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श्री वार्ष्णेय मंदिर


updated: Oct 09, 2018 22:40 PM About | Timing | Highlights | History | Photo Gallery | Video | How to Reach | Comments


श्री वार्ष्णेय मंदिर (Shri Varshney Mandir) - Near Shri Varshney College, G.T. Road, Aligarh UP - 202001

The highest peak temple of Aligarh, श्री वार्ष्णेय मंदिर (Shri Varshney Mandir) was initiated on chaitra shukla Shri Ram Navmi 12 April 2000, with the worship of Shri Ganesh and Kalash Pooja. Entire pran pratistha event was handled by the teachers of Sanskrit College Narwar as per instructions of Shri Madhavashram Ji Maharaj, After worship of Shri Ganesh and Kalash Pooja. On the 15th of April, the all God murti were visited by the city tour to completion of the prana pratishta event. Varshney temple has been included in 100 famous tourist centers declared by Uttar Pradesh government. Know About Temple in Hindi

समय सारिणी

दर्शन समय
Summer: 5:30 - 11:00 AM, 6:00 - 10:30 PM
Winter: 6:00 - 11:30 AM, 6:00 - 10:00 PM
5:30 AM: Summer: Mangal Aarti
6:00 AM: Winter: Mangal Aarti, Mishri Bhog
7:30 AM: Summer: Shringar Aarti
8:00 AM: Winter: Shringar Aarti
10:30 AM: Summer/Winter: Bhog Aarti
11:00 AM: Summer: Vishram Aarti
11:30 AM: Winter: Vishram Aarti
6:00 PM: Summer: Bhog Darshan
6:30 PM: Summer: Thakur Ji Seva
7:00 PM: Summer: Sankirtan
7:30 PM: Winter: Maha Aarti
8:00 PM: Summer: Maha Aarti
9:00 PM: Summer/Winter: Maha Bhog
10:00 PM: Winter: Doodh Bhog/Shayan Aarti | Summer: Doodh Bhog
10:30 PM: Summer: Shayan Aarti

हिन्दी मे जानें

अलीगढ़ के सबसे उँचे शिखर वाला मंदिर श्री वार्ष्णेय मंदिर में देव प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन, बद्रिकाश्रम पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्यपाद श्री माधवाश्रम जी महाराज के निर्देशानुसार संस्कृत महाविद्यालय, नरवर के प्रमुख आचार्यों द्वारा विधि-विधान से शुभ तिथि चैत्र शुक्ला श्री राम नवमी 12 अप्रैल 2000 को प्रातःकाल विद्याविनायक श्री गणेश जी की पूजा-अर्चना एवं कलश पूजन से प्रारम्भ हुआ था। प्राण-प्रतिष्ठा के आयोजन को पूर्ण संपन्न हेतु, दिनांक 15 अप्रैल 2000 को सभी सुसज्जित देवी देवताओं की प्रतिमाओं को नगर भ्रमण कराया गया।

योगीराज श्री कृष्ण, श्री लक्ष्मी नारायण, श्री सीताराम-लक्षमण-हनुमान एवं अन्य देवी देवताओं की भव्य एवं अलौकिक प्रतिमाओं को जयपुर के अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कारीगरों द्वारा श्वेत संगमरमरी पत्थर से तराशा गया है। मंदिर के विशाल एवं भव्य प्रवेश द्वार के शीर्ष पर विराजमान श्री अक्रूर जी महाराज की प्रतिमा अलौकिक आनन्द की अनुभूति करने वाली बनाई गई है।

मंदिर स्थापना दिवस (पाटोत्सव), श्री कृष्ण जन्माष्टमी, नन्दोत्सव, दीपावली, अन्नकूट, बसन्त पंचमी एवं होली जैसे महापर्व विशेष रूप से बड़े ही हर्षोल्लास एवं भव्यता से मनाये जाते हैं। कार्तिक मास की अमावस्या को परम्परागत दीपावली महापर्व मन्दिर में मनाये जाने वाला विशेष पर्व है। अलीगढ़ के इस पवित्र मन्दिर को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित 100 प्रसिद्ध पर्यटक केंद्रों में शामिल किया गया है।

मंदिर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व प्रातः दुग्धभिषेक, सांय काल फूल बंगला और मध्य रात्रि 12 बजे कन्हैया जी का अवतरण, जैसे कार्यक्रमों के साथ धार्मिक आस्था, हर्षोल्लास और जबर्दस्त तैयारियां के साथ मनाया जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के तीसरे दिन सभी नगर निवासी नन्दबाबा को बधाई देने हेतु मन्दिर में एकत्रित होते हैं। यह दिवस मन्दिर में नन्दोत्सव के रूप में बड़े ही उल्लास और उमंग से मनाया जाता है। नन्दबाबा और यशोदारानी उपनन्दों के साथ पारम्परिक पोशाकों में नन्दलाला को लेकर मन्दिर में आते हैं।

वृन्दावन की प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन मंदिर में धूमधाम व रंगारंग कार्यक्रम के साथ आयोजित किया जाता है। होली मिलन के पावन अवसर पर समाज में समरसता और सद्भाव की अभूतपूर्व अभिवृद्धि के साथ आने वाले सभी सज्जनों का इत्र लगाकर और ठंडाई पिलाकर स्वागत किया जाता है। होली मिलन के उपरान्त सभी लोग दाल, रोटी का सुरुचिपूर्ण भोग प्रसाद ग्रहण करके ही अपने-अपने घरों को लौटते हैं।

श्री गणेश पूजा महोत्सव को मंदिर बहुत ही धूमधाम से मानता है। श्री गणेश मूर्ति की स्थापना के साथ इस कार्यक्रम का रंगारंग शुभारंभ किया जाता है। और श्री गणेश विसर्जन वार्ष्णेय मंदिर में पूजन के साथ प्रारंभ होता है, तदोप्रान्त शोभायात्रा में परिवर्तित होकर शहर के रामलीला ग्राउंड, दुबे पड़ाव, ओवर ब्रिज होते हुए राजघाट पर जाकर वैदिक रीति के अनुसार विसर्जन की प्रक्रिया सम्पन्न होती है। प्रत्येक वर्ष श्रावण मास को श्री वार्ष्णेय मंदिर जबरदस्त तैयारी से मानता है। जहाँ सावन के पहले सोमवार पर मंदिर परिसर स्थित शिवालय में जलाभिषेक की विशेष व्यवस्था की जाती है तथा प्रतिदिन सवामनी प्रसाद का कार्यक्रम रखा जाता है।

फोटो प्रदर्शनी

Photo in Full View
Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

Shri Varshney Mandir

जानकारियां

धाम
Shri Ram ParivarYogiraj Shri KrishnaShri Laxmi Narayan
Maa TulsiBanana Tree
बुनियादी सेवाएं
Prasad, Drinking Water, Water Cooler, Office, Shose Store, CCTV Security, Sitting Benches, Prasad Shop, Washrooms, Sound System
धर्मार्थ सेवाएं
Auditorium - Akrur Bhawan, Gaushala, Homeopathic Clinic
संस्थापक
Varshney Samaj
स्थापना
12 April 2000 (Chaitra Krishna Trayodashi)
देख-रेख संस्था
Shri Varshney Mandir Samiti
समर्पित
Yogiraj Shri Krishna
फोटोग्राफी
No (It's not ethical to capture photograph inside the temple when someone engaged in worship! Please also follow temple`s Rules and Tips.)

क्रमवद्ध

12 April 2000 (Chaitra Shukla Navami)

First pran pratisha initiation.

16 April 2000 (Chaitra Krishna Trayodashi)

Pran pratisha.

22 April 2005 (Chaitra Shukla Trayodashi)

Gaushal inauguration by Smt. Savitri Varshney.

वीडियो प्रदर्शनी

श्री वार्ष्णेय मंदिर पाटोत्सव समापन पर हुआ विशाल भंडारा 2014

कैसे पहुचें

कैसे पहुचें
सड़क/मार्ग: Aligarh - Kanpur Road / GT Road
पता
Near Shri Varshney College, G.T. Road, Aligarh UP - 202001
संपर्क करें
+91 93582 51363, varshneymandir@yahoo.com
वेबसाइट
www.shrivarshneymandir.org
facebook
varshneymandir
twitter
varshneymandir
निर्देशांक
27.879014°N, 78.080117°E
श्री वार्ष्णेय मंदिर गूगल के मानचित्र पर
http://www.bhaktibharat.com/mandir/varshney-mandir

अगला मंदिर दर्शन

अन्य पुराने उत्सव

» Pancham Navratri Utsav 2018

श्री वार्ष्णेय मंदिर अलीगढ़ पर श्री नवदुर्गा महोत्सव सेवा समिति द्वारा पंचम नवरात्रि महोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है ।इस कार्यक्रम के लिए श्री वार्ष्णेय मंदिर पर जबरदस्त तैयारियां चल रही हैं। All programs will start at 7 PM

10 October
Shri Navdurga Sthapna.
11 October
Bhagwati Gayan Pratiyogta.
12 October
Ek Sham Thakurji Ke Naam.
13 October
Maa Bhagwati Roop Sajja Pratiyogta.
14 October
Maa Bhagwati Dance Pratiyogta.
15 October
Mata Ki Cahuki.
16 October
Shri Balaji Maharaj Bhajan Sandhya.
17 October
Chappan Bhog and Mahaaarti.
18 October, 4:00 PM
Maa Bhagwati Shobhayatra and Bhog Prasad.
21 October
Garva and Dandiya.
» 3 सितम्बर की मध्य रात्रि को जन्मेंगे कन्हैया।

प्रातः दुग्धभिषेक, सांय काल फूल बंगला और मध्य रात्रि 12 बजे कन्हैया जी का अवतरण। श्री वार्ष्णेय मंदिर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व, धार्मिक आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा । विगत वर्षो की भांति इस वर्ष भी कान्हा के जन्मोत्सव के लिए श्री वार्ष्णेय मंदिर में जबर्दस्त तैयारियां चल रही हैं।

श्री वार्ष्णेय मंदिर के व्यवस्थापक श्री राधेश्याम गुप्ता स्क्रैप वालों ने पत्रकारवार्ता में पत्रकारों को इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुये बताया कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम के लिए सम्पूर्ण मंदिर प्रांगण को सतरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है। मुख्य आकर्षण रहेगें खुद बाल रुप में ठाकुर जी। इस विशेष अवसर पर मथुरा वृंदावन के कारीगरों द्वारा ठाकुर जी समेत सभी विग्रहो की आकर्षक पोशाक तैयार की गयी है ।

मंदिर के परम भक्त श्री विष्णु शेखर गुप्ता के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर अपार भीड़ को सभांलने की विशेष व्यवस्था रहेगी। वाहन पार्किंग हीरालाल बारहसैनी इंटर कॉलेज में रहेगी। वहीं से भक्त वेरीकेटिंग किये गये मार्ग से होते हुए श्री वार्ष्णेय मंदिर पहुँचेगे। श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय के मुख्य गेट के सामने जूता चप्पल जमा करने की व्यवस्था रहेगी। सुरक्षा दृष्टि से प्रशासन के सहयोग के लिए श्री वार्ष्णेय मंदिर सेवा समिति के 100 से भी ज्यादा स्वयंसेवियों को व्यवस्थाएं दी गयी हैं। साथ ही 9 क्लोज सर्किट कैमरा भी लगाए गए हैं। जो चप्पे-चप्पे पर नजर रखेंगे।

व्यवस्था सहयोगी श्री पल्लव गुप्ता और श्री गुलाब चंद्र सुपारी वालों के अनुसार संगीतमयी सतरंगी फव्वारा अपनी शीतलता का आभास कराएगा। अन्नू बीड़ी और कृष्ण कुमार सीटू के अनुसार विजयगढ़ और हाथरस से कई झाकियों की प्रस्तुति होगी।

9:30 AM
मंदिर प्रवक्ता भुवनेश वार्ष्णेय आधुनिक और मंदिर के परम भक्त श्री संजीव वैभव के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम का शुभारम्भ 3 सितम्बर को प्रातः 9:30 बजे लडडू गोपाल जी के दुग्धभिषेक से होगा।
6:00 PM
सांय 6 बजे से ठाकुर जी अपने भक्तों को दर्शन देंगे। रात्रि में 12 बजे श्री कृष्ण के जन्म के समय दुग्धभिषेक होगा तदुपरांत वासुदेव जी कान्हा जी को सूप में रखकर यमुना पार कर नंदबाबा के यहाँ छोड़कर आयेगे। इन दृश्यों को भव्यता देने के लिए विशेष ध्वनियों एवं प्रकाश का आयोजन किया जायेगा। इस लीला को देखने दूर दूर से भक्त श्री वार्ष्णेय मंदिर पहुचेंगे।
» Eighteenth Pataotsav in Shri Varshney Mandir 2018

श्री वार्ष्णेय मंदिर में 18वे पाटोत्सव कार्यक्रम विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी बहुत धूमधाम से मनाया जायेगा। मंदिर व्यवस्थापक राधेश्याम गुप्ता के अनुसार पाटोत्सव कार्यक्रम 28 मार्च बुधवार से 2 अप्रैल सोमवार 2018 तक मनाया जायेगा। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियां चल रही हैं। उक्त जानकारी मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने दी।

28 March 4:00 PM
Kalash Yatra initiated from Shri Dauji Mandir.
29 March 8:00 PM
Maha aarti at evening.
2 April 12:00 PM
Large scale bhandara will started from noon.

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