जगन्नाथ स्वामी हैं अंतर्यामी हैं
जग के पालन हार
बोलो जय जय जय जगन्नाथ
नीलांचल पर्वत पर तेरा सुंदर सा दरबार
जो भी देखे तेरी छवि को हो जाए बलिहार
डरपे बुलाता हे संकट मिटाता है सबके बारंबार
बोलो जय जय जय जगन्नाथ
भक्तिभारत लिरिक्स
रूप निराला सबसे प्यारा चका नैन हैं प्यारे
एक बार जो दर्शन करले मिट जायें दुख सारे
हम भी पुकारे ओर तुम भी पुकारो सब नाम को बारंबार
बोलो जय जय जय जगन्नाथ...
रथ की शोभा कितनी न्यारी देखे दुनिया सारी
तेरे संग बलभद्र बिराजे और सुभद्रा प्यारी
डरपे बुलाता हे संकट मिटाता है सबके बारंबार
बोलो जय जय जय जगन्नाथ