Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

गणेश विनायक जी की कथा - प्रेरक कहानी (Shri Ganesh Vinayak Ji Ki Katha)


गणेश विनायक जी की कथा - प्रेरक कहानी
Add To Favorites Change Font Size
एक गाँव में माँ-बेटी रहती थीं। एक दिन वह अपनी माँ से कहने लगी कि गाँव के सब लोग गणेश मेला देखने जा रहे हैं, मैं भी मेला देखने जाऊँगी। माँ ने कहा कि वहाँ बहुत भीड़ होगी कहीं गिर जाओगी तो चोट लगेगी। लड़की ने माँ की बात नहीं सुनी और मेला देखने चल पड़ी।
माँ ने जाने से पहले बेटी को दो लड्डू दिए और एक घण्टी में पानी दिया। माँ ने कहा कि एक लड्डू तो गणेश जी को खिला देना और थोड़ा पानी पिला देना। दूसरा लड्डू तुम खा लेना और बचा पानी भी पी लेना। लड़की मेले में चली गई। मेला खत्म होने पर सभी गाँववाले वापिस आ गए लेकिन लड़की वापिस नहीं आई।

लड़की मेले में गणेश जी के पास बैठ गई और कहने लगी कि एक लड्डू और पानी गणेश जी तुम्हारे लिए और एक लड्डू और बाकी बचा पानी मेरे लिए। इस तरह कहते-कहते सारी रात बीत गई।

गणेश जी यह देखकर सोचने लगे कि अगर मैने यह एक लड्डू और पानी नहीं पीया तो यह अपने घर नहीं जाएगी। यह सोचकर गणेश जी एक लड़के के वेश में आए और उससे एक लड्डू लेकर खा लिया और साथ ही थोड़ा पानी भी पी लिया फिर वह कहने लगे कि माँगो तुम क्या माँगती हो?

लड़की मन में सोचने लगी कि क्या माँगू? अन्न माँगू या धन माँगू या अपने लिए अच्छा वर माँगू या खेत माँगू या महल माँगू! वह मन में सोच रही थी तो गणेश जी उसके मन की बात को जान गए। वह लड़की से बोले कि तुम अपने घर जाओ और तुमने जो भी मन में सोचा है वह सब तुम्हें मिलेगा।

लड़की घर पहुँची तो माँ ने पूछा कि इतनी देर कैसे हो गई? बेटी ने कहा कि आपने जैसा कहा था मैंने वैसा ही किया है और देखते ही देखते जो भी लड़की ने सोचा था वह सब कुछ हो गया।

भक्ति भारत द्वारा आप तक पहुंचाई गई यह कथा के बारे में आपके क्या विचार हैं ?
सकट चौथ पौराणिक व्रत कथा - राजा हरिश्चंद्र | सकट चौथ व्रत कथा: एक साहूकार और साहूकारनी | सकट चौथ पौराणिक व्रत कथा: श्री महादेवजी पार्वती
यह भी जानें

Prerak-kahani Shri Ganesh Prerak-kahaniVinayak Prerak-kahaniGanesh Aur Bhakt Prerak-kahaniGanesh And Laddu Prerak-kahaniSakat Prerak-kahaniSakat Chauth Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

Latest Prerak-kahani ›

निस्वार्थ भाव से दान पुण्य करें - प्रेरक कहानी

ठाकुर का एक बेटा था, जो इस जगत को देख नहीं सकता था पर ठाकुर को उस परमात्मा पर विश्वास था..

जब काम न रहे तो - प्रेरक कहानी

एक आदमी ने एक भूत पकड़ लिया और उसे बेचने शहर गया, बस पाँच सौ रुपए है। मगर भूत तो भूत ही था। अपना मन ही वह भूत है..

मन की शांति कैसे प्राप्त करें? - प्रेरक कहानी

सेठ अमीरचंद के पास अपार धन दौलत थी। उसे हर तरह का आराम था, लेकिन उसके मन को शांति नहीं मिल पाती थी। हर पल उसे कोई न कोई चिंता परेशान किये रहती थी...

सच्चे देशभक्त की निष्ठा - प्रेरक कहानी

गुलजारीलाल नंदा को मकान मालिक ने किराया न दे पाने पर किराए के मकान से निकाल दिया। बूढ़े के पास एक पुराना बिस्तर, कुछ एल्युमीनियम के बर्तन, एक प्लास्टिक की बाल्टी और एक मग आदि के अलावा शायद ही कोई सामान था।

डमरू बजा, बारिश शुरू हो गई - प्रेरक कहानी

सहज विनोद भाव में बोलीं: प्रभु,आप भी अगर बारह वर्षों के बाद डमरू बजाना भूल गये तो?..

मैं सावंरे की कुदरत से हैरान हूँ - प्रेरक कहानी

वृंदावन शहर में एक वैघ थे, जिनका मकान भी बहुत पुराना था। वैघ साहब अपनी पत्नी को कहते कि जो तुम्हें चाहिए एक चिठ्ठी में लिख दो दुकान पर आकर पहले वह चिठ्ठी खोलते।

मीरा की भक्ति ! जब श्री कृष्ण ने अपना श्रृंगार बदला - सत्य कथा

भक्तमाल कथा: मीरा की भक्ति - जब श्री कृष्ण ने अपना श्रृंगार बदला | जीव गोसांई वृंदावन में वैष्णव-संप्रदाय के मुखिया थे। मीरा जीव गोसांई के दर्शन करना चाहती थीं, लेकिन उन्होंने मीरा बाई से मिलने से मना कर दिया।

Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Shri Krishna Bhajan - Shri Krishna Bhajan
Bhakti Bharat APP