एक बिलीपत्रं एक पुष्पम् एक लोटा जल की धार
दयालु प्रभु रीझ के देत है चंद्र मोली फल चार
वघंबराम भस्मांबरम् जटाजुट लिबास
आसन जमा के बैठे है कृपा सिंधु कैलाश
हर हर शम्भो
शंभु, पैयाँ पड़ूँ, तोहे बिनती करूँ,कृपा कीजो।
दया करके शिव, दर्शन दीजो॥
भालपे चंद्र चिता-भस्म सोहे,
भाविक भक्तों को शिवरूप मोहे।
शंभु, करुणा करो,
विषधर कंठ धरो, अमृत दीजो।
दया करके शिव, दर्शन दीजो॥
वेद "नेति-नेति" कहके हारे,
"हर हर महादेव" कहके पुकारे।
सारे जग में है तू,
मैं भी तेरे में हूँ,शक्ति दीजो।
दया करके शिव, दर्शन दीजो॥
हूं तो एकल पंथी प्रवासी,
छता आतम केम उदासी..
तारी पूजा करू,
मानमा धीर धरु, आशीष दीजो।
दया करके शिव, दर्शन दीजो॥
ए महादेव दया करी शिव दर्शन आपो
शंभु शरणे पड़ी मांगु घडी रे घडी कष्ट कापो
दया करी शिव दर्शन आपो
ए भोळानाथ दया करी दर्शन आपो॥