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✨रुक्मिणी हरण एकादशी - Rukmini Haran Ekadashi

Rukmini Haran Ekadashi Date: Sunday, 13 June 2027
रुक्मिणी हरण एकादशी

रुक्मिणी हरण एकादशी, पुरी जगन्नाथ मंदिर में मनाए जाने वाले अहम सालाना त्योहारों में से एक है। यह ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, जो निर्जला एकादशी के दिन ही पड़ती है। यह त्योहार रुक्मिणी और कृष्ण के दिव्य अपहरण और उसके बाद हुए विवाह की याद में मनाया जाता है।

जय जय जगन्नाथ सुर्यवंश समुद्भव,
रुक्मिणीपति देवेश शेषछत्र सुशोभितः ।
आंजनेय प्रियः शान्तः रामरूपी सुवन्दितः,
कुर्वन्तु मंगलं क्षेत्रे भक्तानां प्रियवादिनां ॥

रुक्मिणी हरण एकादशी की मुख्य रस्में
❀ मदन मोहन का शाही पहनावा: भगवान जगन्नाथ की प्रतिनिधि मूर्ति, श्री मदन मोहन को भगवान कृष्ण के रूप में शाही योद्धा के कपड़ों में खूबसूरती से सजाया जाता है।
❀ रुक्मिणी की तैयारी: रुक्मिणी का प्रतिनिधित्व करने वाली देवी लक्ष्मी को पंचामृत से स्नान कराया जाता है, गहनों से सजाया जाता है और दुल्हन की तरह तैयार किया जाता है।
❀ प्रेम पत्र की रस्म: शास्त्रों की घटना को याद करते हुए, रुक्मिणी की ओर से कृष्ण को एक प्रतीकात्मक पत्र लिखा जाता है और उन्हें अर्पित किया जाता है।
❀ रुक्मिणी हरण (अपहरण): एक नाटकीय प्रस्तुति में दिखाया जाता है कि कैसे भगवान कृष्ण, शिशुपाल के साथ होने वाले विवाह से पहले रुक्मिणी को ले जाते हैं।
❀ शिशुपाल पर विजय: शिशुपाल की प्रतीकात्मक हार का मंचन किया जाता है, जो दिव्य प्रेम और धर्म की जीत का प्रतीक है।
❀ दिव्य विवाह (रुक्मिणी विवाह): मंदिर के अंदर पारंपरिक वैदिक विवाह रीति-रिवाजों के अनुसार श्री मदन मोहन (कृष्ण) और देवी लक्ष्मी (रुक्मिणी) का विवाह संपन्न होता है।
❀ विशेष भोग और आरती: विभिन्न भोग, भजन और मंगला आरती की जाती है, और समारोह के बाद भक्तों को महाप्रसाद मिलता है।

संबंधित अन्य नामनिर्जला एकादशी
कारणरुक्मिणी और भगवान कृष्ण का विवाह हुआ।
उत्सव विधिAuspicious songs, Worship, Wedding Ceremonies

Rukmini Haran Ekadashi in English

Rukmini Haran Ekadashi is one of the significant annual festivals celebrated at the Puri Jagannath Temple. It is observed on the Shukla Paksha Ekadashi of the Jyeshtha Maas, coinciding with Nirjala Ekadashi.

रुक्मिणी हरण एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

❀ यह भगवान कृष्ण के प्रति रुक्मिणी की अटूट भक्ति का उत्सव है।
❀ यह सांसारिक बाधाओं पर आस्था, प्रेम और धर्म की जीत का प्रतीक है।
❀ भक्तों का मानना ​​है कि दिव्य विवाह को देखने से सुखी वैवाहिक जीवन, पारिवारिक सद्भाव और आध्यात्मिक समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
❀ चूंकि यह निर्जला एकादशी के दिन ही पड़ती है, इसलिए कई भक्त भगवान विष्णु के लिए कठोर व्रत भी रखते हैं।

रुक्मिणी हरण एकादशी जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा से पहले मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इसमें हजारों भक्त भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी के प्रतीकात्मक विवाह को देखने के लिए इकट्ठा होते हैं।

संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
2 June 2028
आवृत्ति
वार्षिक
समय
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, निर्जला एकादशी दिन
महीना
जून - जुलाई
मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
कारण
रुक्मिणी और भगवान कृष्ण का विवाह हुआ।
उत्सव विधि
Auspicious songs, Worship, Wedding Ceremonies
महत्वपूर्ण जगह
पुरी ओडिशा
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