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✨गणेशोत्सव - Ganeshotsav

Ganeshotsav Date: Ganesha Chaturthi: Tuesday, 19 September 2023
गणेशोत्सव

गणेशोत्सव, गणेश चतुर्थी से शुरू होते हुए, 10 दिनों के बाद अनंत चतुर्दशी को समाप्त होता है। अनंत चतुर्दशी के ही दिन श्री गणेश विसर्जन भी होता है। भगवान गणेश को ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है, मोदक श्री गणेश का सबसे प्रिय पकवान है।

संबंधित अन्य नामगणेश चतुर्थी, गणपति पूजा, विनायका चतुर्थी, गणेश विसर्जन, गणपति विसर्जन, अनंत चतुर्दशी
सुरुआत तिथिभाद्रपद शुक्ला चतुर्थी
उत्सव विधिपंडाल, व्रत, मंत्र जाप

Ganeshotsav in English

Ganeshotsav start with Ganesh Chaturthi, ends after 10 days on Anant Chaturdashi which is also known as Ganesh Visarjan day. Lord Ganesh is worshipped as the God of wisdom, prosperity and good fortune and offer Him sweet dish like modak.

गणेश विसर्जन

9 September 2022
इस साल गणेश उत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को शुरू हो गया है। गणपति उत्सव के दिन घर-घर मैं बप्पा की मूर्ति की स्थापना की जाती है। गणपति उत्सव 10 दिनों तक चलने के बाद, भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को बप्पा का विसर्जन किया जाता है, जिसे अनंत चतुर्दशी भी कहा जाता है। विसर्जन में भक्त गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के नारे लगाते हैं।

गणपति विसर्जन कब और कैसे करें
अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा का विसर्जन होता है। विसर्जन के दौरान, भक्त नृत्य करते हैं, गाते हैं, रंग उड़ाते हैं और बप्पा को धूमधाम से विदाई देते हैं।

❀ गणपति विसर्जन हमेशा पानी में ही करना चाहिए। सबसे पहले किसी लकड़ी की थाली में पीला या लाल कपड़ा बिछाकर उस पर स्वास्तिक बना लें। गमले में अक्षत फूल रखकर गणपति की मूर्ति को रखें।
❀ बप्पा की मूर्ति की विधिवत पूजा करें, फल और फूल चढ़ाएं और मोदक का भोग लगाएं।
❀ गणपति जी के साथ साथ मूर्ति के पूजा से जुड़ी चीजों को विसर्जित करें।
❀ इसके बाद क्षमा प्रार्थना करते हुए बप्पा के अगले वर्ष आने की कामना करें।
❀ पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त और बिधि पूर्वक विसर्जन से ही बप्पा की कृपा प्राप्त होती है।
राहुकाल में गणपति का विसर्जन न करें।

गणेश चतुर्थी

31 August 2022
गणेशोत्सव का पहिला दिन भगवान गणेश के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिसे गणेश चतुर्थी या गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है। विनायक श्री गणेश का ही दूसरा नाम है, अतः इस त्यौहार को विनायक चतुर्थी भी बोला जाता है।

महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल , गोवा, उड़ीसा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस त्यौहार को घर मे और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की कच्ची मिट्टी की मूर्तियाँ स्थापित करके परिवारों और समूहों द्वारा पूजा की जाती है। लेकिन उत्तर भारत के कुछ राज्यों में इस त्यौहार को मंदिरों में भगवान गणेश की अस्थायी प्रतिमा स्थापित करके मनाते हैं।

इतिहास

यह अनुमान है कि, 1630-1680 के दौरान गणेश चतुर्थी उत्सव छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में एक सार्वजनिक समारोह के रूप में मनाया जाता था। शिवाजी के समय, यह गणेशोत्सव उनके साम्राज्य के कुलदेवता के रूप में नियमित रूप से मनाना शुरू किया गया था। सन् 1893 में लोकमान्य तिलक द्वारा इसे पुनर्जीवित किया गया।

लालबाग के राजा दक्षिण मुंबई में स्थित दुनियाँ के सबसे लोकप्रिय सार्वजनिक गणेश मंडलों मे से एक है, जिसे मराठी में लालबागचा राजा कहा जाता है। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना वर्ष 1934 में हुई थी। यह मुंबई के लालबाग, परेल इलाके में स्थित हैं। http://www.lalbaugcharaja.com

संबंधित जानकारियाँ

आगे के त्यौहार(2023)
Ganesha Chaturthi: 19 September 2023Ganesh Visarjan: 28 September 2023
आवृत्ति
वार्षिक
समय
10 दिन
सुरुआत तिथि
भाद्रपद शुक्ला चतुर्थी
समाप्ति तिथि
भाद्रपद शुक्ला चतुर्दशी
महीना
अगस्त / सितंबर
मंत्र
गणपति बप्पा मोरया, गणेश महाराज की जय
प्रकार
महाराष्ट्र सार्वजनिक अवकाश
उत्सव विधि
पंडाल, व्रत, मंत्र जाप
महत्वपूर्ण जगह
श्री विनायक मंदिर, गणपति पंडाल, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, मध्य प्रदेश।
पिछले त्यौहार
Ganesh Visarjan: 9 September 2022, Ganesha Chaturthi: 31 August 2022, 10 September 2021 - 19 September 2021, 22 August 2020 - 1 September 2020
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गणेशोत्सव 2023 तिथियाँ

FestivalDate
Ganesha Chaturthi19 September 2023
Ganesh Visarjan28 September 2023
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