Next Festival: गोपाष्टमी | तुलसी विवाह | Information: BhaktiBharat.com is now SECURE!

Prachin Hanuman Mandir


Updated: Apr 09, 2017 17:52 PM About | Timing | History | Photo Gallery | Video | Comments | Map


प्राचीन हनुमान मंदिर (Prachin Hanuman Mandir) - Palika Kendra, Hanuman Road Area, Connaught Place, New Delhi - 110001

प्राचीन हनुमान मंदिर (Prachin Hanuman Mandir) is an ancient temple dedicated to Bal Hanuman from the Mahabharata period. It is claimed to be one of the five temples of Mahabharata days in Delhi. It is claimed that this continuous 24-hour chanting of the mantra "Sri Ram, Jai Ram, Jai Jai Ram" has been recorded in the Guinness Book of World Records since August 1, 1964. Read History

Key Highlights

  • Most Famous Bal Hanuman Temple in Delhi.
  • Pandavas Established Temple After Won the Kurukshetra.
  • Tulsidas Also Visited This Holy Place During Hanuman Chalisa Hymns.
  • Guinness Book of World Records For Continuous Japa.
  • Mughal Emperor Akba Also Come to Pray Bal Hanuman.

Ram Navami and Hanuman Jayanti - 11 April 2017

10:30 AM
Hawan Samaroh. Swarn Shrangar till night.
12:00 PM
Maha Arti at noon.

Information

Timing
Tuesday, Saturday: 4:00 AM - All Night
Other Days: 4:00 AM - 11:00 PM
Arti
5:00 AM & 7:45 PM or 7:30 PM (as per sun set)
Dham
Main Bhawan: Shri Radha KrishnaShri Ram SitaShri Bal Hanuman Ji
Mata Rani in Vishal RoopPanchmukhi Hanuman JiMaa SarswatiMaa LakshmiShri Ganesh Ji
Shivling with GanMaa GayatriBhagwan KalkiSai BabaBaba Balaknath
Basic Services
Drinking Water, Prasad, Puja Samagri, Shoe Store
Charitable Services
Dharmshala
Founder
Pandavas, Maharaj Jaisingh (Renovated)
Founded
Mahabharata Period, 1724 (Renovated)
Organized By
Shri Hanuman Ji Maharaj Mandir Trust
Address
Palika Kendra, Hanuman Road Area, Connaught Place, New Delhi - 110001
Photography
No (It's not ethical to capture photograph inside the temple when someone engaged in worship! Please also follow temple`s Rules and Tips.)
Coordinates
28.630047°N, 77.214945°E

Timeline

Mahabharata Period

After won the mahabharat Pandavas foundation several temples, Bal Hanuman temple is one of them.

1532–1623

During his spiritual visit of Delhi, Tulsidas stay this holy place and written Hanuman Chalisa in this temple.

1562–1605

Mughal emperor Akba offer a silver moon, which is placed on the top of Hanuman temple.

1560-1614

Maharaj Mansing First build present structure of mandir.

1724

Renovate by Maharaj Jaisingh from Jaipur.

1964

Guinness Book of world records for continuous japa of "Sri Ram, Jai Ram, Jai Jai Ram" since August 1, 1964.

20 January 2010

Shri Goswami Tulsidas Ji stableshed leftmost of main outer hall entrance.

Photo Gallery

Photo in Full View
Random view of Prachin Hanuman Mandir

Random view of Prachin Hanuman Mandir

A side view of Prachin Hanuman Mandir

A side view of Prachin Hanuman Mandir

Full front view of Prachin Hanuman Mandir

Full front view of Prachin Hanuman Mandir

Peepal tree with Prachin Hanuman Mandir

Peepal tree with Prachin Hanuman Mandir

Main shikhar with half moon offer by mughal emperor Akbar, which is also visible in night view.

Main shikhar with half moon offer by mughal emperor Akbar, which is also visible in night view.

Main entry gate of Prachin Hanuman Mandir from Hanuman Vatika.

Main entry gate of Prachin Hanuman Mandir from Hanuman Vatika.

Video Gallery

History

After the Pandavas won the Kurukshetra war against the Kauravas and re-established themselves in Indraprastha, the Pandava clan is stated to have built five temples of Hanuman and other deities.

It is believed that Tulsidas (1532–1623) penned the famous Hanuman Chalisa hymns in praise of Hanuman, visited this temple in Delhi. During his visit to Delhi, Tulsidas was summoned by the Mughal Emperor and asked to perform a miracle, which he did with the blessings of Lord Hanuman. The Emperor was pleased with Tulsidas and presented the Hanuman temple with an Islamic crescent Moon finial which adorns the temple spire. It is also claimed that because of the crescent moon symbol on the spire, the temple was not destroyed by the Muslim rulers who invaded India at various times.

History in Hindi

वर्तमान हनुमान मंदिर का स्वरूप सन 1724 में श्रद्धालुओं के सम्मुख आया जब तत्कालीन जयपुर रियासत के महाराज जयसिंह ने इसका फिर से जीर्णोद्धार करवाया. उसके पूर्व कनाट प्लेस स्थित भगवान हनुमान का ये दिव्य मंदिर आक्रमण और आततायी अत्याचार के तमाम झंझावातों से भी जूझता रहा था. मुगल शासकों के दौर में इस मंदिर पर कई आक्रमण होने की भी कहानियां भी मंदिर के महंत और श्रद्धालु सुनाते हैं. लेकिन अपने आप में ये बात भी उतनी ही चमत्कार और श्रद्धापूर्ण है कि हनुमान मंदिर के इस बालरूप को कभी भी कोई क्षति नहीं पहुंचा सका. मंदिर के महंत जिनकी पिछली 33 पीढ़ियां यहां बालरूप हनुमान की सेवा करती आ रही हैं बताते हैं कि कनाट प्लेस के हनुमान मंदिर में आने भक्तों पर बजरंगबली की हमेशा से कृपादृष्टि बरसती रहती है. विधिपूर्वक पूजित होने पर कनाट प्लेस के बजरंगबली सभी मनोरथों की पूर्ति करने वाले सुख समृद्धि की पूर्ति करने वाले हैं. बजरंग बली के इस बालरूप के पूजन की एक और विशेषता है मोदक, लड्डू चढ़ाने वाले भक्तों पर ये विशेष मुदित होते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भों के साथ-साथ इस मंदिर से सर्वधर्म समभाव और सांप्रदायिक एकता की कई मिसालें भी इस मंदिर के साथ जुड़ी हुई हैं. कहा जाता है कि मुगल बादशाह अकबर को जब काफी समय तक पुत्र प्राप्ति नहीं हुई तब वे कनाट प्लेस के इस मंदिर में आए और पूरी आस्था के साथ पुत्ररत्न की कामना की । और अंतत बजरंग बली की कृपा से सलीम के रूप में उनकी मुराद पूरी हुई. सौहार्द्र की मिसाल के तौर पर मंदिर के विमान पर आज भी ओम अथवा कलश के स्थान पर चांद का चिन्ह अवस्थित है. इस मंदिर की तमाम विशेषताओं में सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि ये हनुमानजी के बाल्यकाल को दर्शाने वाले देश का सबसे प्रमुख मंदिर है। यहां बाल हनुमान के एक हाथ में खिलौना और दूसरा हाथ उनके सीने पर है. ये महावली वीरवर बजरंगबली का ही प्रताप है कि इस मंदिर में 1 अगस्त 1964 से आज तक लगातार श्री राम जयराम जय जय राम का जाप जारी है. जिसके लिए इसे गिनीज बुक में भी शामिल किया गया है।

शिल्पकला की दृष्टि भी ये मंदिर बेहद उत्कृष्ट कोटि का है. इसके मुख्य द्वार का वास्तुशिल्प रामायण में वर्णित कला के अनुरूप है. मुख्य द्वार के स्तंभों पर संपूर्ण सुंदरकांड की चौपाइयां खुदी हुई हैं. ऐसा माना जाता है कि रामचरित मानस जैसा ऐतिहासिक धर्मग्रंथ लिखने वाले गोस्वामी तुलसीदास 16वीं सदी में जब दिल्ली आए तब वे इस मंदिर में भी दर्शन को आए थे. कहा जाता है कि यही वो पवित्र स्थान है जहां से उन्हें 40 चौपाइयों की हनुमान चालीसा लिखने की प्रेरणा मिली .ऐसे संकट मोचन प्रभु श्री हनुमान का स्तवन मानव मात्र के आधि-व्याधि-शोक-संताप-ज्वर का प्रशमन कर विजय प्रदान करने वाला है। जो भी भक्त मन में साध लिए सात शनिवार तक लगातार यहां परिक्रमा करने आता है वो भक्त निश्चय ही मनोवांछित फल पाता है।

दिल्ली के दिल यानी कनाट प्लेस के बाबा खड़ग सिंग मार्ग पर स्थित यह मंदिर कई मायनों में विशिष्ट इसलिए भी है कि इसके एक तरफ गुरुद्वारा बंगला साहिब स्थित है तो वहीं थोड़ी ही दूरी पर मस्जिद और चर्च भी हैं. सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को मंदिर में चोला चढ़ाने की खास परंपरा है. चोला चढ़ावे में श्रद्धालु घी, सिंदूर, चांदी का वर्क और इत्र की शीशी का इस्तेमाल करते हैं. कनाट प्लेस के हनुमान मंदिर की एक अद्भुद चमत्कारिक विशेषता है यहां हनुमानजी लगभग दस साल बाद अपना चोला छोड़कर अपने प्राचीन स्वरूप में आ जाते हैं।

इसके अतिरिक्त साल में चार तिथियां इस मंदिर के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं. दीपावली, हनुमान जयंती, जन्माष्टमी, और शिवरात्रि के दिन मंदिर में बाल हनुमान का विशेष श्रृंगार किया जाता है. इस दिन भगवान को सोने का श्रंगार किया जाता है। यहां मनौती मानने वाले भक्त बड़ी संख्या में संसारभर से आते हैं और मनौती पूर्ण होने पर भगवान को सवामनी चढ़ाते हैं।

कनाट प्लेस देश और दिल्ली का व्यावसायिक केंद्र होने के साथ ही धर्म और आस्था का भी केंद्र है. और इसमें हनुमान मंदिर की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है. इसका सबूत हैं यहां हर दिन दर्शन करने वाले लाखो भक्त। इस लिहाज से कनाट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर पर्यटन और धार्मिक पर्यटन में महतवपूर्ण भूमिका निभा रहा है. अमूमन देश विदेश से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस मंदिर में शीश झुकाना नहीं भूलते. मंगलवार और शनिवार भगवान हनुमान के पूजन के दो विशेष दिन हैं. इन दिनों में मंदिर 24 घंटे के लिए खुला होता है. भगवन की आराधना में जलने वाली अखंड ज्योति यहां हमेशा जलती रहती है।

How To Reach Prachin Hanuman Mandir

http://www.bhaktibharat.com/mandir/prachin-hanuman-mandir

Share Your Feedback on Prachin Hanuman Mandir

आरती: श्री हनुमान जी

मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं,बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं, श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

आरती: माँ लक्ष्मीजी

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥

आरती: माँ महाकाली

जय काली माता, मा जय महा काली माँ।
रतबीजा वध कारिणी माता।
सुरनर मुनि ध्याता, माँ जय महा काली माँ॥...

^
top