Haanuman Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

श्री श्रीगुर्वष्टक (iskcon Sri Sri Guruvashtak)


श्री श्रीगुर्वष्टक
संसार - दावानल - लीढ - लोक - त्राणाय कारुण्य - घनाघनत्वम् ।
प्राप्तस्य कल्याण - गुणार्णवस्य वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ 1
महाप्रभोः कीर्तन - नृत्य - गीत - वादित्र - माद्यन् - मनसो रसेन ।
रोमांच - कम्पाश्रु - तरंग - भाजो वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ 2
भक्तिभारत मंत्र

श्री - विग्रहाराधन - नित्य - नाना - श्रृंगार - तन् - मन्दिर - मार्जनादौ ।
युक्तस्य भक्तांश्च नियुजतोऽपि वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ 3

चतुर्विध - श्रीभगवत् - प्रसाद - स्वाद्वन्न तृप्तान् हरि - भक्त - संधान ।
कृत्वैव तृप्तिं भजतः सदैव वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ 4

श्रीराधिका - माधवयोरपार - माधुर्य - लीला - गुण - रुप - नाम्नाम् ।
प्रतिक्षणास्वादन - लोलुपस्य वन्द गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ 5

निकुंज - यूनो रति - केलि - सिद्धयै या यालिभिर् युक्तिर् अपेक्षणीया ।
तत्राति - दक्ष्याद् अति - वल्लभस्य वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ 6

साक्षाद - धरित्वेन समस्त शास्त्रर् उक्तस् तथा भाव्यत एवं सद्भिः ।
किन्तु प्रभोर् यः प्रिय एवं तस्य वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ 7

यस्य प्रसादाद् भगवत् प्रसादो यस्या प्रसादान् न गातिः कुतोऽपि ।
ध्यायन् स्तुवंस् तस्य यशस् त्रि - सन्ध्यं वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ 8

- श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर रचित

iskcon Sri Sri Guruvashtak in English

Samsara - Daavanal - Leedh - Loka - Tranaya Karunya - Ghanaghanatvam। Pratapsya Kalyan - Gunarnavasya Vande Guru: Shricharanaravindam॥ 1
यह भी जानें
हिन्दी भावार्थ

श्रीगुरुदेव कृपासिन्धु से आशीर्वादी प्राप्त करते हैं । जिस प्रकार वन में लगी दावाग्नि को शान्त करने हेतु बादल उस पर जल की वर्षा कर देता है , उसी प्रकार श्रीगुरुदेव भौतिक जगत् की धधकती अग्नि को शान्त करके, भौतिक दुःखों से पीड़ित जगत् का उद्धार करते हैं । शुभ गुणों के सागर, ऐसे श्रीगुरुदेव के चरणकमलों में मैं सादर नमस्कार करता हूँ ॥ १

पवित्र नाम का कीर्तन करते हुए, आनन्दविभोर होकर नृत्य करते हुए , गाते हुए तथा वाद्ययन्त्र बजाते हुए , श्रीगुरुदेव सदैव भगवान् श्रीचैतन्य महाप्रभु के संकीर्तन आन्दोलन से हर्षित होते हैं। चूँकि वे अपने मन में विशुद्ध भक्ति के रसों का आस्वादन करते हैं ,अतएव कभी - कभी वे अपनी देह में रोमाञ्च व कम्पन का अनुभव करते हैं तथा उनके नेत्रों में तरंगों के सदृश अश्रुधारा बहती है । ऐसे श्रीगुरुदेव के चरणकमलों में मैं सादर नमस्कार करता हूँ ॥ २

श्रीगुरुदेव सदैव मन्दिर में श्रीराधा - कृष्ण की पूजा में रत रहते हैं। वे अपने शिष्यों को भी ऐसी पूजा में संलग्न करते हैं। वे सुन्दर वस्त्रों तथा आभूषणों से अर्चाविग्रहों का शृंगार करते हैं , उनके मन्दिर का मार्जन करते हैं तथा भगवान् की इसी प्रकार की अन्य अर्चनाएँ भी करते हैं । ऐसे श्रीगुरुदेव के चरणकमलों में मैं सादर नमस्कार करता हूँ ॥ ३

श्रीगुरुदेव सदैव भगवान् श्रीकृष्ण को लेह्य अर्थात् चाटे जाने वाले , चर्व अर्थात् चबाए जाने वाले , पेय अर्थात् पिये जाने वाले , तथा चोष्य अर्थात् चूसे जाने वाले - ये चार प्रकार के स्वादिष्ट भोग अर्पण करते हैं । जब श्रीगुरुदेव यह देखते हैं कि भक्तगण भगवान् का प्रसाद ग्रहण करके तृप्त हो गये हैं, तो वे भी तृप्त हो जाते हैं । ऐसे श्रीगुरुदेव के चरणकमलों में मैं सादर नमस्कार करता हूँ ॥ ४

श्रीगुरुदेव श्री राधा - माधव के गुण, नाम, रूप तथा अनन्त मधुर लीलाओं के विषय में श्रवण व कीर्तन करने के लिए सदैव उत्सुक रहते हैं। वे प्रतिक्षण इनका रसास्वादन करने की आकांक्षा करते हैं। ऐसे श्रीगुरुदेव के चरणकमलों में मैं सादर नमस्कार करता हूँ ॥ ५

श्रीगुरुदेव अति प्रिय हैं, क्योंकि वे वृन्दावन के निकुंजों में श्री श्रीराधा - कृष्ण की माधुर्य - लीलाओं को पूर्णता से सम्पन्न करने के हरिनाम कीर्तन निर्देशिका लिए विभिन्न अवसरों पर विभिन्न प्रकार का आकर्षक आयोजन करती हुई गोपियों की सहायता करने में अत्यन्त निपुण हैं । ऐसे श्रीगुरुदेव के चरणकमलों में मैं सादर नमस्कार करता हूँ ॥ ६

श्री भगवान् के अत्यन्त अन्तरंग सेवक होने के कारण , श्रीगुरुदेव को स्वयं श्री भगवान् ही के समान सम्मानित किया जाना चाहिए । इस बात को सभी प्रमाणित शास्त्रों ने माना है और सारे महाजनों ने इसका पालन किया है । भगवान् श्रीहरि ( श्रीकृष्ण ) के ऐसे प्रमाणित प्रतिनिधि के चरणकमलों में मैं सादर नमस्कार करता हूँ ॥ ७

श्रीगुरुदेव की कृपा से भगवान् श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है । श्रीगुरुदेव की कृपा के बिना कोई प्रगति नहीं कर सकता । अतएव मुझे सदैव श्रीगुरुदेव का स्मरण व गुणगान करना चाहिए । दिन में कम से कम तीन बार मुझे श्रीगुरुदेव के चरणकमलों में सादर नमस्कार करना चाहिए ॥ ८

Mantra Prabhupada MantraPrabhupada Ji MantraISKCON MantraGaudiya MantraHarinam MantraHarnam Kirtan MantraGuru Mantra

अन्य प्रसिद्ध श्री श्रीगुर्वष्टक वीडियो

अगर आपको यह मंत्र पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस मंत्र को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

मंत्र ›

विद्यां ददाति विनयं

अर्थ- विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है...

श्री सरस्वती साष्टाङ्ग-प्रणाम मन्त्र

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः। नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥

श्री महासरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रम्

ध्यानम्: श्रीमच्चन्दनचर्चितोज्ज्वलवपुः शुक्लाम्बरा मल्लिका-मालालालित...

माँ सरस्वती अष्टोत्तर-शतनाम-नामावली

ॐ सरस्वत्यै नमः। ॐ महाभद्रायै नमः। ॐ महामायायै नमः। ॐ वरप्रदायै नमः। ॐ श्रीप्रदायै नमः।...

सरस्वती मंत्र

सरस्वती एकाक्षर मंत्र - ऐं॥, सरस्वती द्वयाक्षर मंत्र - ऐं लृं॥

अगस्त्य सरस्वती स्तोत्रम्

सरस्वती स्तोत्रम सरस्वती माता के स्तोत्रमों में से एक है। इस स्तोत्रम का पाठ देवी सरस्वती से सम्बन्धित विभिन्न अवसरों पर किया जाता है।

श्री सरस्वती स्तोत्रम् वाणी स्तवनं

कृपां कुरु जगन्मातर्मामेवंहततेजसम्। गुरुशापात्स्मृतिभ्रष्टं विद्याहीनंच दुःखितम्

Durga Chalisa - Durga Chalisa
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP