हरि कर दीपक, बजावें संख सुरपति - आरती (Hari Kar Deepak Bajave Shankh Surpati)


हरि कर दीपक,
बजावें संख सुरपति,
गनपति झाँझ,
भैरों झालर झरत हैं ।
नारदके कर बीन,
सारदा गावत जस,
चारिमुख चारि वेद,
बिधि उचरत हैं ॥
षटमुख रटत,
ससहस्रमुख सिव सिव,
सनक-सनंदनादि,
पाँयन परत हैं ।
बालकृष्ण तीनि लोक,
तीस और तीनि कोटि,
एते शिवशंकरकी,
आरति करत हैं ॥
Hari Kar Deepak Bajave Shankh Surpati - Read in English
Hari Kar Deepak, Bajaaven Sankh Surpati, Ganpati Jhaanjh, Bhairon Jhaalar Jharat Hain ।
Bhajan Shri Shiv BhajanBholenath BhajanMahadev BhajanShiv BhajanBholenath BhajanMahadev BhajanShivaratri BhajanSavan BhajanMonday BhajanSomvar BhajanSolah Somvar BhajanShiva Shankaraki Aarti Bhajan
अगर आपको यह भजन पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!


* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

नवीनतम भजन ›

शिव स्तुति: आशुतोष शशाँक शेखर

आशुतोष शशाँक शेखर, चन्द्र मौली चिदंबरा, कोटि कोटि प्रणाम शम्भू..

ॐ मंगलम ओमकार मंगलम - शिव धुन

ॐ मंगलम ओमकार मंगलम, ॐ मंगलम ओमकार मंगलम, सोम मंगलम सारधार मंगलम

तेरे दरबार मे मैया खुशी मिलती है - भजन

तेरी छाया मे, तेरे चरणों मे, मगन हो बैठूं, तेरे भक्तो मे॥ तेरे दरबार मे मैया खुशी मिलती है...

लाखो के दुःख लिए हर दातिए - भजन

लाखो के दुःख लिए हर दातिए, झोलियाँ गरीबों की भी भर दातिए, सबको दिए खुशियों के वर दातिए, सबको दिए खुशियों के वर दातिए, झोलियाँ गरीबों की भी भर दातिए ॥

मेरा दिल अटका तेरी मूरत पे - भजन

मिलने को, मिलने को तड़पड़े मैय्या से, रहती फिर माँ को सबर नही, मेरा दिल अटका तेरी मूरत पे, मुझको तो किसी की खबर नही ॥