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कार्तिक मास 2025 (Kartik Maas 2025)

कार्तिक मास हिंदू कैलेंडर का आठवां महीना है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अक्टूबर और नवंबर में आता है। भारत के राष्ट्रीय नागरिक कैलेंडर में, कार्तिक वर्ष का आठवां महीना है। कार्तिक मास या दामोदर मास हिंदू कैलेंडर में बहुत आध्यात्मिक महत्व रखता है। हिन्दू धर्म मैं कार्तिक मा सबसे पवित्र महीना माना जाने वाला महीना है।

Kartik Maas 2025 in English

Kartik Maas is the eighth month of the Hindu calendar, which falls in October and November of the Gregorian calendar. In India's national civil calendar, Kartika is the eighth month of the year.
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मंडला पूजा क्या है?

मंडला पूजा, शास्त्रों में निर्धारित सभी तपस्या और दिनचर्या के साथ 41 दिनों की लंबी अवधि पूरे कठोर रीती रिवाज़ के साथ पालन किया जाने वाला अनुष्ठान है।

साध्वी का क्या अर्थ है?

साध्वी एक संस्कृत शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है "गुणी महिला" और उन महिलाओं को संदर्भित करता है जिन्होंने अपनी संसार का मोह को त्याग दिया है और आध्यात्मिक जीवन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समाज से अलग रहना चुना है। उनका जीवन भगवान के प्रति समर्पण और समाज के लिए सेवा का एक उल्लेखनीय संयोजन है। साध्वी मानते ​​है कि “मानवता की सेवा भगवान की सेवा है” और अपने जीवन भगवान के प्रति समर्पण करलेते हैं।

शकुनि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ..

शकुनि के पिता, माता, पत्नी, बेटे का क्या नाम था? युद्ध में सहदेव ने वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए शकुनि और उलूक को घायल कर दिया और देखते ही देखते उलूक का वध दिया।

भारतीय ऋतुएँ

सभी ऋतुओं की बात करें तो एक वर्ष में कुल छह ऋतुएँ होती हैं। इस मामले में, प्रत्येक मौसम की अवधि दो महीने है।

हिंदू परंपरा में गोत्र का महत्व

गोत्र हिंदू परंपरा की एक अवधारणा है जो किसी व्यक्ति के पैतृक वंश या कुल को संदर्भित करती है, जिसे आमतौर पर पुरुष वंश (पिता → दादा → परदादा, इत्यादि) के माध्यम से खोजा जाता है।

पूजा और आरती में अंतर

हिन्दू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। पूजा के माध्यम से लोग भगवान के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं और परिणामस्वरूप उनकी मनोकामना पूरी होती है। लोग दिन के अनुसार प्रत्येक भगवान की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा भगवान के प्रति समर्पण दिखाने के लिए की जाती है और इसके बाद आरती की रस्म होती है।

महाकुंभ में प्रसिद्ध अखाड़े

महाकुंभ की शान हैं अखाड़े। महाकुंभ में अखाड़े केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। तपस्वियों, संतों और आध्यात्मिक अभ्यासकर्ताओं से बने ये समूह भारत की आध्यात्मिक परंपराओं में गहराई से निहित हैं।

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