भक्तमाल | बलराम दास
असली नाम: कृपासिद्ध बलराम दास
गुरु: हृदयानंद
आराध्य: भगवान जगन्नाथ
जन्म: 1472
जन्म स्थान: पुरी, ओडिशा, भारत
मृत्यु: 1556
वैवाहिक स्थिति: अविवाहित
पिता: सोमनाथ महापात्र
माता: जमुना देवी
प्रसिद्धि: कवि, संत
प्रमुख रचनाएँ - जगमोहन रामायण,
लक्ष्मी पुराणबलराम दास (लगभग 1472–1540) ओडिशा के महानतम संत-कवियों में से एक थे और ओडिया साहित्य के सम्मानित 'पंचसखा' (पाँच मित्र) समूह में सबसे बड़े थे। उन्होंने ओडिया भाषा के माध्यम से पवित्र हिंदू धर्मग्रंथों को आम लोगों तक पहुँचाकर भक्ति आंदोलन को फैलाने में अहम भूमिका निभाई।
भगवान जगन्नाथ के परम भक्त बलराम दास ने अपना जीवन भक्ति, साहित्य और आध्यात्मिक सुधार के लिए समर्पित कर दिया। उनके साहित्यिक योगदान ने ओडिया भक्ति साहित्य का कायाकल्प कर दिया।
भक्त सालबेग के बारे में पढ़ें।
समाज में बलराम दास का योगदान
❀ संस्कृत के बजाय ओडिया में लिखकर पवित्र धर्मग्रंथों को आम लोगों के लिए समझने योग्य बनाया।
❀ जाति-भेद और कर्मकांड-आधारित भेदभाव का विरोध किया।
❀ सामाजिक स्थिति और जन्म के बजाय भक्ति को बढ़ावा दिया।
❀ ओडिया को एक प्रमुख साहित्यिक भाषा के रूप में स्थापित करने में मदद की।
उन्होंने 'लक्ष्मी पुराण' लिखा; यह कहानी इस बात पर ज़ोर देती है कि देवी लक्ष्मी सच्ची भक्ति पर आशीर्वाद देती हैं, चाहे व्यक्ति की जाति या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो।
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