Shri Ram Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

वेदसारशिवस्तोत्रम् (Vedsara Shiv Stotram)


वेदसारशिवस्तोत्रम्
पशूनां पतिं पापनाशं परेशं,
गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम् ।
जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं,
महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम् ॥
महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं,
विभुं विश्र्वनाथम् विभूत्यङ्गभूषम् ।
विरुपाक्षमिन्द्वर्कवह्निनेत्रं,
सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम् ॥

गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं,
गवेन्द्राधिरूढम् गुणातीतरूपम् ।
भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गम्,
भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम् ॥

शिवाकान्त शम्भो शशाङ्कार्धमौले,
महेशान शूलिन् जटाजूटधारिन् ।
त्वमेको जगद्व्यापको विश्र्वरूप:,
प्रसीद प्रसीद प्रभो पूर्णरूपम् ॥

परात्मानमेकं जगद्बीजमाद्यं,
निरीहं निराकारं ओम्कारवेद्यम् ।
यतो जायते पाल्यते येन विश्र्वम्,
तमीशं भजे लीयते यत्र विश्र्वम् ॥

न भूमिर्न चापो न वह्निर्न वायु,
र्न चाकाशमास्ते न तन्द्रा न निद्रा ।
न चोष्णं न शीतं न देशो न वेषो,
न यस्यास्ति मूर्तिस्त्रिमूर्तिं तमीडे ॥

अजं शाश्र्वतम् कारणं कारणानां,
शिवं केवलं भासकं भासकानाम् ।
तुरीयं तमः पारमाद्यन्तहीनम्,
प्रपद्ये परम् पावनं द्वैतहीनम् ॥

नमस्ते नमस्ते विभो विश्र्वमूर्ते,
नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते ।
नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य,
नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्य ॥

प्रभो शूलपाणे विभो,
विश्र्वनाथ-महादेव शम्भो महेश त्रिनेत्र ।
शिवाकन्त शान्त स्मरारे पुरारे,
त्वदन्यो वरेण्यो न मान्यो न गण्यः ॥

शम्भो महेश करुणामय शूलपाणे,
गौरीपते पशुपते पशुपाशनाशिन् ।
काशीपते करुणया जगदेतदेक,
स्त्वं हंसि पासि विदधासि महेश्र्वरोऽसि ॥

त्वत्तो जगद्भवति देव भव स्मरारे,
त्वय्येव तिष्ठति जगन्मृड विश्र्वनाथ ।
त्वय्येव गच्छति लयं जगदेतदीश,
लिङ्गात्मके हर चराचरविश्र्वरूपिन् ॥

श्री शङ्कराचार्य कृतं!

Vedsara Shiv Stotram in English

Pashunam Patim Papanasham Paresham, Gajendrasya Kruttim Vasanam Varenyam...
यह भी जानें

Mantra Shiv MantraBholenath MantraMahadev MantraShivaratri MantraSavan Ke Somvar MantraMonday MantraSomwar MantraSomvati Amavasya Mantra

अगर आपको यह मंत्र पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस मंत्र को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

मंत्र ›

श्री जगन्नाथ अष्टकम

कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो, मुदाभीरी नारी वदन कमला स्वाद मधुपः, रमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदो..

श्री जगन्नाथ यात्रा के राशि मंत्र

श्री जगन्नाथ यात्रा के सामने बोलें अपना राशि मंत्र।

श्रीजगन्नाथ सहस्रनाम स्तोत्रम

देवदानवगन्धर्वयक्षविद्याधारोर्गैः। सेव्यमानं सदा चारुकोटिसूर्यसमाप्रभम् ॥ 1॥

प्रज्ञानं ब्रह्म महावाक्य

प्रज्ञानं ब्रह्म जिसका शाब्दिक अर्थ है ज्ञान ही ब्रह्म है। यह भारत के पुरातन हिंदू शास्त्र 'ऋग्वेद' का 'महावाक्य' है...

पूर्णब्रह्म स्तोत्रम्

पूर्णचन्द्रमुखं निलेन्दु रूपम् , उद्भाषितं देवं दिव्यं स्वरूपम्, पूर्णं त्वं स्वर्णं त्वं वर्णं त्वं देवम् , पिता माता बंधु त्वमेव सर्वम्, जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम्, जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥ १ ॥

श्री जगन्नाथ प्रातः स्मरण स्तोत्रम्

नीलाम्बुद-श्यामल-कान्ति-कान्तं, नीलाम्बुधेर्नीलगिरौ बसन्तम् । लीलामयं नील-सरोज नेत्रं, देवं जगन्नाथमहं स्मरामि ॥ संसार-धातारमनन्त-रूपं, वेदान्त-वेद्यं हृत-पाप-तापम् ।

आदित्य-हृदय स्तोत्र

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्टवा युद्धाय समुपस्थितम् ॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् ।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP