श्री जगन्नाथ आरती - चतुर्भुज जगन्नाथ
चतुर्भुज जगन्नाथ, कंठ शोभित कौसतुभः ॥ पद्मनाभ, बेडगरवहस्य, चन्द्र सूरज्या बिलोचनः
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जय श्री देव हरे, स्वामी जय श्री देव हरे । जनम जनम के पातक, क्षण में दूर करे ॥
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ॐ जय गंगे माता श्री जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता मनवांछित फल पाता॥ हर हर गंगे, जय माँ गंगे...
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जय देवी जय देवी तुळजा अंबाई । चंड मुंड वधुनिया महिषासुर वधुनिया । ठेविलासे तुझे पायी ॥
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शंकराची आरती – जय जय त्र्यंबकराज
जय जय त्र्यंबकराज गिरिजानाथा गंगाधरा हो ॥ त्रिशूलपाणी शंभो नीलग्रीवा शशिशेखरा हो ॥ वृषभारूढ फणिभुषण दशभुज पंचानन शंकरा हो ॥ विभूतिमाला जटा सुंदर गजचर्मांबरधरा हो ॥
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आरती: श्री गणेश - शेंदुर लाल चढ़ायो
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको। दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको।...
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आरती (Aarti, Arti, arati) is a special love, benevolence and gratitude songs which is the part of puja ritual with ghee or oil deepak (lamp). , divine elements or Guru (spiritual teacher). Bhakti Bharat updates you 71+ aarti lyrics.