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प्रार्थना: वह शक्ति हमें दो दया निधे!


उत्तर प्रदेश के साथ अधिकतर उत्तर भारत के सरकारी स्कूल में 1961 से ही गाई जाने वाली सबसे प्रसिद्ध प्रार्थना।

वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्त्तव्य मार्ग पर डट जावें।
पर-सेवा पर-उपकार में हम, जग(निज)-जीवन सफल बना जावें॥
॥वह शक्ति हमें दो दयानिधे...॥

हम दीन-दुखी निबलों-विकलों के सेवक बन संताप हरें।
जो हैं अटके, भूले-भटके, उनको तारें खुद तर जावें॥
॥वह शक्ति हमें दो दयानिधे...॥

छल, दंभ-द्वेष, पाखंड-झूठ, अन्याय से निशिदिन दूर रहें।
जीवन हो शुद्ध सरल अपना, शुचि प्रेम-सुधा रस बरसावें॥
॥वह शक्ति हमें दो दयानिधे...॥

निज आन-बान, मर्यादा का प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहे।
जिस देश-जाति में जन्म लिया, बलिदान उसी पर हो जावें॥
॥वह शक्ति हमें दो दयानिधे...॥

इस कविता के लेखक मुरारीलाल शर्मा बालबंधु थे।
जन्म- 1893
ग्राम - साइमल की टिकड़ी
जिला- मेरठ, उत्तर-प्रदेश
निधन- 4 नवम्बर 1961

Available in English - Wah Shakti Hamain Do Daya Nidhe
The most famous prayer to be sung in Uttar Pradesh, mostly from the government school of North India
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श्री हनुमान बाहुक

असहनीय कष्टों से हताश होकर अन्त में उसकी निवृत्ति के लिये गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमानजी की वन्दना आरम्भ की जो कि ४४ पद्यों के हनुमानबाहुक प्रसिद्ध स्तोत्र लिखा।

श्री हनुमान साठिका

जय जय जय हनुमान अडंगी। महावीर विक्रम बजरंगी॥ जय कपीश जय पवन कुमारा। जय जगबन्दन सील अगारा॥

श्री बजरंग बाण पाठ।

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

संकट मोचन हनुमानाष्टक

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