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भावयामि गोपालबालं (Bhavayami Gopalabalam)


भावयामि गोपालबालं
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भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥
भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥
कटि घटित मेखला खचितमणि घण्टिका-
पटल निनदेन विभ्राजमानम् ।
कुटिल पद घटित सङ्कुल शिञ्जितेनतं
चटुल नटना समुज्ज्वल विलासम् ॥

भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥

निरतकर कलित नवनीतं ब्रह्मादि
सुर निकर भावना शोभित पदम् ।
तिरुवेङ्कटाचल स्थितम् अनुपमं हरिं
परम पुरुषं गोपालबालम् ॥

भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥

भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥
भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥
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