Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

सच्चे मन, लगन से ही लक्ष्य की प्राप्ति - प्रेरक कहानी (Sacche Man Lagan Se Hi Lakshy Ki Prapti)


Add To Favorites Change Font Size
एक बार सूर्यवंशी राजा दिलीप के पुत्र भागीरथ हिमालय पर तपस्या कर रहे थे। वे गंगा को धरती पर लाना चाहते थे। उनके पूर्वज कपिल मुनि के शाप से भस्म हो गये। गंगा ही उनका उद्वार कर सकती थी। भागीरथ अन्न जल छोड़कर तपस्या कर रहे थे।
गंगा उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न हो गई। भागीरथ ने धीरे स्वर में गंगा की आवाज सुनी। महाराज मैं आपकी इच्छानुसार धरती पर आने के लिये तैयार हूँ, लेकिन मेरी तेज धारा को धरती पर रोकेगा कौन। अगर वह रोकी न गई तो धरती के स्तरों को तोड़ती हुई पाताल लोक में चली जायेगी।

भागीरथ ने उपाय पूछा तो गंगा ने कहा, महाराज भागीरथ, मेरी प्रचन्ड धारा को सिर्फ शिव रोक सकते है। यदि वे अपने सिर पर मेरी धारा को रोकने के लिये मान जाये तो मैं पृथ्वी पर आ सकती हूँ। भागीरथ शिव की अराधना में लग गये। तपस्या से प्रसन्न हुए शिव गंगा की धारा को सिर पर रोकने के लिये तैयार हो गये।

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष के दशहरे के दिन जटा खोलकर, कमर पर हाथ रख कर खड़े हुए शिव अपलक नेत्रों से ऊपर आकाश की ओर देखने लगे। गंगा की धार हर हर करती हुई स्वर्ग से शिव के मस्तक पर गिरने लगी। जल की एक भी बूँद पृथ्वी पर नहीं गिर रही थी। सारा पानी जटाओं में समा रहा था।

भागीरथ के प्रार्थना करने पर शिव ने एक जटा निचोड़ कर गंगा के जल को धरती पर गिराया। शिव की जटाओं से निकलने के कारण गंगा का नाम जटाशंकरी पड़ गया।

गंगा के मार्ग में जहृु ऋषि की कुटिया आयी तो धारा ने उसे बहा दिया। क्रोधित हुए मुनि ने योग शक्ति से धारा को रोक दिया। भागीरथ ने प्रार्थना की तो ऋषि ने गंगा को मुक्त कर दिया। अब गंगा का नाम जाहृनवी हो गया।

कपिल मुनि के आश्रम में पहुँचकर गंगा ने भागीरथ के महाराज सगर आदि पूर्वजों का उद्वार किया। वहाँ से गंगा बंगाल की खाड़ी में समाविष्ट हुई, उसे आज गंगासागर कहते है।

अतः सच्चे मन, लगन और एक लक्ष्य के साथ किया गया कार्य हर बाधाओं को तोड़कर सफल होता है एवं हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
यह भी जानें
अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

ठाकुर जी सेवा में अहंकार नहीं विनम्रता रखें - प्रेरक कहानी

कमल किशोर सोने एवं हीरे-जवाहरात बनाने एवं बेचने का काम करता था। उसकी दुकान से बने हुए गहने दूर-दूर तक मशहूर थे।...

कुछ लोग ही कृष्ण की ओर बढ़ते हैं - प्रेरक कहानी

भोजन की गंध पाने पर तालाब से पांच छह बतखें उनके पास आकर पुकारने लगी क्वेक, क्वेक प्रभुपाद ने बड़े स्नेह से उन बतखों को भोजन दिया...

विद्वत्ता पर कभी घमंड न करें - प्रेरक कहानी

महाकवि कालिदास रास्ते में थे। प्यास लगी। वहां एक पनिहारिन पानी भर रही थी।
कालिदास बोले: माते! पानी पिला दीजिए बङा पुण्य होगा।

मृत्यु से भय कैसा? - प्रेरक कहानी

राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण सुनातें हुए जब शुकदेव जी महाराज को छह दिन बीत गए और तक्षक (सर्प) के काटने से मृत्यु होने का एक दिन शेष रह गया..

बुरे विचारों से बचने के उपाय - प्रेरक कहानी

एक दिन आचानक किसी संत से उसका सम्पर्क हुआ। वह संत से उक्त अशुभ विचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगा...

ऐसे ही होने चाहिए गुरु - प्रेरक कहानी

वह उनके चरण स्पर्श कर अपना परिचय देता है। वे बड़े प्यार से पुछती है, अरे वाह, आप मेरे विद्यार्थी रहे है, अभी क्या करते हो, क्या बन गए हो?

शुभचिन्तक की अज्ञानवस भी उपेक्षा न करें - प्रेरक कहानी

सच्चे शुभचिन्तक की अज्ञानवस भी उपेक्षा न करें - एक कुम्हार को मिट्टी खोदते हुए अचानक एक हीरा मिल गया, उसने उसे अपने गधे के गले में बांध दिया...

Ram Bhajan - Ram Bhajan
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP