रुद्राक्ष हिंदू धर्म में पारंपरिक रूप से प्रयुक्त एक पवित्र बीज है, जिसका विशेष संबंध भगवान शिव से है। रुद्राक्ष शब्द दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है: रुद्र - भगवान शिव का एक नाम और अक्ष - जिसका अर्थ है आंसू।
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हिंदू धर्म में सिंदूर का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में, सिंदूर एक पवित्र लाल या नारंगी-लाल रंग का पाउडर है जिसे पारंपरिक रूप से विवाहित हिंदू महिलाएं अपनी मांग में लगाती हैं। इसका गहरा आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व है।
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अभिजीत मुहूर्त दोपहर के समय का शुभ मुहूर्त है जो लगभग 48 मिनट तक रहता है। अभिजीत मुहूर्त असंख्य दोषों को नष्ट करने में सक्षम है और सभी प्रकार के शुभ कार्यों को शुरू करने के लिए इसे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक माना जाता है।
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चुनाव में मंदिर, मठ एवं आश्रमों का महत्व
माना जाता है कि सनातन प्रेमी हर चुनाव में जीत का एक निर्णायक पहलू होते हैं। और इन सनातन प्रेमियों(सनातन प्रेमी वोटर) का केंद्र होते हैं ये मंदिर, मठ एवं आश्रम। राजनीतिक उम्मीदवारों की जीत संख्याबल पर निर्धारित होती है। अतः चुनाव आते ही राजनैतिक उम्मीदवार हिंदू मंदिरों, मठों एवं आश्रमों की तरफ स्वतः ही खिचे चले आते हैं।
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वेदों में ब्रह्म मुहूर्त को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि ब्रह्म मुहूर्त में निद्रा त्यागने से विद्या, बुद्दि, स्वास्थ्य और बल प्राप्त होते हैं। किसी भी काम ब्रह्म मुहूर्त में शुरू करना बहुत उत्तम माना गया है।
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मंडला पूजा, शास्त्रों में निर्धारित सभी तपस्या और दिनचर्या के साथ 41 दिनों की लंबी अवधि पूरे कठोर रीती रिवाज़ के साथ पालन किया जाने वाला अनुष्ठान है।
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हिंदू परंपरा में गोत्र का महत्व
गोत्र हिंदू परंपरा की एक अवधारणा है जो किसी व्यक्ति के पैतृक वंश या कुल को संदर्भित करती है, जिसे आमतौर पर पुरुष वंश (पिता → दादा → परदादा, इत्यादि) के माध्यम से खोजा जाता है।
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हिन्दू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। पूजा के माध्यम से लोग भगवान के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं और परिणामस्वरूप उनकी मनोकामना पूरी होती है। लोग दिन के अनुसार प्रत्येक भगवान की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा भगवान के प्रति समर्पण दिखाने के लिए की जाती है और इसके बाद आरती की रस्म होती है।
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आइए जानें! जैन धर्म से जुड़ी कुछ जानकारियाँ, प्रसिद्ध भजन एवं सम्वन्धित अन्य प्रेरक तथ्य..
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पूजा घर में जल रखना क्यों आवश्यक है?
हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसी कई बातें लिखी गई हैं जिनका हम सदियों से पालन करते आ रहे हैं। इन्हीं में से एक है पूजा के स्थान पर जल रखने की अनिवार्यता। पूजा घर में किसी अन्य वस्तु के साथ एक पात्र में जल भी रखें।
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कितना खर्चा आयेगा ईशा योग केंद्र जाने के लिए ?
चेन्नई और बंगलौर से लगभग ₹6000 से ₹10000 लागत के साथ आप आदियोगी महाशिवरात्रि की अद्भुत रात देख सकते हैं।
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विक्रम संवत क्या है? इसकी गणना कैसे की जाती है?
विक्रम संवत (वीएस) एक कैलेंडर युग है जिसका उपयोग भारत, नेपाल और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में किया जाता है। इसका नाम उज्जैन के महान राजा विक्रमादित्य के नाम पर रखा गया है। वीएस कैलेंडर चंद्र-सौर है, जिसका अर्थ है कि यह चंद्रमा और सूर्य के चक्र पर आधारित है। वीएस कैलेंडर का पहला वर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर में 57 ईसा पूर्व के बराबर है।
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बांके बिहारी मंदिर में घंटियाँ क्यों नहीं हैं?
उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर कई मायनों में अनोखा है, और इसकी सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में से एक यह है कि मंदिर में घंटियाँ नहीं हैं।
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जैन धर्म में जैन ध्वज महत्वपूर्ण है और इसके अनुयायियों के लिए एकता के प्रतीक के रूप में कार्य करता है। विभिन्न समारोहों के दौरान जैन ध्वज मंदिर के मुख्य शिखर के ऊपर फहराया जाता है।
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