मुख्य आकर्षण - Key Highlights |
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| ◉ मंदिर में 18 भुजाओं वाली महालक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित है। |
| ◉ अष्टदशभुजा स्वरूप देवी की व्यापक शक्ति और विभिन्न दिव्य शक्तियों के प्रतीकात्मक समन्वय को दर्शाता है। |
| ◉ भक्त समृद्धि, खुशहाली और दैवीय आशीर्वाद पाने के लिए इस मंदिर में आते हैं। |
अष्टदशभुजा महालक्ष्मी मंदिर देवी महालक्ष्मी को समर्पित एक हिंदू मंदिर है, जहाँ उनकी अष्टदशभुजा रूप की पूजा की जाती है। यह मंदिर उत्तराखंड के हल्द्वानी इलाके में नेशनल हाईवे 87 पर स्थित है। इसे उत्तर भारत के विशिष्ट अष्टदशभुजा महालक्ष्मी मंदिरों में गिना जाता है।
अष्टदशभुजा महालक्ष्मी मंदिर, उत्तराखंड की दर्शन का समय
मंदिर पूरे सप्ताह खुला रहता है और दर्शन का समय सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक है।
अष्टदशभुजा महालक्ष्मी मंदिर में मुख्य उत्सव
नवरात्रि, दीपावली, लक्ष्मी पूजा, पूर्णिमा एवं विशेष देवी पर्व प्रमुख त्योहार हैं। शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के पाठ जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं। भक्त माता को पुष्प, चुनरी, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन बना रहता है।
कैसे पहुँचें अष्टदशभुजा महालक्ष्मी मंदिर, उत्तराखंड
अष्टदशभुजा श्री महालक्ष्मी मंदिर उत्तराखंड के हल्द्वानी क्षेत्र के बेरीपड़ाव, नेशनल हाईवे 87, उत्तराखंड पर स्थित है। यह मंदिर शहर के मुख्य ट्रांसपोर्ट हब से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। यहाँ पहुँचने के लिए आप आसानी से ऑटो-रिक्शा या लोकल टैक्सी ले सकते हैं, या कालाढूंगी रोड (NH 87) से अपनी या शेयर्ड गाड़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं। मंदिर हाईवे के किनारे सुविधाजनक जगह पर स्थित है, जिससे तीर्थयात्रियों और यात्रियों के लिए यहाँ पहुँचना आसान है।
18 भुजाओं वाली भव्य प्रतिमा विराजमान है। भक्त यहां माता से सुख, शांति, समृद्धि, ऐश्वर्य और परिवार के मंगल की प्रार्थना करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार सच्ची श्रद्धा से माता की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
भक्तिभारत के अनुसार मंदिर की स्थापना महमालक्ष्मीकृष्ण वल्लभकृष्ण जी महाराज द्वारा कराए जाने का उल्लेख मिलता है। इसी कारण इस धाम को वल्लभकृष्ण यातिधाम नाम से भी जाना जाता है। मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ बाहर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर की वास्तुकला में सफेद संगमरमर का प्रमुख प्रयोग दिखाई देता है। पूरा मंदिर मार्बल से निर्मित है और इसके ऊपर बने तीन सफेद गुंबद इसकी प्रमुख स्थापत्य है।
बरेली रोड/हाईवे के किनारे स्थित होने के कारण मंदिर का बाहरी स्वरूप दूर से ही श्रद्धालुओं और यात्रियों का ध्यान आकर्षित करता है। शांत एवं भव्य वातावरण मंदिर की धार्मिक अनुभूति को और बढ़ाता है।
6 AM - 9 PM
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