Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

चुनाव में मंदिर, मठ एवं आश्रमों का महत्व (Significance of temples and Ashram in election)

चुनाव में मंदिर, मठ एवं आश्रमों का महत्व
माना जाता है कि सनातन प्रेमी हर चुनाव में जीत का एक निर्णायक पहलू होते हैं। और इन सनातन प्रेमियों(सनातन प्रेमी वोटर) का केंद्र होते हैं ये मंदिर, मठ एवं आश्रम। राजनीतिक उम्मीदवारों की जीत संख्याबल पर निर्धारित होती है। अतः चुनाव आते ही राजनैतिक उम्मीदवार हिंदू मंदिरों, मठों एवं आश्रमों की तरफ स्वतः ही खिचे चले आते हैं।
उम्मीदवारों को धार्मिक स्थलों की और आकर्षण के कुछ मुख्य कारण यह भी हैं
1) मॉस वोटर्स का एक साथ उनकी तरफ आसानी से झुकाव होने की संभावना।
2) अथवा कभी-कभी उम्मीदवार की अपनी धार्मिक आस्था भी इसका कारण होती है।
3) अपने विरोधी से अधिक धर्मनिष्ठ दिखने अथवा सामाजिक होने का संदेश वोटर तक पहुँचना।

ऐसा माना जाता है कि भाजपा के उदय में अयोध्या के राम मंदिर का चुनावी मुद्दा होना सबसे बड़ा कारण था। अब भाजपा की ही तर्ज पर अन्य दल भी बिल्कुल ताल से ताल मिलाकर डटे हुए हैं। विभिन्न हिंदू मंदिरों में पूजा करने के लिए श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अचानक से भक्ति यात्राएं शुरू कर दी हैं। माननीय श्री अखिलेश यादव भी खुद को एक धर्मनिष्ठ हिंदू के रूप में प्रस्तुत करने मे लगे हुए हैं। यह हाल गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य चुनावी राज्यों में समान रूप से देखा जा सकता है।

इन चुनाव प्रचारों में ये भी देखा गया है कि इन धार्मिक यात्राओं और कार्यक्रमों को व्यापक रूप से प्रचारित भी किया जाता है, जिससे उस खास मान्यता वाले वोटर को राजनीतिक उम्मीदवार भी अपने जैसा ही धर्मनिष्ठ प्रतीत होने लगता है। और उसका झुकाव उम्मीदवार की ओर स्वतः ही बढ़ने लगता है।

इसे सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र के व्यापक हिंदुकरण के लिए एक स्मार्ट राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में भी पढ़ा जा सकता है।

भक्ति भारत का मानना है - भारत, जहां हिंदू पहचान के लिए किसी राजनीतिक शक्ति की आवश्यकता नहीं है और मंदिर किसी भी चुनाव अभियान को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख स्थान नहीं हैं। धर्मनिरपेक्षता की वेदी पर पूजा करते हुए आम जनता की सेवा करना चुनावी आह्वान होना चाहिए।

Significance of temples and Ashram in election in English

It is believed that Sanatan lovers are a decisive factor in victory in every election. And these temples, monasteries and ashrams are the center of these Sanatan lovers. The victory of political candidates is determined by numbers. Therefore, as soon as elections come, political candidates are automatically drawn to Hindu temples, monasteries and ashrams.
यह भी जानें

Blogs Elections BlogsUP Elections BlogsMandir And Elections BlogsVote BlogsPolitics BlogsCongress BlogsElectionday BlogsDemocracy BlogsBjp BlogsVoting BlogsNarendramodi BlogsYogi Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

भारतीय ऋतुएँ

सभी ऋतुओं की बात करें तो एक वर्ष में कुल छह ऋतुएँ होती हैं। इस मामले में, प्रत्येक मौसम की अवधि दो महीने है।

देवघर के आस-पास घूमने की सबसे अच्छी जगह

अगर आप देवघर जाने की योजना बना रहे हैं तो बाबा बैद्यनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा आप देवघर में और भी बहुत कुछ देख सकते हैं। शिवगंगा | त्रिकूट पर्वत | नंदन पहाड़ी | सत्संग आश्रम | नौलखा मंदिर | तपोवन | रिखियापीठ आश्रम | हरिला जोरिक | श्रीनिवास आंगन | देवसंगा मठ

ग्रह वक्री क्या है?

"ग्रह वक्री" वैदिक ज्योतिष (ज्योतिष शास्त्र) में प्रयुक्त एक शब्द है।

चैत्र नवरात्रि विशेष 2026

हिंदू पंचांग के प्रथम माह चैत्र मे, नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि पर्व में व्रत, जप, पूजा, भंडारे, जागरण आदि में माँ के भक्त बड़े ही उत्साह से भाग लेते है। Navratri Dates 19th March 2026 and ends on 27th April 2026

चैत्र नवरात्रि 2026 व्रत के आहार और लाभ

नवरात्रि का पवित्र पर्व मां दुर्गा को समर्पित है। यह हिन्दू धर्म का बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। चैत्र नवरात्रि 2026, 19 मार्च से शुरू हो रहा है और 27 मार्च तक चलेगा। अगर आप नवरात्रि में पूरे 9 दिनों का उपवास करने की सोच रहे हैं, तो यहां कुछ स्नैक्स, फल और खाने की चीजें हैं जिनका सेवन आप नवरात्रि के दौरान कर सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?

शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी जो पूर्णिमा के बाद आती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।

वृन्दावन होली कैलेंडर

होली का त्योहार देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन कान्हा की नगरी मथुरा में रंगों का यह त्योहार 40 दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत वसंत पंचमी के दिन से होती है।

Shiv Bhajan - Shiv Bhajan
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP