बजे ढोल शहनाई बैंड बाजा, आया आया है दिल्ली का राजा
सजा स्वागत को सुंदर ये दरबार
है दिल्ली के राजा का ये त्योहार
है स्वर्ण सिंघासन सोहे महाराजा,
आया आया----
मंगल मूरत से आनंद बरस रहा
कर दर्शन हर मन हर्ष रहा
गणपत दर्श चारो फल दाता,
आया आया----
मधुप सकल सुमंगल साज रहे
साज़ बाज रहे सब नाच रहे
हर तरफ जयकार यही गाजा,
आया आया----
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