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आण्डाल (Andal)


भक्तमाल | आण्डाल
असली नाम – कोथाई
दूसरा नाम – नाचियार
गुरु - विष्णुचित्तन
आराध्य - श्री कृष्ण
जन्म - 785 ईस्वी, तमिल महीने 'आदि' में पूरम नक्षत्र
जन्म स्थान - श्रीविल्लिपुत्तूर, पांड्य राज्य, तमिलकम
वैवाहिक स्थिति: विवाहित
जीवनसाथी - रंगमन्नार
पिता - पेरियालवार
मंदिर - श्रीविल्लिपुत्तूर आण्डाल मंदिर
आण्डाल दक्षिण भारत के बारह आलवारों (सम्मानित वैष्णव कवि-संतों) में एकमात्र महिला थीं। उन्हें भगवान विष्णु के प्रति अपनी गहरी भक्ति के लिए जाना जाता है और वे भक्ति परंपरा की सबसे प्रिय संतों में से एक हैं।

परंपरा के अनुसार, संत पेरियालवार को श्रीविल्लिपुत्तूर में तुलसी के बगीचे में एक शिशु के रूप में आण्डाल मिली थीं; उन्होंने ही उन्हें गोद लिया और पाला-पोसा। उनका नाम कोधाई (गोदा) रखा गया। छोटी उम्र में ही उनमें भगवान विष्णु के प्रति गहरी भक्ति जाग गई थी। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, भगवान को अर्पित किए जाने से पहले वे उनके लिए तैयार की गई फूलों की मालाओं को खुद पहनती थीं। जब इस बात का पता चला, तो माना जाता है कि विष्णु ने कहा कि उन्हें आण्डाल द्वारा पहनी गई मालाएँ ही पसंद हैं; इसी वजह से उन्हें "सूडी कोडुथा सुदारकोडी" ("वह तेजस्वी जिसने पहले माला पहनी और फिर अर्पित की") की उपाधि मिली। रामलिंग स्वामीगल के बारे में पढ़ें।

आण्डाल का साहित्यिक योगदान
❀तिरुप्पावई: इसमें 30 भक्तिपूर्ण पद हैं।
❀ इसका पाठ विशेष रूप से तमिल महीने 'मार्गाझी' (दिसंबर-जनवरी) के दौरान किया जाता है।
❀ यह भक्ति, समर्पण और भगवान कृष्ण की कृपा पर केंद्रित है।
❀ नाचियार तिरुमोली: इसमें 143 पद हैं।
❀ इसमें भगवान विष्णु के साथ मिलन के लिए आण्डाल की तड़प व्यक्त की गई है।
❀ इसे तमिल भक्ति साहित्य की उत्कृष्ट कृति माना जाता है।

आण्डाल का आध्यात्मिक महत्व
❀ उन्हें भगवान विष्णु की पत्नी भूदेवी का अवतार माना जाता है।
❀ वे पूर्ण समर्पण (प्रपत्ति) और दिव्य प्रेम का प्रतीक हैं।
❀ उनकी शिक्षाएँ पूरे भारत और दुनिया भर के भक्तों को प्रेरित करती रहती हैं।

तमिलनाडु का मशहूर श्रीविल्लिपुत्तूर अंदल मंदिर, अंडाल और भगवान वटपत्रशायी को समर्पित है। इसका ऊँचा गोपुरम इतना खास है कि यह तमिलनाडु सरकार के आधिकारिक चिह्न पर भी दिखाई देता है। वे तमिल भक्ति साहित्य और वैष्णव धर्म की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक हैं।

Andal in English

Andal is the only female among the twelve Alvars, the revered Vaishnava poet-saints of South India. She is celebrated for her intense devotion to Bhagwan Vishnu and is one of the most beloved saints in the Bhakti tradition.
यह भी जानें

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