गणेशोत्सव - Ganeshotsav
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कथाएँ

पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 12

नारदजी बोले - जब भगवान् शंकर चले गये तब हे प्रभो! उस बाला ने शोककर क्या किया! सो मुझ विनीत को धर्मसिद्धि के लिए कहिये।

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पद्मिनी एकादशी व्रत कथा

श्री भगवान बोले, हे राजन्! अधिकमास में शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है वह पद्मिनी (कमला) एकादशी कहलाती है।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 11

नारदजी बोले - सब मुनियों को भी जो दुष्कर कर्म है ऐसा बड़ा भारी तप जो इस कुमारी ने किया वह हे महामुने! हमसे सुनाइये।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 10

नारद जी बोले - हे तपोनिधे! परम क्रोधीदुर्वासा मुनि ने विचार करके उस कन्या से क्या उपदेश दिया। सो आप मुझसे कहिये।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 8

सूतजी बोले - हे तपोधन! विष्णु और श्रीकृष्ण के संवाद को सुन सन्तुष्टमन नारद, नारायण से पुनः प्रश्न करने लगे।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 7

सूतजी बोले - हे तपोधन! आप लोगों ने जो प्रश्न किया है वही प्रश्न नारद ने नारायण से किया था सो नारायण ने जो उत्तर दिया वही मैंआप लोगों से कहता हूँ।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 6

नारदजी बोले - भगवान् गोलोक में जाकर क्या करते हैं? हे पापरहित! मुझ श्रोता के ऊपर कृपा करके कहिये।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 5

नारद जी बोले - हे महाभाग! हे तपोनिधे! इस प्रकार अधिमास के वचनों को सुनकर हरि ने चरणों के आगे पड़े हुए अधिमास से क्या कहा?

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 4

श्रीनारायण बोले - हे नारद! भगवान् पुरुषोत्तम के आगे जो शुभ वचन अधिमास ने कहे वह लोगों के कल्याण की इच्छा से हम कहते हैं, सुनो।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 3

ऋषिगण बोले - हे महाभाग! नर के मित्र नारायण नारद के प्रति जो शुभ वचन बोले वह आप विस्तार पूर्वक हमसे कहें।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 2

सूतजी बोले, राजा परीक्षित् के पूछने पर भगवान् शुक द्वारा कथित परम पुण्यप्रद श्रीमद्भागवत शुकदेवजी के प्रसाद से सुनकर और अनन्तर राजा का मोक्ष भी देख कर..

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 1

कल्पवृक्ष के समान भक्तजनों के मनोरथ को पूर्ण करने वाले वृन्दावन की शोभा के अधिपति अलौकिक कार्यों द्वारा समस्त लोक को चकित करने वाले वृन्दावनबिहारी पुरुषोत्तम भगवान् को नमस्कार करता हूँ।

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श्री पुष्टिपति विनायक माहात्म्य

भगवान श्री गणेश ने अपने भक्तों के कल्याण तथा दैत्यों के विनाश के लिए अनेक अवतार धारण किए। मुद्गल पुराण में वर्णित है कि पुष्टिपति विनायक भगवान गणेश के दिव्य अवतारों में से एक हैं।

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हिरण्यगर्भ दूधेश्वर ज्योतिर्लिंग प्रादुर्भाव पौराणिक कथा!

पुराणों में हरनंदी के निकट हिरण्यगर्भ ज्योतिर्लिंग का वर्णन मिलता है। हरनंदी,हरनद अथवा हिरण्यदा ब्रह्मा जी की पुत्री है...

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Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
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