Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

नवपत्रिका पूजा नवरात्रि 2025 (Navapatrika Puja in Navratri 2025)

नवरात्रि के सातवें दिन नवपत्रिका पूजन का विधान है। महासप्तमी की शुरुआत नवपत्रिका की पूजा से की जाती है। नवपत्रिका पूजा को भगवान गणेश की पत्नी माना जाता है और उनकी भी पूजा की जाती है।
नवपत्रिका पूजा की विधि:
नवपत्रिका पूजा में नौ पौधों के पत्ते हल्दी, जौ, बेल के पत्ते, अनार, अशोक, अरुम, केला, कच्छवी और धान के पत्तों को मिलाकर बनाए गए गुच्छे की पूजा की जाती है। इन नौ पत्तों को मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है। इन नौ पत्तों को सूर्योदय से पहले पवित्र जल में स्नान कराया जाता है जिसे महास्नान कहा जाता है। इसके बाद पूजा पंडाल में नवपत्रिका रखी जाती है। इस पूजा को पश्चिम बंगाल में कल्लाबोऊ पूजा भी कहा जाता है।

अनुष्ठान के दौरान इन नौ पत्तों को मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है। केले के पत्तों को ब्राह्मणी का प्रतीक माना जाता है, जबकि अरवी के पत्तों को मां काली का प्रतीक माना जाता है। इसी प्रकार हल्दी के पत्ते देवी दुर्गा, जौ देवी कार्तिकी के पत्ते, देवी रक्तदंतिका के लिए अनार के पत्ते, देवी सोकरहित के लिए अशोक के पत्ते, अरुम का पौधा मां चामुंडा का प्रतीक है और धान की पत्तियों को देवी लक्ष्मी के प्रतीक के रूप में। नवपत्रिका में प्रयुक्त बेल पत्र भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है।

नवपत्रिका पूजा महत्व:
माना जाता है कि नवरात्री में नवपत्रिका की पूजा करने से अच्छी उपज मिलती है। इसलिए किसान नवपत्रिका की पूजा करते हैं।

Navapatrika Puja in Navratri 2025 in English

On the seventh day of Navratri, there is a ritual to worship Nava Patrika.
यह भी जानें

Blogs Navpatrika Puja BlogsKalabou Puja Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

पुरी जगन्नाथ के गुंडिचा रानी और नाकचणा कथा

श्रीगुंडिचा मंदिर की दीवार के सामने दो द्वार हैं। एक 'सिंहद्वार' और दूसरा 'नाकचणा द्वार'। 'श्रीगुंडिचायात्रा' के दिन मंदिर के सिंहद्वार से तीन रथ निकलते हैं और गुंडिचा मंदिर के सिंहद्वार की ओर बढ़ते हैं।

ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

यह एकादशी तिथियाँ केवल वैष्णव सम्प्रदाय इस्कॉन के अनुयायियों के लिए मान्य है | ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

माता गंगा की मूर्ति पूजा क्यों वर्जित है जबकि गंगा जल शुभ है?

गंगाजल को हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है। इसलिए इसे घर में रखने की सलाह दी जाती है, लेकिन फिर मां गंगा की मूर्ति को घर में रखने की मनाही क्यों है। माता गंगा को हिन्दू धर्म में पवित्र, पूजनीय और माता माना गया है। इसलिए गंगा स्नान से लेकर घर में गंगाजल रखने तक को महत्वपूर्ण और लाभकारी बताया गया है।

वसंत पंचमी वसंत ऋतु के बजाय शिशिर ऋतु में क्यों आती है?

वसंत पंचमी शिशिर ऋतु में इसलिए मनाई जाती है क्योंकि यह वसंत के आने की शुरुआत का जश्न है, न कि पूरे वसंत मौसम का।

पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के तीन रथ

रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा का वार्षिक रथ उत्सव है। वे तीन अलग-अलग रथों पर यात्रा करते हैं और लाखों लोग रथ खींचने के लिए इकट्ठा होते हैं।

ग्रीष्म संक्रांति | जून संक्रांति

ग्रीष्म संक्रांति तब होती है जब पृथ्वी का सूर्य की ओर झुकाव अधिकतम होता है। इसलिए, ग्रीष्म संक्रांति के दिन, सूर्य दोपहर की स्थिति के साथ अपनी उच्चतम ऊंचाई पर दिखाई देता है ।

विभुवन संकष्टी चतुर्थी

विभुवन संकष्टी चतुर्थी एक हिंदू त्योहार है जो हर साल भाद्रपद महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। शास्त्रों में विभुवन संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व बताया गया है। यह त्योहार भगवान गणेश की पूजा करने का दिन है। ये व्रत 3 साल में एक बार आता है।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP