
चैत्र नवरात्रि 2026 तिथिChaitra Navratri 2026 Dates |
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|---|---|---|---|
| दिन | तिथि | नवरात्रि में देवी के नाम | रँग |
| 19 मार्च | अमावस्या | माता शैलपुत्री पूजा, नवरात्रि घटस्थापना, नववर्ष | पीला |
| 20 मार्च | द्वितीया | माता ब्रह्मचारिणी पूजा, चेटी चंड | हरा |
| 21 मार्च | तृतीया | माता चंद्रघंटा पूजा, मत्स्य जयन्ती, गणगौर | स्लेटी |
| 22 मार्च | चतुर्थी | माता कुष्मांडा पूजा | नारंगी |
| 23 मार्च | पंचमी | माता स्कंद माता पूजा, लक्ष्मी पंचमी | सफ़ेद |
| 24 मार्च | षष्ठी | माता कात्यायनी पूजा, यमुना छठ | लाल |
| 25 मार्च | सप्तमी | माता कालरात्रि पूजा | गहरा नीला |
| 26 अप्रैल | अष्टमी | माता महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी, अन्नपूर्णा अष्टमी | गुलाबी |
| 27 मार्च | नवमी | माता सिद्धिदात्री पूजा, राम नवमी, नवरात्रि पारण, स्वामीनारायण जयंती | बैंगनी |
| माता के भजन | दुर्गा चालीसा | माता आरती | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | नवरात्रि विशेष | दिल्ली में माता रानी के मंदिर | |||
❀ पूजा घर में घटस्थापना के स्थान को अच्छी तरह से साफ कर लें और पूर्व या उत्तर दिशा में घटस्थापना करें।
❀ इसके बाद उस स्थान को गंगाजल से पवित्र कर लें।
❀ फिर वहां पर थोड़ी सी साफ मिट्टी बिछा दें और फिर उस पर जौ के दाने डाल दें। फिर जौ के दानों को फिर से मिट्टी डालकर अच्छी तरह ढक दें। इसके बाद थोड़ा पानी छिड़कें।
❀ कलश में जल और गंगाजल भरकर उसमें एक सिक्का भी डाल दें। इस दौरान वरुण देव का ध्यान करें।
❀ इसके बाद कलश पर कलावा बांध दें। कलश के मुख पर मिट्टी का कटोरा रखें और कटोरे को जौ से ढक दें।
❀ फिर एक नारियल लें और उसे लाल चुन्नी में लपेट कर आम के पत्तों की एक टहनी रखें और नारियल को कलश के ऊपर रख दें।
❀ कलश को गणपति का रूप माना जाता है। इसलिए माता रानी की पूजा से पहले कलश की पूजा की जाती है।
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