BlogsPeddala Amavasya BlogsPitar Paksha Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

हिंदू परंपरा में गोत्र का महत्व

गोत्र हिंदू परंपरा की एक अवधारणा है जो किसी व्यक्ति के पैतृक वंश या कुल को संदर्भित करती है, जिसे आमतौर पर पुरुष वंश (पिता → दादा → परदादा, इत्यादि) के माध्यम से खोजा जाता है।

पूजा और आरती में अंतर

हिन्दू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। पूजा के माध्यम से लोग भगवान के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं और परिणामस्वरूप उनकी मनोकामना पूरी होती है। लोग दिन के अनुसार प्रत्येक भगवान की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा भगवान के प्रति समर्पण दिखाने के लिए की जाती है और इसके बाद आरती की रस्म होती है।

महाकुंभ में प्रसिद्ध अखाड़े

महाकुंभ की शान हैं अखाड़े। महाकुंभ में अखाड़े केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। तपस्वियों, संतों और आध्यात्मिक अभ्यासकर्ताओं से बने ये समूह भारत की आध्यात्मिक परंपराओं में गहराई से निहित हैं।

जैन ध्वज क्या है?

जैन धर्म में जैन ध्वज महत्वपूर्ण है और इसके अनुयायियों के लिए एकता के प्रतीक के रूप में कार्य करता है। विभिन्न समारोहों के दौरान जैन ध्वज मंदिर के मुख्य शिखर के ऊपर फहराया जाता है।

जैन धर्म विशेष

आइए जानें! जैन धर्म से जुड़ी कुछ जानकारियाँ, प्रसिद्ध भजन एवं सम्वन्धित अन्य प्रेरक तथ्य..

पूजा घर में जल रखना क्यों आवश्यक है?

हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसी कई बातें लिखी गई हैं जिनका हम सदियों से पालन करते आ रहे हैं। इन्हीं में से एक है पूजा के स्थान पर जल रखने की अनिवार्यता। पूजा घर में किसी अन्य वस्तु के साथ एक पात्र में जल भी रखें।

कितना खर्चा आयेगा ईशा योग केंद्र जाने के लिए ?

चेन्नई और बंगलौर से लगभग ₹6000 से ₹10000 लागत के साथ आप आदियोगी महाशिवरात्रि की अद्भुत रात देख सकते हैं।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP