Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

शिशु प्रेम लेकर तो आता है - प्रेरक कहानी (Shishu Prem Lekar To Ata Hai)


शिशु प्रेम लेकर तो आता है - प्रेरक कहानी
Add To Favorites Change Font Size
शिशु जब संसार में आता है तो वह जीने का सही अर्थ जानता है - सबसे प्रेम करना। वसुधैव कुटुम्बकम् तो उसके डीएनए में है। कोई अपरिचित भी प्रेम से पुचकार दे, भरोसा जीत ले, तो चलना न भी आये तो लुढ़कता-पुढ़कता गोद में चला आता है, कुछ माँगने या पाने के लिए नहीं, बल्कि केवल प्रेम देने और लेने के लिए निस्वार्थ और निश्छल प्रेम, जिसमे सांसारिकता की कोई मिलावट नहीं।
'संसार' नाम का छलावा अभी उसे सिखाया नहीं गया! माया से दूर है। वह तो स्वयं राम है। जिसकी गोद में नन्द चला जाय उसे आ-नन्द से भर देता है, संसार नाम का दुःख भुला देता है।

नन्हा सा शिशु भी निर्बल से निर्बल व्यक्ति के सीने से लग जाय तो जीने की उमंग और पूरे ब्रह्माण्ड से लड़ने की शक्ति भर देता है, क्योंकि उस समय व्यक्ति निजी अहंकार और स्वार्थ के दलदल से ऊपर उठ जाता है, बुरे से बुरे व्यक्ति में भी शिशु पुण्य का प्रकाश भर देता है। क्योंकि शिशु परमात्मा के निकट है। उसके मन-बुद्धि-अहंकार में पिछले जन्मों से आये अच्छे-बुरे संस्कार अभी बीजरूप में ही हैं, जन्मकुण्डली में पाप की ग्रन्थियां खुली नहीं हैं।

अतः मन्दिर जाकर इष्टदेवता की आराधना करने से अधिक पुण्य तो फुटपाथ पर भटकते किसी अनाथ बच्चे की यथाशक्ति सहायता करने से मिलता है - क्योंकि परमात्मा से बड़ा कोई इष्टदेवता नहीं, वह परम आत्मीय आत्मा है। राम भी जपा तो माया के लिए। सुख खोजा केवल काया के लिए।

शिशु प्रेम लेकर तो आता है किन्तु संसार का कबाड़ा उसे नहीं आता, सीखना पड़ता है। शिशु को हम शिक्षित करते हैं ताकि संसार में जीने योग्य बन सके, समस्याओं से जूझ सके।

उसे हम शिक्षा कैसे देते हैं ? प्रतीकों (symbols) के माध्यम से। भाषा के शब्द भी प्रतीक हैं, हाव-भाव या चित्र भी प्रतीक हैं। किस चीज के प्रतीक? ऑडियो-विजुअल माध्यमों (पुस्तकों, प्रवचनों, चित्रों या चलचित्रों) द्वारा हम जो कुछ भी सिखाते हैं वे किन चीजों का ज्ञान देते हैं? वह ज्ञान कितने काम का है? इसका अर्थ सिद्ध करना चाहिए?
यह भी जानें

Prerak-kahani Shishu Prerak-kahaniChildren Prerak-kahaniChild Prerak-kahaniNew Born Prerak-kahaniVasudhaiv Kutumbakam Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

पीपल एवं पथवारी की कथा - प्रेरक कहानी

एक बुढ़िया थी। उसने अपनी बहू से कहा तू दूध दही बेच के आ। वह बेचने गई तो रास्ते में औरतें पीपल पथवारी सींच रहीं थीं..

सेवा भाव ना भूलें, क्षमाशील बनें - प्रेरक कहानी

एक राजा था, उसने 10 खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे। जिनका इस्तेमाल वह लोगों को उनके द्वारा की गयी गलतियों पर मौत की सजा देने के लिए करता था...

भिखारी के माध्यम से लोगों को संदेश - प्रेरक कहानी

बनारस में एक सड़क के किनारे एक बूढ़ा भिखारी बैठता था। वह उसकी निश्चित जगह थी। आने-जाने वाले पैसे या खाने-पीने को कुछ दे देते। इसी से उसका जीवन चल रहा था।

बहरूपियों से हमेशा सतर्क एवं सावधान रहें - प्रेरक कहानी

अचानक उसने अपने वस्त्र के अंदर से तीर कमान निकाला और झट से कबूतर को मार दिया।..

अपनी शिक्षाओं की बोली ना लगने दें - प्रेरक कहानी

एक नगर में रहने वाले एक पंडित जी की ख्याति दूर-दूर तक थी। पास ही के गाँव में स्थित मंदिर के पुजारी का आकस्मिक निधन होने की वजह से...

भक्त का भाव ही प्रभुको प्रिय है - प्रेरक कहानी

बनारस में उस समय कथावाचक व्यास डोगरे जी का जमाना था। बनारस का वणिक समाज उनका बहुत सम्मान करता था। वो चलते थे तो एक काफिला साथ चलता था।

श्री राम नाम जाप महिमा

अगर तुम तीन बार राम नाम का जाप करते हो तो यह सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या १००० बार ईश्वर के नाम का जाप करने के बराबर है।

Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP